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हिंदी फिल्मों का यह पुलिस कमिश्नर: 'डॉन' से लेकर 'गैंबलर' तक आ चुके हैं इसकी गिरफ्त में

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इफ्तेखार - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक्स

सफलता का सपना लिए हर दिन एक नया चेहरा हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपना भाग्य आजमाने आता है। कुछ को कामयाबी मिल भी जाती है, तो वहीं कुछ अधूरे सपने लिए भटकते रहते हैं तो कुछ वापस लौट जाते हैं। लेकिन इन सबमें कुछ ऐसे चेहरे होते हैं, जो दर्शकों के दिल-ओ-दिमाग पर अपनी एक अलग छाप छोड़ जाते हैं।

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इफ्तेखार - फोटो : Social media
इन्हीं में से एक हैं इफ्तेखार। इनके चाहने वालों के जहन में आज भी उनकी छवि पुलिस की वर्दी में जिंदा होगी। दरअसल, उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में पुलिस इंस्पेक्टर और कमिश्नर का रोल सबसे अधिक निभाया। पुलिस कमिश्नर की भूमिका संख्या में कुछ ज्यादा है। उनके फैंस जब भी उन्हें याद करते हैं, पुलिस वर्दी पहने पलती-दुबली काठी वाले इफ्तेखार की तस्वीर उनके दिमाग तरोताजा हो जाती है।
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इफ्तेखार - फोटो : Social media

इफ्तेखार का पूरा नाम सैयदना इफ्तेखार अहमद शरीफ था। उनका जन्म 22 फरवरी 1922 में ब्रिटिश भारत के पंजाब के जालंधर में हुआ था। वे अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनका जन्म तो जलंधर में हुआ था, लेकिन बचपन उत्तरप्रदेश के कानपुर में गुजरा। वे पेंटिंग और गायिकी के बड़े शौकीन थे। इसलिए उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के बाद लखनऊ आर्ट कॉलेज से पेंटिंग में डिप्लोमा किया था।

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इफ्तेखार - फोटो : Social media
इफ्तेखार को गाने का भी बड़ा शौक था। वे कुंदनलाल सहगल से बड़ा प्रभावित थे। जब वे 20 साल के हुए तो म्यूजिक कंपोजर कमलदास गुप्ता के एक ऑडिशन के लिए कलकत्ता चले गए थे। कमलदास उनसे प्रभावित हो गए और उन्हें एमपी प्रोडक्शन में अभिनय का मौका दे डाला। इफ्तेखार ने 1944 में फिल्म ‘तकरार’ से अपना डेब्यू किया था। यह फिल्म आर्ट फिल्म कोलकाता के बैनर तले बनी थी।
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पत्नी हिना संग इफ्तेखार - फोटो : Social media

बता दें कि बंटवारे के समय उनके ज्यादातर रिश्तेदार और दोस्त यहां तक कि माता-पिता भी पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन उन्होंने भारत को चुना। हालांकि उन्हें पत्नी और बच्चियों को लेकर कलकत्ता छोड़ने के लिए दवाब बनाया गया। तब वे इनके साथ बॉम्बे चले गए थे। यहां पहुंचकर उन्होंने जी तोड़ संघर्ष किया।

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Iftekhar - फोटो : file photo

कलकत्ता में रहते हुए इफ्तेखार अशोक कुमार को जान गए थे। बॉम्बे आकर उन्होंने बॉम्बे टॉकीज मूवी के तहत बन रही ‘मुकद्दर’ (1950) में किरदार पाने के लिए उनसे संपर्क साधा। इफ्तेखार ने अपने 1940 से लेकर 1990 तक के फिल्मी करियर में 400 से अधिक फिल्मों में काम किया। 1960 से 1970 वाले सालों में उन्हें खूब सफलता मिली। उन्होंने बंदिनी, सावन भादो, खेल खेल में और एजेंट विनोद जैसी फिल्मों में काम किया।

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इफ्तेखार - फोटो : Social media
यश चोपड़ी की अभिताभ बच्चन स्टारर फिल्म ‘दीवार’ में उनके काम को काफी तारीफ मिली थी। इसके अलावा अमिताभ स्टारर ही प्रकाश मेहरा की फिल्म ’जंजीर’ में भी उनके रोल को याद रखा गया। इसमें भी उन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर का रोल निभाया था। इन सबमें एक फिल्म ऐसी आई जो उनके चाहने वालों और याद रखने वालों के लिए मील का पत्थर साबित हुई। ये मूवी थी अमिताभ बच्चन की ‘डॉन’। इसमें उन्होंने डॉन को पकड़ने के लिए एड़ी- चोटी का जोर लगा दिया था। इसी तरह 'गैंबलर' में भी उन्होंने बेहतरीन किया।
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Iftekhar - फोटो : file photo
इफ्तेखार ने जोरू का गुलाम, महबूब की मेहंदी, द ट्रेन, खामोशी, सफर, राजा रानी, इत्तेफाक, राजपूत और आवाम जैसी बेहतरीन फिल्मों में अभिनय किया। हिंदी फिल्मों के अलावा उन्होंने अमेरिकन टीवी सीरीज ‘माया’ (1967) में किया। 1970 में 'बॉम्बे टॉकी' और 1992 में ‘सिटी ऑफ जॉय’ में भी काम किया। 73 साल की उम्र में 1 मार्च 1995 में मुंबई में उनका निधन हो गया।

पुलिस इंस्पेक्टर बनकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाले अभिनेता थे जगदीश राज
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