अमित राय
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आपने 'रोड टू संगम' जैसी बेहतरीनन फिल्म निर्देशित की, कई समारोहों में फिल्म को खूब सराहा गया। फिर, दूसरी फिल्म 'ओएमजी 2' बनाने में आपको 13 साल कैसे लग गए?
सच बोलूं तो उस फिल्म के बाद किसी ने काम ही नहीं दिया। जो स्क्रिप्ट लोगों के पास लेकर जाता था, उस पर लोग काम करना ही नहीं चाह रहे थे। इस बीच जो मेरा संघर्ष रहा, उसका दर्द मुझसे ज्यादा मेरे परिवार वालो को सहना पड़ा। उस वक्त तो मेरा बच्चा छोटा था, उसको सेरेलेक दूध में न मिलाकर पानी में दे देता था और वह पी लेता था। उसको आटा में पानी मिलाकर दे दिया तो उसको क्या पता चला। यह मेरे लिए एक वनवास जैसा ही रहा। हालांकि उस बीच एक फिल्म 'आईपैड' की थी, वह फिल्म अभी आएगी। मैं किसी को दोष नहीं देता, क्योंकि यह पेशा मैने खुद ही चुना है। किसी ने मेरे कंधे पर बंदूक रखकर नहीं बोला था कि फिल्म बनाओ। मैं तो टीचर था, अच्छा खासा बच्चों को पढ़ा रहा था। उस काम को छोड़कर इस प्रोफेशन में आया। इस फिल्म के लिए मुझे नौ लोगों ने रिजेक्ट किया। लोग बोलते थे कि इस फिल्म का विषय अच्छा नहीं है, लेकिन मुझे इस विषय पर भरोसा था और, आज परिणाम आपके सामने है।