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EXCLUSIVE: नीना गुप्ता ने साझा की मन की बात, ‘मजबूत महिलाओं को परदे पर ठीक से पेश नहीं किया गया’

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नीना गुप्ता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इसी महीने की चार तारीख को 62 साल की हुईं अभिनेत्री नीना गुप्ता अनथक प्रयासों से सपने पूरे कर दिखाने की मिसाल बन चुकी हैं। ऊर्जा अब भी उनमें अथाह दिखती है। नए नए किरदारों को लेकर उनके भीतर का कलाकार हमेशा उत्सुक रहता है। अब करियर के 39वें साल में उन्हें मौका मिला है किसी फिल्म में टाइटल रोल करने का। अपनी पहली फिल्म में नीना गुप्ता से क्या हुई थी करियर की सबसे बड़ी गलती और अब नई कलाकरों को वह देना चाहती हैं कौन सी सलाह? बता रही हैं खुद नीना गुप्ता, ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल को इस एक्सक्लूसिव बातचीत में।
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नीना गुप्ता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किसी फिल्म के पोस्टर पर अपने किरदार का नाम देखकर खुश तो होंगी आप, क्या प्रतिक्रिया थी आपकी जब ये रोल आपके पास आया था?

एक दिन मेरे मैनेजर मेरे पास आए और बोले कि एक रोल है 90 साल की बुजुर्ग महिला का। निखिल आडवाणी निर्माता है फिल्म के। मैंने कहा कि पागल हो गए हो क्या? मैं क्यूं 90 साल की महिला का रोल करुंगी। समय है मेरे पास अभी। तो उन्होंने कहा कि आप पहले कहानी सुन लो। फिर न पसंद आए तो मना कर देना। ईश्वर का शुक्र है कि मैंने उनकी बात मानी। मैं गई। फिल्म की निर्देशक काशवी नायर ने मुझे फिल्म की कहानी सुनाई और कहानी पूरी होते ही मैंने सवाल किया कि बताइए शूटिंग कब करनी है!
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नीना गुप्ता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अभिनय का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिलाने वाली फिल्म ‘वो छोकरी’ के बाद से अब तक आपने तमाम दमदार किरदार किए, लेकिन मजबूत महिलाओं को देखने के सिनेमा के नजरिए में कोई फर्क पाती हैं आप?

मजबूत महिलाएं तो शुरू से थीं। लेकिन, मजबूत महिलाओं को परदे पर ठीक से पेश नहीं किया गया। नाटकों और वृत्तचित्रों में तो फिर भी हुआ लेकिन फिल्मों और टीवी में मजबूत महिला किरदारों को अच्छे नजरिये से पेश नहीं किया गया। अब एक दो चीजें हिट हो जाने से लोगों को प्रयोग करने का साहस मिला है। नए विषयों पर फिल्में बन रही हैं। मेरी उम्र के कलाकारों को भी अच्छे प्रोजेक्ट मिल रहें हैं। और, सिर्फ मजबूत महिलाओं के ही नहीं। ‘पंचायत’ में मेरा किरदार मजबूत महिला का नहीं है। ‘मसाबा मसाबा’ में तो मैं ही थी। मैं भाग्यशाली हूं कि आखिरकार मुझे इस उम्र में अच्छे रोल मिल रहे हैं। पहली बार मेरे किरदार के नाम पर फिल्म का नाम है। ऐसा इससे पहले मेरे जीवन में कभी नहीं हुआ।

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साथ साथ में नीना गुप्ता - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
रमन कुमार, विनोद पांडे, कुंदन शाह, श्याम बेनेगल और शशि कपूर जैसे निर्देशकों के साथ काम करने के बाद काशवी जैसे नई पीढ़ी के निर्देशकों के साथ काम करने में क्या अंतर महसूस करती हैं?

आपने जो सारे नाम जो गिनाए उसमें से लीड रोल सिर्फ काशवी ने दिया है। अब टाइम बहुत फर्क हो गया है। डायरेक्टर बहुत फर्क तरह से सोचते हैं। श्याम बेनेगल की फिल्म में मैने कभी लीड रोल नहीं किया। सारे लीड रोल शबाना को जाते थे, स्मिता को जाते थे और जो थोड़े छोटे रोल उनसे होते थे वे दीप्ति को जाते थे। मेरे लिए यही होता था कि इसको यही देना है। अभी भी है कि जैसा आपने किया है वैसा ही रोल देते रहते हैं। मैंने ये सीखा है। मुझसे जो सबसे बड़ी गलती फिल्म ‘साथ साथ’ में हुई, वह मैं बताना चाहती हूं कि ताकि दूसरे लोग वह गलती ना करें।
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नीना गुप्ता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जी, बिल्कुल बताइए...

किसी भी हीरोइन को करियर की शुरूआत में ही कभी लल्लू लड़की या कॉमेडी कभी नहीं करना चाहिए। इसके बाद हीरोइन का दर्जा आपको कभी नहीं मिलेगा। फिल्म ‘साथ साथ’ के प्रीमियर पर गिरीश कर्नाड आए थे तो उन्होंने कहा था कि अब तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता। अब कोई तुम्हें फिल्मों में लीड रोल नहीं देगा। अब तुम कभी हीरोइन नहीं बनोगी। और, ठीक वही हुआ। ‘जाने भी दो यारों’ में भी भक्ति बर्वे का रोल नहीं मिला मुझे।
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जाने भी दो यारों में नीना गुप्ता - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
हां, लेकिन मुझे अब भी याद है आपका वो पंकज कपूर की सेक्रेट्री वाला रोल काफी अच्छा था।

ये और भी बेहतर था। इसमें मेरा और रवि वासवानी का एक ट्रैक था जो फिल्म लंबी हो जाने की वजह से शुरू में ही हटा दिया गया था। लेकिन लीड हीरोइन तो भक्ति बर्वे ही थीं, ये तो आप मानेंगे ही। अब समय बदला है। नौजवान निर्देशक आ रहे हैं और वे विषयों के साथ प्रयोग कर रहे हैं। हम जैसों को भी अच्छे रोल मिल रहे हैं। टाइम थोड़ा बदल गया है और मैं खुश हूं कि मेरे रहते टाइम बदला है। अच्छे प्रोजेक्ट्स हैं मेरे पास। जल्दी से शुरू हो शूटिंग तो मैं इनका वेट कर रही हूं।
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नीना गुप्ता, अमिताभ बच्चन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आपका इशारा शायद अमिताभ बच्चन के साथ बन रही फिल्म ‘गुडबॉय’ की तरफ है, वह बहुत तैयारी के साथ सेट पर जाते हैं, आपकी क्या तैयारी है उनके साथ पहला सीन करने की?

फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले हमने एक फोटो शूट किया था। तो उसमें काफी हंसी मजाक चला और एक झिझक जो होती है वह दूर हो गई। मुझे लगता है कि जब सामने कोई प्रोफेशनल एक्टर हो तो कुछ करने की जरूरत नहीं होती। अगर कोई बुरा एक्टर हो जिसे कुछ आता न हो तो परेशानी होती है। हां, अमिताभ बच्चन जैसे अभिनेता के सामने थोड़ा सी हिचकिचाहट तो होती है कि मैं कैसे कर रही हूं, कैसे करूंगी, लेकिन एक बार सेट पर पहुंचकर सीन शुरू कर दो फिर आप कुछ नहीं सोचते। फिर सब नॉर्मल हो जाता है।


(इस इंटरव्यू का वीडियो प्रसारण आज शाम 7 बजे  आप अमर उजाला के फेसबुक व यूट्यूब पेज पर देख सकते हैं।)
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