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अमर उजाला EXCLUSIVE : प्राइम वीडियो के निदेशकों से समझिए कैसे बदलाव ही कामयाबी की पहली सीढ़ी है..!!

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गौरव गांधी और विजय सुब्रमण्यम - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कुछ दशक पहले तक गांवों में नौटंकी और रामलीला के लिए घरों से चारपाइयां लेकर जाने वाले लोग अब उन्हीं चारपाइयों पर घर में लेटे लेटे दुनिया भर की सामग्री अपने मोबाइल पर देखने लगे हैं। वीडियो की ओवर द टॉप (ओटीटी) सर्विस प्रदाता कंपनियों में एक बड़ा नाम अमेजन प्राइम वीडियो का है। प्राइम वीडियो की भारतीय शाखा के दो निदेशकों गौरव गांधी और विजय सुब्रमण्यम से अमर उजाला के लिए पंकज शुक्ल ने ये एक्सक्लूसिव बातचीत की।
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गौरव गांधी, निदेशक और महाप्रबंधक, अमेजन प्राइम वीडियो, इंडिया - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
गौरव, बातचीत की शुरूआत आपसे करते हैं, आप अमेजन प्राइम वीडियो के भारत में कंट्री जनरल मैनेजर हैं। प्राइम वीडियो की भारतीय दर्शकों के लिए प्राथमिकता क्या है?
भारत विविधताओं का देश है। और, प्राइम वीडियो पर हमारी सामग्री भी विविध है। आज हम देश की 10 भाषाओं में अपनी मनोरंजन सामग्री उपलब्ध कराते हैं। बाहर से भी जो सीरीज या फिल्में लेकर हम आ रहे हैं, उन्हें भी हम भारतीय भाषाओं में डब कर रहे हैं। और, सिर्फ इतना ही नहीं हमने अपने ऐप में निर्देश देने या सर्च करने के लिए भी हिंदी के साथ तमिल और तेलुगू में सुविधा मुहैया कराई है। हम पूरे भारत में हैं। आज के समय में हमारी सेवाएं देश के 4300 शहरों व कस्बों तक पहुंच रही है, जो हमारे लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इन सेवाओं में हम अपने दर्शकों को सिर्फ नई फिल्में और सीरीज ही नहीं दिखाते बल्कि खरीदारी और संगीत का भी अलग अनुभव देते हैं।
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विजय सुब्रमण्यम, डायरेक्टर हेड कंटेंट, अमेजन प्राइम वीडियो, इंडिया - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
विजय, अमेजन प्राइम वीडियो पर जो भी सामग्री परोसी जा रही है, उसके आप मुखिया हैं। सीरीज ‘पाताललोक’ या फिर ‘शकुंतला’ या ‘गुलाबो सिताबो’ जैसी फिल्मों ने आपको दूसरे ओटीटी के मुकाबले कितनी बढ़त दिलाई है?
हमने भारत में जो तरक्की हासिल की है, वह हमारी पिछले दो-तीन साल की मेहनत और लगातार काम करने का नतीजा है। कोरोना के समय में भी हमारे पास ऐसी सामग्री तैयार थी, जिसकी योजना हमने काफी पहले से बनाई थी। ‘पाताल लोक’, ‘बंदिश बैंडिट्स’ या फिर ‘फोर मोर शॉट्स’ का दूसरा सीजन, ये सब हमारे ओटीटी के लिए ही बनी ओरीजनल सामग्री है। देश के तमाम बड़े बड़े स्टूडियो से हमारा गहरा रिश्ता हो चुका है। तो उसकी वजह से ही हम ये सब कर सके।

