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बराक ओबामा की पसंद से स्टार बनें जयपुर के ये गायक, जानें कौन हैं प्रतीक कुहाड़

Mon, 09 Nov 2020 02:26 PM IST
anand anand बीबीसी हिंदी
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प्रतीक कुहाड़, बराक ओबामा - फोटो : twitter
पिछले साल दिसंबर में प्रतीक कुहाड़ नई दिल्ली में अपने घर पर बैठे थे कि तभी उनके फ़ोन पर अचानक सैकड़ों मैसेज आए गए। ''क्या तुमने ये देखा, ये बहुत बड़ी बात है।'' गायक प्रतीक कुहाड़ कहते हैं, ''मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो किस बारे में बात कर रहे हैं।'' लेकिन, थोड़ी बाद उन्हें समझ आया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के पसंदीदा गानों की सूची में उनका एक गाना 'कोल्ड मेस' भी शामिल हो गया है। वो गाना जो अमेरिका की चार्टबीट्स में भी नहीं आया था लेकिन वो ओबामा के 35 पसंदीदा गानों की सूची में आ गया। इस सूची में ब्रूस स्प्रिंग्सटीन, दबेबी, लिजो और बियोंसे के गाने भी शामिल हैं। कुहाड़ कहते हैं कि उन्हें बिल्कुल भी पता नहीं है कि ये गाना बराक ओबामा तक कैसे पहुँचा लेकिन इससे उन्हें करियर में बहुत बढ़ावा मिला। वह कहते हैं, ''यह बहुत अजीब बात थी। ये सब अचानक से हो गया।''
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प्रतीक कुहाड़ - फोटो : instagram: prateekkuhad
प्रतीक भारतीय हैं लेकिन 2016 में पहली बार रिलीज हुआ उनका ये गाना तड़क-भड़क वाले बॉलीवुड गानों से अलग है। यह अंग्रेजी भाषा में है और बहुत शांत संगीत के साथ बनाया गया है। ये दो प्रेमियों की कहानी है जिनके रिश्ते में टकराव है लेकिन वो अलग भी नहीं हो पा रहे हैं। प्रतीक कुहाड़ ने चार साल पहले एक कॉन्सर्ट में इसे गाया था जिसे लोगों ने काफ़ी पसंद किया था। वो कहते हैं, ''जिस शो में किसी ने भी पहले से वो गाना नहीं सुना था, उसमें इसे लेकर मुझे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। तब मुझे समझ आ गया कि ये गाना खास होने वाला है।''
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प्रतीक कुहाड़ - फोटो : instagram: prateekkuhad
इससे प्रेरणा लेकर उन्होंने छह और गानों की एक छोटी एल्बम बनाई। ये सभी गाने उसी रिश्ते के इर्दगिर्द बनाए गए। ओबामा के पसंदीदा गानों में आने से पहले भी ये गाना भारत में काफ़ी पसंद किया जा चुका था जो कि कई लोगों के लिए हैरानी वाली बात भी थी। प्रतीक कुहाड़ कहते हैं, ''भारत में ये आम धारणा है कि यहां सफल होने के लिए हिंदी गायक होना जरूरी है। इंग्लिश गानों के साथ आप सिर्फ़ दिल्ली और मुंबई में एक छोटे से खास वर्ग तक ही पहुंच बना सकते हैं लेकिन, कोल्ड मैस ने इस धारणा को तोड़ दिया।''

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प्रतीक कुहाड़ - फोटो : instagram: prateekkuhad
पिछले साल के अंत में ही प्रतीक कुहाड़ ने दिल्ली के गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसेज में नौ हजार दर्शकों के सामने ये गाना गाया था। साल 2011 मे उनके पहले गाने 'समथिंग रॉन्ग' के रिलीज होने के बाद आठ साल की कड़ी मेहनत से उनके करियर ने धीरे-धीरे उड़ान भरी है। प्रतीक कुहाड़ का जन्म जयपुर में हुआ था और वो वहीं पर पले-बढ़े हैं। उन्होंने छह साल की उम्र में गिटार बजाना शुरू किया था लेकिन शुरुआत में ये उन्हें बहुत पसंद नहीं आया। वह हँसते हुए बाताते हैं, ''मैंने गिटार की छह क्लास लेने के बाद ही उसे छोड़ दिया था क्योंकि वो बहुत मुश्किल था। फिर बाद में हाई स्कूल के दौरान गिटार क्लास ली लेकिन उसमें फेल हो गया।''
