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आतंकियों से लोहा लेकर अकेले इस बेटी ने बचाई थी 360 जानें, मौत पर पाकिस्तान भी रोया था

Sat, 07 Sep 2019 12:01 PM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Neerja Bhanot - फोटो : Social Media
ब्रेव डॉटर ऑफ इंडिया नीरजा भनोट ने अपनी जान देकर 360 लोगों की बचाई थी और वो भी ऐसे कि जानकर पूरी दुनिया दंग रह गई थी। नीरजा की जिंदगी पर साल 2016 में एक फिल्म भी बनाई गई। इसमें सोनम कपूर ने नीरजा का किरदार निभाया था। इस किरदार के लिए सोनम की बहुत तारीफ हुई। 5 सितंबर को नीरजा भनोट का जन्मदिन था, इस मौके पर हम आपको वो कहानी बता रहे हैं जिसका लोहा पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया मानती है।
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Neerja Bhanot - फोटो : Social Media
5 सितंबर 1986 को अमेरिकी एयरवेज का विमान पैन एम73, करीब  380 यात्री लेकर पाकिस्तान के कराची हवाई अड्डे पर पायलट का इंतजार कर रहा था। अचानक उसमें चार हथियारबंद आतंकवादी घुस गए और सभी यात्रियों को गन प्वांइट पर ले लिया। आतंकवादी प्लेन को 9/11 की तरह इजराइल में किसी निर्धारित जगह पर क्रैश कराना चाहते थे, लेकिन नीरजा भनोट ने ऐसा नहीं होने दिया।
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Neerja Bhanot - फोटो : Social Media
आतंकियों ने पाकिस्तान सरकार से पायलट भेजने की मांग की, ताकि वो विमान को अपने मन मुताबिक जगह पर ले जा सकें, पाक सरकार ने मना कर दिया। इससे भन्नाए आतंकियों ने विमान में बैठे अमेरिकी यात्रियों को मारने का फैसला कर लिया। वो अमेरिका के जरिए पाक सरकार पर दबाव बनाने की ताक में थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था इसी विमान की 23 साल की अकेली पतली-दुबली फ्लाइट अटेंडेंट उन पर भारी पड़ जाएगी। आतंकियों ने गलती से नीरजा को बुला लिया और सभी यात्रियों के पासपोर्ट इकट्ठा करने को कहा, ताकि वो अमेरिकी नागरिकों को चुन-चुन कर मार सकें।

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Neerja Bhanot - फोटो : Social Media
लेकिन नीरजा ने आतंकियों की आंखों में धूल झोंक दी। विमान में अमेरिकी यात्री बैठे हुए थे, पर एक भी आतंकियों के हवाले नहीं हुए। लड़की ने सबके पासपोर्ट छुपा लिए। यह जानकर आतंकी तिलमिला उठे। वे एक अंग्रेज को खींचकर विमान के गेट पर ले आए और गोली मारने लगे। लेकिन यहां भी लड़की ने अपने कार्यकुशलता का परिचय दिया और आतंकियों का ऐसा दिमाग घूमाया कि उन्होंने उस ब्रिटिश को छोड़ दिया। आतंकियों और पाक सरकार में लगातार खींचातानी चलती रही।
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Neerja Bhanot - फोटो : Social Media
इधर 380 डरे हुए लोगों में एक अकेली भारतीय लड़की डटी रही। लड़की ने 17 घंटे हिम्मत बांधे रखी। अचानक उसे ख्याल आया कि अब विमान का ईंधन खत्म होने वाला है। ऐसा हुआ तो विमान में अंधेरा छा जाएगा और भगदड़ मच जाएगी। जिसमें बेतहाशा खून बहेगा। लड़की ने फिर अपने भारतीय होने की पहचान दी। उसने तत्काल आतंकियों को खाने का पैकेट दिया और यात्रियों को आपातकालीन खिड़कियों के बारे में तेजी समझाया। तभी विमान का ईंधन खत्म हो गया। चारों तरफ अंधेरा छा गया।
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Neerja Bhanot - फोटो : Social Media
इस बीच नीरजा ने मौका पाकर विमान के दरवाजे खोल दिए और यात्रियों ने प्लेन से नीचे कूदाना शुरू कर दिया। लेकिन इसी बीच दहशतगर्दों ने गोलियां दागना शुरू कर दी। मौका देखकर पाक कमांडो भी विमान के पास पहुंच गए। फिर दोनों तरफ से धुआंधार गोलीबारी के बीच लोग भागने लगे थे और नीरजा आतंकियों को छकाने में लगी थी। नीरजा ने आतंकियों को उलझाए रखा ताकि वो किसी को नुकसान न पहुंचा सकें और वो इसमें कामयाब भी रहीं।
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Neerja Bhanot - फोटो : Social Media
सबके निकल जाने के बाद आखिर में जब वो विमान से निकलने लगीं, तो अचानक उसे कुछ बच्चों के रोने की आवाज सुनाई दी। नीरजा ने रोते हुए बच्चों को छोड़कर भागना ठीक नहीं समझा। वो वापिस गईं और बच्चों को ढूंढ निकाला। जैसे ही वह उन्हें लेकर एक आपातकालीन खिड़की की ओर बढ़ीं एक आतंकी उनके सामने आ खड़ा हुआ। नीरजा ने बच्चों को नीचे धकेल दिया और आतंकी ने नीरजा को गोलियों से छलनी कर दिया।

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Neerja Bhanot - फोटो : Social Media
17 घंटे तक चले इस खून खराबे में अंततः 20 लोगों की जान चली गई और वो भारतीय वीरांगना भी शहीद हो गई। पाक की धरती पर ही दुनिया भर के 360 लोगों की जान बचाने वाली बहादुर बेटी नीरजा को पाकिस्तान भी सेल्यूट करता है। घटना के दो दिन बाद वो अपना 23वां जन्मदिन मनाने वाली थीं। लेकिन सपने अधूरे रह गए। 2004 में इस बात का पता चला कि 5 सितंबर, 1986 में हुई उस भयावह घटना के पीछे लीबिया के चरमपंथियों का हाथ था।
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नीरजा भनोच अवार्ड - फोटो : अमर उजाला
इस बहादुर बेटी को भारत ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'अशोक चक्र' से नवाजा तो पाक ने तमगा-ए-इन्सानियत से। भारत सरकार ने नीरजा के नाम पर डाक टिकट भी जारी किया था। मोगा के गांव घलकलां के देशभगत पार्क में उनका एकमात्र स्टेच्यू स्थापित किया गया है। वहीं पर 16 फुट लंबा जहाज बनाया गया है।
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