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अमेजन प्राइम वीडियो - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इन रिश्तों की वजह से ही आपको कुछ बड़ी फिल्में अपने ओटीटी पर दिखाने में सफलता मिल सकी?
जी बिल्कुल, इन निर्माताओं से जब हमने बात की, उन्हें जब हमने मौका दिखाया और उन्हें ये बताया कि सिनेमा में अभी विकल्प नहीं है। फिर हमने उन्हें जब ये दिखाया कि उनका सिनेमा दुनिया के कितने देशों में एक साथ देखा जाएगा तो सबने इसको बहुत अच्छे से समझा। हम लोग इन सबके साथ तीन चार साल से काम करते आए हैं। सबके साथ हमारा लंबा रिश्ता रहा है। हाल के समय में दर्शकों को भी हमारी सामग्री पसंद आई है और हम अच्छा ही कर रहे हैं।
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अक्षय कुमार - फोटो : instagram/akshaykumar
आपने निर्माता विक्रम मल्होत्रा और अभिनेता अक्षय कुमार को लेकर एक सीरीज की घोषणा पिछले साल की थी, उसमें क्या प्रगति है?
अभी उस शो के बारे में मैं इतना ही कह सकता हूं कि वह विकास के क्रम में है। हमने उसकी कोई समय सीमा या समय रेखा बनाई नहीं है। वैसे भी कोविड 19 की वजह से बुहत सारा काम शुरू ही नहीं हो सका है।
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अमेजन - फोटो : फाइल
गौरव, आपने बताया कि अमेजन की सेवाएं देश के 4300 शहरों व कस्बों तक पहुंच चुकी हैं, वहां तक प्राइम वीडियो की सामग्री भी पहुंचे, इसके लिए आपकी क्या रणनीति है?
इसे हम तीन तरह से देख सकते हैं। हमारे कुछ ग्राहक तो पहले से हैं। उनके लिए हम नई सामग्री का प्रचार डिजिटल पर करते हैं। फिर कुछ ऐसे लोग हैं जिनको हमें ओटीटी पर लाना होता है, जो अभी टीवी या दूसरे तरीकों में उलझे हैं। उनके लिए हम आउट ऑफ होम मीडिया या रेडियो आदि की मदद लेते हैं और फिर तीसरे हैं हमारे वे ग्राहक तो अमेजन की शॉपिंग वेबसाइट पर हैं। तो हम हर तरीके से उन तक पहुंचने की कोशिश करते हैं और हर तरह की सामग्री लेकर आते हैं।
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सिनेमाघर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
तो डिजिटल दौर में ग्राहकों को लेकर आपका शोध क्या कहता है?
हमें ये देखना होगा कि ग्राहक की पसंद क्या है। पहले हिंदी फिल्में सिर्फ सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में प्रदर्शित होती थी। हजार सीटों वाला हॉल होता था, उसे भरने के लिए एक जैसी मसालेदार फिल्में चाहिए होती थीं। ये मसाला फॉर्मूला तब आउट हुआ जब देश में मल्टीप्लेक्स खुले। सौ सौ सीटों वाले थिएटर बन गए। दर्शकों की पसंद बदली तो ‘दिल चाहता है’ और ‘गली ब्वॉय’ जैसी फिल्में भी हिट हुईं। समय के साथ ग्राहक की पसंद बदलती है, हम बदलते हैं कि नहीं, असली सूत्र यही है।

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गुलाबो सिताबो - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
पश्चिमी भारत में अंग्रेजी कंटेंट की खपत बढ़ी है जबकि दिल्ली उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ जैसे राज्यों में हिंदी मनोरंजन पर खर्चे में वृद्धि साल दर साल दहाई का अंक छू रही है, इन नए लोगों तक प्राइम वीडियो कैसे पहुंच रहा है?
हां, आश्चर्य हमें भी इस बात पर होता है कि दक्षिण भारतीय भाषाओं में बनी सामग्री के ग्राहक अब उनके अपनी भाषा वाले राज्यों जितने ही दूसरे राज्यों से भी आ रहे हैं। मतलब कि तेलुगू में बना कंटेंट जितना वहां के लोग देख रहे हैं, करीब करीब उतने ही दर्शक इसे दूसरी जगहों के भी देख रहे हैं। डिजिटल में ये भारतीय भाषाओं के यौवन का समय है। हमारी विपणन नीति भी इसी तरह काम करती है। मशहूर सितारों को चाहने वालों के बीच हम जाते हैं। ‘शकुंतला देवी’ में हमने विद्या बालन के साथ मिलकर उनके चाहने वालों के साथ काफी प्रयोग किए और इसका हमें फायदा भी मिला। ‘गुलाबो सिताबो’ की जटिल जिह्वा प्रतियोगिताएं भी खूब लोकप्रिय हुईं। हम लगातार सीख रहे हैं। हम ये भी सीख रहे हैं कि भारतीय भाषाओं यानी कि स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध सामग्री ही असली गेमचेंजर है।
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पैरासाइट - फोटो : ट्विटर
विजय, मेरी जानकारी ये कहती है कि दुनिया में प्राइम वीडियो के जितने भी ग्राहक हैं, उनमें से आधे के करीब अब भारत से हो चुके हैं, इनको प्रभावित करने के लिए प्राइम वीडियो के पास आगे की क्या रणनीति है?
हमारी नीति ये कहती है कि हम विभिन्न देशों के ग्राहकों की संख्या को अलग अलग करके नहीं बताते हैं। लेकिन, हां, आपके सवाल के जवाब में मैं यह कह सकता हूं कि भारत हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण बाजार है। प्राइम वीडियो यहां पिछले दो तीन साल से बहुत तेजी से आगे जा रहा है। हमने इस बीच काफी दिलचस्प शोज बनाए हैं। विदेश के ‘द ब्वॉयज’ जैसे शोज भारत में भी काफी लोकप्रिय हुए हैं। इन्हें हमने भारत में बहुभाषी विकल्पों के साथ उपलब्ध कराया है। ऑस्कर विजेता फिल्में जैसे ‘जोकर’ और ‘पैरासाइट’ भी लेकर आए। हमारी सामग्री की विविधता और हमारा प्राइम अनुभव ही हमारी कामयाबी है।  

 
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