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नाना पाटेकर के इन 10 किरदारों ने लिख दिया इतिहास, हीरो, सपोर्टिंग हीरो और विलेन के लिए मिले अवार्ड्स

Tue, 31 Dec 2019 05:59 PM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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nana patekar - फोटो : file photo
हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय के अनोखे अंदाज के लिए मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर के दीवाने बच्चे, जवान और बूढ़े सब हैं। नाना ने जिस भी फिल्म को किया उसपर अपनी मुहर लगा दी। फिल्मों में बोले गए उनके संवाद उनके तरीके से बोलने के लिए आज भी लोग शर्तें लगाते हैं, और उनके जैसा हुनर पाने की कोशिश करते हैं। नाना ने अपने फिल्मी करियर में हिंदी और मराठी के अलावा भारत की कई और दूसरी भी भाषाओं में काम किया है। उन्होंने अपने अभिनय के दम पर चार फिल्मफेयर और तीन राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड जीते हैं। हिंदी सिनेमा में अब तक सिर्फ नाना ही ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने मुख्य कलाकार, सह कलाकार और नकारात्मक भूमिका में भी फिल्मफेयर अवार्ड जीता है। आज हम आपको उनकी फिल्मों के सर्वश्रेष्ठ किरदारों से रूबरू कराते हैं।   
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Parinda film poster - फोटो : twitter
किरदार : अन्ना सेठ
फिल्म : परिंदा (1990)


लोगों को मारना-काटना, उन्हें जिंदा जला देना फिल्मों में या तो हीरो करता है, या फिर फिल्म का नकारात्मक किरदार। सह-कलाकारों को पूरी फिल्म पर हावी होते हुए बहुत ही कम देखा जाता है। इस फिल्म में नाना का किरदार पूरी फिल्म पर हावी रहा। हालांकि कहानी किशन (जैकी श्रॉफ) की है लेकिन कहानी को चलाने वाला किरदार नाना पाटेकर का है। इस फिल्म में उन्होंने अन्ना सेठ का किरदार निभाया है, जोकि बहुत ही क्रूर और अत्याचारी है। लोगों को छोटी-छोटी बात पर बड़ी बेरहमी से मार देना अन्ना का पेशा है। अन्ना के क्रोध का शिकार उसके बीवी और बच्चे भी होते हैं। वह उन्हें जिंदा जला देता है। अन्ना के रूप में नाना का अभिनय बेजोड़ है। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने हाथों हाथ लिया। इसके लिए उन्हें सह-कलाकार की श्रेणी में राष्ट्रीय और फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया। 
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angaar - फोटो : social media
किरदार : माजिद खान
फिल्म : अंगार (1992)


अपने बाप जहांगीर (कादर खान) के पद चिन्हों पर पर न चलने वाले बेटे माजिद (नाना पाटेकर) के अलग ही ख्वाब हैं। जिस तरह से उसके पिता ने गरीबी से शुरुआत करके, दिन रात मेहनत की और शौहरत हासिल की। वह अपने बेटों को खूब पढ़ाता लिखाता है लेकिन एक गुंडे का बेटा अक्सर फिल्मों में तो गुंडा ही बनता है। माजिद अपने बाप की कमाई हुई शौहरत को मिट्टी में मिला देना चाहता है। वह एक गरीबों की बस्ती को उजाड़कर वहां एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तैयार करना चाहता है। बस्ती के लोग उसके खिलाफ हैं और उसके बाप से शिकायत करते हैं लेकिन माजिद का किरदार बहुत ही जिद्दी किस्म का है। एक बार जो ठान लिया वो करके ही दम लेता है। वह अपने बाप के आगे भी नहीं झुकता। माजिद को लोगों के जेहन में अपनी जगह अलग बनाने का जुनून है। उसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है। इस फिल्म के नकारात्मक किरदार में नाना ने दर्शकों के दिल में भी खौफ पैदा कर दिया था। इसके लिए नाना को बेस्ट विलेन का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।

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Tirangaa - फोटो : amar ujala
किरदार : शिवाजीराव वागले
फिल्म : तिरंगा (1993)


