ओम राउत
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ओम, सिनेमा ने आपको सबसे पहले कब प्रभावित किया और ऐसा क्या हुआ आपकी आंखों के सामने कि आपने सिनेमा को ही अपना जीवन मान लिया?
सिनेमा मेरा सपना बचपन से रहा। लेकिन, इसको मूर्तरूप देने की मैंने ठानी निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म ‘जुरासिक पार्क’ देखने के बाद। मुझे लगा कि ये जो परदे पर डायनासोर चल रहे हैं, उन्हें वैसे तो बनाना मुमकिन नहीं है लेकिन क्या ये तकनीक होगी जिससे ये सब भी हो सकता है। तो मैंने फिल्मकार बनने से पहले इंजीनियर बनने का फैसला किया और वह सब सीखा जो सिनेमा में मेरे काम आ सके। इंजीनियर कौन होता है? वही ना जो किसी समस्या का सीढ़ी दर सीढ़ी हल तलाशता है। यही काम एक निर्देशक का है। हम अपनी समस्या कहानी के तौर पर पहले सोच लेते हैं, फिर उसे परदे पर फिल्म के तौर पर पेश कर देना ही हमारी ही बनाई इस समस्या का हल है।