Naushad
- फोटो : social media
टुनटुन, सुरैया, मोहम्मद रफी और शमशाद बेगम जैसी आवाजों को पहला ब्रेक देने वाले नौशाद एक मात्र संगीतकार हैं, जिन्होंने कुंदन लाल सहगल से लेकर कुमार सानू तक को प्लेबैक का मौका दिया।1981 में नौशाद अली को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। नौशाद की 2006 में मृत्यु हो गई थी। उन्होंने आखिरी बार साल 2005 में फिल्म 'ताज महल: एन एटरनल लव स्टोरी' के लिए गाना कंपोज किया था।