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जमींदार के परिवार में जन्मे पंकज उधास, फिल्में फ्लॉप और गजल गायकी में टॉप, लव स्टोरी रोमांचक

Thu, 17 May 2018 07:58 AM IST
एंटरनेटमेंट डेस्क, अमर उजाला
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वाराणसी पंकज उधास - फोटो : SELF
गजलों की दुनिया में पंकज उधास एक ऐसे गायक जिन्होंने अपने सुरीली अवाजा से लाखों-करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बनाया। पंकज आज अपना 67वां जन्मदिवस मना रहे हैं। उनका जन्म गुजरात के राजकोट के पास जेटपुर में 17 मई 1951 को एक जमींदार परिवार में हुआ था। 




 
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pankaj udhas
पंकज उधास के संगीत प्रेम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज 7 साल की उम्र में वह गाने लगे थे। हालांकि शुरुआत में वह सिर्फ शौकिया तौर पर ही गाया करते थे लेकिन इनके इस टेलेंट को भाई मनहर ने पहचान लिया और उन्हें इस राह पर चलने के लिए प्रेरित किया। दरअसल बड़े भाई मनहर भी गाया करते थे और पंकज को वह अपने साथ समारोह में अपने साथ ले जाया करते थे। इस दौरान पकंज को एक बार एक संगीत कार्यक्रम में हिस्सा लेने का मौका मिला, जहां उन्होंने ‘ए मेरे वतन के लोगों’ गीत गाया। 

 
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pankaj udhas
पंकज की गायिकी से खुश होकर एक शख्स ने उन्हें 51 रुपए सम्मान स्वरुप दिए। इस बीच वह राजकोट की संगीत नाट्य अकादमी से जुड़ गए और तबला बजाना सीखने लगे। कुछ साल के बाद पंकज उधास का परिवार बेहतर जिंदगी की तलाश में मुंबई आ गया। उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई मुंबई के मशहूर संत जेवियर्स कॉलेज से हासिल की। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई करने के लिए दाखिला ले लिया लेकिन बाद में उनकी रुचि संगीत की ओर हो गई और उन्होंने उस्ताद नवरंग जी से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी।

 

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pankaj udhas
पंकज उधास की सिने करियर की शुरुआत 1972 में प्रदर्शित फिल्म कामना से हुई लेकिन कमजोर कहानी और निर्देशन के कारण फिल्म बुरी तरह असफल साबित हुई। इसके बाद गजल गायक बनने के उद्देश्य से उन्होंने उर्दू की तालीम हासिल करनी शुरू कर दी। पंकज उधास ने लगभग दस महीने तक टोरंटो रेडियो और दूरदर्शन में गाना गाया।

 
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pankaj udhas
इस बीच कैसेट कंपनी के मालिक मीरचंदानी से उनकी मुलाकात हुई और उन्हें अपनी नई एलबम आहट में पार्श्वगायन का अवसर दिया। यह अलबम श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। साल 1986 में प्रदर्शित फिल्म ‘नाम’ पंकज उधास के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में एक है। यूं तो इस फिल्म के लगभग सभी गीत सुपरहिट साबित हुए लेकिन उनकी मखमली आवाज में 'चिट्ठी आई है' आज भी श्रोताओं की आंखों को नम कर देती है।

 
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pankaj udhas - फोटो : amarujala
इस फिल्म की सफलता के बाद पंकज उधास को कई फिल्मों में पार्श्वगायन का अवसर मिला। इन फिल्मों में गंगा जमुना सरस्वती, बहार आने तक, थानेदार, साजन, दिल आश्ना है, फिर तेरी कहानी याद आई, ये दिल्लगी, मोहरा, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, मझधार, घात और ये है जलवा प्रमुख हैं। 

 
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Pankaj Udhas - Farida Udhas
पंकज उधास के करियर की तरह ही उनकी लवस्टोरी भी बड़ी दिलचस्प रही है। दरअसल, पंकज और फरीदा एक दूसरे को बेहद प्यार करते थे। दोनों शादी भी करना चाहते थे। जहां तक पंकज के परिवार की बात थी तो वे फरीदा को अपनाने को तैयार थे लेकिन फरीदा के परिवार ये कतई मंजूर न था। दोनों परिवार की रजामंदी से ही शादी करना चाहते थे। जब पंकज मशहूर हुए तो एक बार फिर शादी की बात शुरू की। फरीदा के पिता एक सख्स रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर थे लेकिन उनके प्यार के आगे उन्हें भी नर्म होना पड़ा।
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