नुसरत फतेह अली खान
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इसके बाद नुसरत फतेह अली खान ने अपने कंधों पर घर की जिम्मेदारी उठाने की ठानी। हालांकि, जिस वक्त दस्तारबंदी होनी थी, उस वक्त वहां मौजूद लोग चाहते थे कि वह गाकर सुनाए। उस समय वह गाना नहीं गाते थे, लेकिन बिना गायिकी की परीक्षा दिए ही उनकी दस्तारबंदी की गई, यानी उन्हें कव्वाली ग्रुप का प्रमुख बनाया गया। पिता के गुजर जाने के 40 दिन बाद खान साहेब ने कव्वाली गाई, जिसके बाद नुसरत फतेह अली ने छोटे-छोटे कार्यक्रमों और धार्मिक स्थलों पर गाना शुरू किया। वहीं, जब चाचा मुबारक अली खान ने इस दुनिया को अलविदा कहा तो कव्वाली ग्रुप की पूरी जिम्मेदारी उनको सौंप दी गई थी।
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