राज्यों की तरफ से पेश हुए ASG तुषार मेहता ने दलील दी कि फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है। इस पर हरीश साल्वे ने फिल्म में दिखाए जाने वाले डिस्क्लेमर को कोर्ट के सामने पढ़कर सुनाया, जिसमें कहा गया है 'यह एक काल्पनिक कहानी पर आधारित है', इतिहास से इसका कोई लेना देना नहीं। साल्वे ने तो कोर्ट में यहां तक कहा 'एक दिन मैं चाहूंगा कि मैं इस बात पर दलील दूं कि कलाकारों को इतिहास से छेड़छाड़ का अधिकार भी होना चाहिए।' इस पर तुषार मेहता ने कहा 'ऐसा नहीं हो सकता। आप महात्मा गांधी को विस्की पीते नहीं दिखा सकते।' इस पर साल्वे ने कहा, 'लेकिन यह इतिहास से छेड़छाड़ नहीं होगी।' इस पर कोर्ट में मौजूद सभी लोग हंस पड़े।