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प्रतीक कुहाड़ - फोटो : instagram: prateekkuhad
हालांकि, अपनी रूचि के कारण प्रतीक कुहाड़ जहां से भी संभव हो संगीत सुनने और सीखने की कोशिश करते थे। उनके समय में इंटरनेट नहीं था तो ऐसे में उनकी बहन की दोस्त ने उनकी संगीत सीखने में मदद की। वह बताते हैं, ''वह बेंगलुरु में रहती थीं जो एक बड़ा शहर है। वो वहां से मेरी बहन को गानों के कैसेट भेजा करती थीं। इससे मैंने उस समय बहुत सारे लोकप्रिय गाने सुने।'' 2008 में प्रतीक ने न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड साइंस में दाखिला लिया और गणित,अर्थशास्त्र में संयुक्त डिग्री प्राप्त की। वह फाइनैंस के क्षेत्र में काम करना चाहते थे। लेकिन, अमेरिका में रहते हुए वो एलिअट स्मिथ, लॉरा मार्लिंग और निक ड्रेक जैसे गायकों-गीताकरों से मिले और उनका रुझान फिर से संगीत की ओर हो गया।
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प्रतीक कुहाड़ - फोटो : instagram: prateekkuhad
उन्होंने पूरी दिलचस्पी के साथ गिटार बजाना, अपने गाने लिखना और लाइव परफॉर्मेंस देना शुरू किया। इस सबके बावजूद भी प्रतीक कुहाड़ म्यूजिक में करियर बनाने को लेकर ठीक से फ़ैसला नहीं कर पाए थे। वह कहते हैं, ''म्यूजिक कभी मेरे लिए करियर का विकल्प या बहुत गंभीरता से किया जाने वाला काम नहीं हो सकता था।'' इसके बाद उन्होंने कंसल्टेंट का काम शुरू किया लेकिन कुछ महीनों बाद ही उन्हें अहसास हुआ कि वो इस काम के लिए नहीं बने हैं। वह कहते हैं, ''कुछ भी ठीक नहीं था। मुझे खुद पर शक हो रहा था। तभी मेरे दिल से 'समथिंग रॉन्ग' गाना निकला।'' नौकरी छोड़ने के बाद ये गाना उनका पहला अपना गाना था। इसके बाद वो वापस नई दिल्ली आ गए।
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प्रतीक कुहाड़ - फोटो : instagram: prateekkuhad
हालांकि, प्रतीक कहते हैं कि ये गाना अब लोगों को खास पसंद नहीं आएगा। वो बहुत लापरवाही में लिखा गया था और उसका प्रोडक्शन भी औसत था। उन्हें 2013 में आई अपनी अगली रिलीज 'रात राजी' पसंद हैं जो उनका पहला गंभीर गाना था। ये हिंदी में था जिसने उन्हें पहचान दिलाई थी। म्यूजिक इंडस्ट्री के दिग्गज माने जाने वाले जेफ भास्कर की एक सलाह भी उनके काफ़ी काम आई। जेफ भास्कर ने भारत में एक मास्टर क्लास लेते हुए प्रतीक का म्यूजिक सुना था। उन्होंने प्रतीक के म्यूजिक में और मेलोडी की जरूरत बताई थी।
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प्रतीक कुहाड़ - फोटो : instagram: prateekkuhad
प्रतीक कुहाड़ कहते हैं कि उन्हें इससे काफ़ी मदद मिली और उन्होंने मेलोडी पर भी ध्यान देना शुरू किया। भले ही उनके एक्सटेंडेट प्ले (गानों की छोटी एल्बम) ने प्रतीक कुहाड़ को बड़ी पहचान दिलाई थी लेकिन फिर भी उन्हें कोल्ड मैस के ज्यादा लोगों तक ना पहुंच पाने का दुख होता था। वह कहते हैं कि इसलिए वो एलकेट्रा रिकॉर्ड्स के साथ इस एल्बम को फिर से रिलीज करने वाले हैं। इस दौरान प्रतीक कुहाड़ ने 'कसूर' नाम से भारत में एक गाना भी रिलीज किया है जो लॉकडाउन से जुड़ा लग रहा है। लेकिन, प्रतीक का कहना है कि उन्होंने एक साल पहले ही इसके बारे में सोच लिया था।
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