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National Films Awards 2021: बिहार का लाला मनोज ऐसे बना देश का लाल, इन 10 किरदारों में है क्रोनोलॉजी

Mon, 22 Mar 2021 08:04 PM IST
दीपाली श्रीवास्तव अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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मनोज बाजपेयी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अभिनेता मनोज बाजपेयी अपने घर में क्वारंटीन हैं। एक और नेशनल अवार्ड मिलने की खुशी वह लोगों के साथ फोन पर ही बांट रहे हैं। मनोज बाजपेयी का जीवन ऐसी तमाम आकस्मिक घटनाओं से भरा रहा है। उन्होंने तमाम अपमान सहा, तमाम जगहों पर दुत्कारे गए लेकिन वह अपने पथ से डिगे नहीं। आज उनकी गिनती हिंदी सिनेमा के दमदार कलाकारों की पहली पंक्ति में होती है। एनएसडी में उन्होंने थिएटर भी पढ़ाया है, ये और बात है कि इसी एनएसडी में एडमीशन के लिए उन्होंने ठोकरे भी खूब खाईं। अपने अभिनय के लिए अब तक तीन नेशनल और चार फिल्मफेयर अवार्ड्स जीत चुके मनोज को ढेर सारी बधाई और चलिए अब जानते हैं उनकी अभिनय यात्रा के उन मील के पत्थरों के बारे में जिन्होंने बिहार के इस लाला को मुंबई का किंग और देश का सच्चा लाल बना दिया।
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मनोज बाजपेयी
किरदार: पुष्कर

फिल्म: दौड़ (1997)


मनोज बाजपेयी अब तक द्रोहकाल, बैंडिट क्वीन, दस्तक, तमन्ना जैसी फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार ही करते आए थे। जब रामगोपाल वर्मा को पता चला कि मनोज ने 'बैंडिट क्वीन' में डकैत मानसिंह का किरदार निभाया है तो वह हैरान रह गए। उन्होंने इस फिल्म में मनोज को काम देने मना कर दिया क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि एक शानदार कलाकार एक मामूली सा किरदार करे। परंतु मनोज को उन दिनों पैसे की जरूरत थी सो उन्होने रामगोपाल वर्मा से ये काम मांगा और रामू ने भी तब मना नहीं किया। साथ ही रामू ने उन्हें फिल्म 'सत्या' की मुख्य भूमिका के लिए भी साइन कर लिया। इस फ्लॉप फिल्म में संजय दत्त और उर्मिला मातोंडकर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।
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सत्या - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार : भीकू म्हात्रे

फिल्म : सत्या (1998)


रामगोपाल वर्मा के निर्देशन में बनी इस शानदार फिल्म में मनोज बाजपेयी गैंगस्टर भीकू म्हात्रे के किरदार में नजर आए। शुरुआत में रामगोपाल ने मनोज को हीरो का किरदार करने के लिए फिल्म में साइन किया। लेकिन, कहानी पूरी होने के बाद रामगोपाल को एहसास हुआ कि इस फिल्म में विलेन पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। इसलिए, उन्होंने बाद में मनोज को भीकू म्हात्रे का किरदार करने के लिए कहा। इस किरदार को निभाने के लिए हिंदी पर अच्छी पकड़ होनी भी जरूरी थी। इस फिल्म में जेडी चक्रवर्ती, उर्मिला मातोंडकर, मनोज बाजपेयी, सौरभ शुक्ला, शेफाली शाह और परेश रावल ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। मनोज का एक्टिंग का पहला नेशनल फिल्म अवार्ड इसी फिल्म के लिए मिला।

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शूल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार: इंस्पेक्टर समर प्रताप सिंह

फिल्म: शूल (1999)


सत्या के सुपरहिट होने के बाद मनोज बाजपेयी ने इस फिल्म में दूसरी बार मुख्य भूमिका निभाई। ईश्वर श्रीनिवास के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मनोज इंस्पेक्टर समर प्रताप सिंह के किरदार में नजर आए। यह फिल्म राजनीतिज्ञों और अपराधियों के बीच की मिलीभगत, बिहार में राजनीति के बढ़ते अपराधों और इसी बीच एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर के जीवन में बढ़ती परेशानियों पर प्रकाश डालती है। शानदार अभिनय के लिए मनोज को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड से नवाजा गया। साथ ही सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित भी किया गया। फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ सयाजी शिंदे और रवीना टंडन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए।
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अक्स
किरदार : राघवन घाटगे

फिल्म : अक्स (2001)


मनोज बाजपेयी की अमिताभ बच्चन और रवीना टंडन के साथ यह अलौकिक शक्तियों से प्रेरित एक थ्रिलर फिल्म है। राकेश ओमप्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी इस फिल्म को मनोज अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक मानते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, 'इस फिल्म में मैंने ऐसी पटकथा पर काम किया जो हिंदी सिनेमा के लिए एकदम नई है। और मुझे खुशी है कि मैं इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ काम कर पाया। फिल्म में मनोज ने एक हत्यारे की भूमिका निभाई है जो दूसरे के शरीर पर हावी होकर अपराध करवाता है। शानदार अभिनय के लिए मनोज को बेस्ट विलेन के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।
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रोड - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार: बाबू

फिल्म: रोड (2002)


राम गोपाल वर्मा के निर्माण में एक बार फिर मनोज बाजपेयी एक साइको किलर बाबू के रूप में नजर आए। फिल्म में विवेक ओबेरॉय और अंतरा माली ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। रजत मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बाबू रोड से गुजरती अरविंद और लक्ष्मी की गाड़ी में लिफ्ट मांगता है। और, बाद में वह उन्हें ही मारना शुरू कर देता है। इस फिल्म में काम करने से पहले मनोज नौ महीने बिल्कुल खाली बैठे हुए थे। फिल्म 'अक्स' के बाद वह एक अच्छी कहानी का इंतजार कर रहे थे। तब जाकर उन्हें यह फिल्म मिली। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए उन्हें बेस्ट विलेन के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।
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पिंजर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार: राशिद

फिल्म: पिंजर (2003)


चंद्रप्रकाश द्विवेदी के निर्देशन में बनी इस पीरियड ड्रामा फिल्म में मनोज बाजपेयी राशिद के किरदार में नजर आए। यह फिल्म भारत पाकिस्तान बंटवारे के समय हिंदू और मुस्लिमों के बीच पनपी समस्याओं पर केंद्रित है। फिल्म में शानदार अभिनय के लिए मनोज को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के स्क्रीन अवार्ड के लिए नामित किया गया। लेकिन, मनोज बाजपेयी इस पर नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि वह इस फिल्म के मुख्य अभिनेता हैं तो उन्हें सहायक कलाकार की श्रेणी में कैसे नामांकित किया जा सकता है? इसी फिल्म के लिए उन्हें एक्टिंग का दूसरा नेशनल फिल्म अवार्ड भी मिला।

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एलओसी कारगिल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार: योगेंद्र सिंह यादव

फिल्म: एलओसी कारगिल (2003)


जेपी दत्ता के निर्देशन और निर्माण में बनी यह भारत पाकिस्तान कारगिल युद्ध पर फिल्म में मनोज बाजपेयी ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव के किरदार में नजर आए। जैसे कि यह सेना पर फिल्माई गई फिल्म है इसलिए इसमें हिंदी सिनेमा के अभिनेताओं की भी पूरी टुकड़ी शामिल की गई थी। मुख्य कलाकारों में संजय दत्त, सुनील शेट्टी, अजय देवगन, अभिषेक बच्चन, सैफ अली खान, अक्कीनेनी नागार्जुन, अक्षय खन्ना, मनोज बाजपेयी, रानी मुखर्जी, करीना कपूर, आशुतोष राणा, ईशा देओल, रवीना टंडन, महिमा चौधरी और प्रीति झंगियानी मौजूद थे। इस भीड़ में भी मनोज ने अपने बेहतरीन अभिनय से सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामांकन पाया।

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राजनीति - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार: वीरेंद्र प्रताप

फिल्म: राजनीति (2010)


प्रकाश झा के निर्माण और निर्देशन में बनी यह फिल्म हिंदुओं के महाकाव्य महाभारत से प्रेरित बताई जाती है। इस फिल्म में मनोज बाजपेयी ने वीरेंद्र प्रताप के रूप में दुर्योधन जैसा काम किया है। फिल्म के निर्देशक प्रकाश झा चाहते थे कि मनोज इस फिल्म में वह किरदार करें जिससे अर्जुन रामपाल ने निभाया है। क्योंकि वह किरदार काफी बड़ा था। लेकिन मनोज चाहते थे कि उन्हें वह किरदार चाहिए जो अच्छा हो और उनके सामने चुनौतियां पेश करे। तब उन्हें यह किरदार मिला। इस फिल्म के मुख्य पात्रों में अजय देवगन, रणबीर कपूर, नाना पाटेकर, कैटरीना कैफ, अर्जुन रामपाल, नसीरुद्दीन शाह जैसे कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।

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गैंग्स ऑफ वासेपुर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार: सरदार खान

फिल्म: गैंग्स ऑफ वासेपुर (2012)


अनुराग कश्यप के करियर को उनकी सबसे ऊंचाई तक ले जाने वाली और फिर उनको ढलान पर ले आने फिल्में रहीं गैंग्स ऑफ वासेपुर वन और टू। वासेपुर के बाद अनुराग की बतौर निर्देशक एक भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली। यूं लगा कि जैसे उन्हें किसी का श्राप लग गया है। गैंग्स ऑफ वासेपुर के लिए मनोज बाजपेयी ने अपना सिर मुंडवाया और बन गए सरदार खान। उन्हीं पर फिल्माया गया था मनोज तिवारी का गाया गाना, जिया ओ बिहार के लाला। मनोज तिवारी को ये गाना मसान के निर्देशक नीरज घेवन की सिफारिश पर मिला था। इस किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित भी किया गया।
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अलीगढ़ - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
किरदार: रामचंद्र सिरस

फिल्म: अलीगढ़ (2016)


हंसल मेहता के निर्देशन में बनी रामचंद्र सिरस की बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म में भी मनोज बाजपेयी ने शानदार काम किया। इस फिल्म में मनोज बाजपेयी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एक समलैंगिक प्रोफेसर के किरदार में नजर आए। दुनिया से अलग थलग पड़े प्रोफेसर के किरदार को मनोज ने इतने शानदार तरीके से निभाया कि उनके अभिनय की चर्चाएं दूर दूर तक हुईं। इस फिल्म के लिए मनोज को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के बेस्ट क्रिटिक फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया। साथ ही उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का एशिया पेसिफिक स्क्रीन अवार्ड भी मिला।
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