शिवाजीराव एक बहुत बड़ा देशभक्त पुलिस अफसर है। वह अपने देश के लिए किसी की जान लेने और अपनी जान देने से नहीं कतराता है। उसके काम करने के तरीके अलग हैं इसलिए अक्सर उसे अपनी ड्यूटी से सस्पेंड किया जाता है। लेकिन इससे शिवाजी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। शिवाजीराव का दुश्मनों से निपटने का तरीका है कि पहले लात मारो, फिर बात करो, और उसके बाद मुलाकात करो। ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह (राजकुमार) को शिवाजी का साथ खूब जंचता है। हालांकि सूर्यदेव सिंह के काम करने का अंदाज है कि पहले मुलाकात करो, फिर बात करो और अगर जरूरत पड़े तो घूंसा लात करो। दोनों का मकसद अपने देश की हिफाजत नकारात्मक शक्तियों से करना है। शिवाजीराव बहुत गुस्सैल है और अपने देश पर आई हर बुरी बात के लिए उसका पारा चढ़ जाता है। कहने को तो अभिनेता राजकुमार फिल्म में मुख्य भूमिका में हैं लेकिन मजा तभी आता है जब सह कलाकार के रूप में काम कर रहे नाना पाटेकर पर्दे पर आते हैं। उनके संवाद बोलने की शक्ति के लोग अभी तक कायल हैं। इस फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए नामित किया गया था।
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krantiveer - फोटो : file photo
किरदार : प्रताप नारायण तिलक
फिल्म : क्रांतिवीर (1994)


'आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने...!' शायद याद तो आ ही गया होगा! यह किरदार उनकी जिंदगी के सबसे बेहतरीन किरदारों में से एक है। प्रताप के किरदार में नाना ने इस फिल्म से दर्शकों और समीक्षकों को अपना दीवाना बना लिया था। इस फिल्म में एक बेफिक्र बस्ती के आम आदमी के किरदार के रूप में नाना पाटेकर अपने इलाके के सबसे बड़े गुंडे (डैनी) से भी भिड़ जाते हैं। वह सिर्फ अच्छाई का साथ देते हैं और ऐसा करने के लिए सभी लोगों को अपने सख्त रवैये से प्रेरित करते हैं। हिन्दू मुस्लिम, अमीरी गरीबी, जैसी ऊंच नीच जो समाज में फैली हुई हैं, नाना उन्हीं से ऊपर उठकर लोगों को सच का आईना दिखाना चाहते हैं। 'ये मेरा खून, और ये मुसलमान का खून! मैंने दोनों को मिक्स कर दिया। अब बता इसमें हिन्दू का कौनसा है और मुसलमान का कौनसा है?' इस तरह के नाना पाटेकर द्वारा पूरे जोश के साथ फिल्म में बोले गए कई संवाद लोगों के दिमाग में अभी तक घर किए हुए हैं। फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए नाना पाटेकर को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, फिल्मफेयर पुरस्कार और स्टार स्क्रीन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 
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Agni Sakshi - फोटो : file photo
किरदार : विश्वनाथ
फिल्म : अग्नि साक्षी (1996)


'तुम्हारा आज अगर जन्मदिन है तो कौन सा बहुत बड़ा तीर मार दिया, दुनिया के ऊपर कौन सा बहुत बड़ा एहसान कर दिया? और ये जो खुशियां मना रहे हैं इनका इसमें क्या कॉन्ट्रिब्यूशन है?' ऐसे ही कई दमदार संवादों से भरी फिल्म अग्नि साक्षी में नाना ने सह कलाकार विश्वनाथ का किरदार निभाया है। विश्वनाथ एक ऐसा किरदार है जिसे दुनिया के हर बेवजह के तौर तरीकों से परेशानी है। वह दुनिया में बिल्कुल अकेला रहना चाहता है। बस अपनी बीवी से बहुत प्यार करता है। लेकिन जब किसी चीज की अति हो जाती है तो वह दूसरों को दिक्कत देती है। लोगों को ज्यादा प्यार भी कभी-कभी घुटन लगने लगता है। इसी वजह से विश्वनाथ के ज्यादा प्यार और परवाह की वजह से उसकी बीवी बहुत डरती है। दरअसल वह उसकी परवाह कम और शक ज्यादा करता है। उसको अपनी बीवी पर भरोसा नहीं होता। विश्वनाथ बहुत ही तुनकमिजाज चरित्र है। कब किस बात का उसे बुरा लग जाए? कोई अंदाजा नहीं लगा सकता। इस फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए नाना ने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवार्ड जीता है।
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shakti - फोटो : amar ujala mumbai
किरदार : नरसिम्हा
फिल्म : शक्ति : द पावर (2002)


किरदार चाहे हीरो का हो या विलेन का ! नाना पाटेकर का कोई जवाब नहीं है। वह हर किरदार में ऐसे रम जाते हैं जैसे कि वह जिसका किरदार कर रहे हैं, हकीकत में नाना वही हैं। इस फिल्म में नाना पाटेकर का नकारात्मक किरदार है। नरसिम्हा (नाना पाटेकर) बिहार में एक गैंग का लीडर है। वह वहुत ही क्रूर और अत्याचारी है। कनाडा में रहने वाला शेखर (संजय कपूर) जब इस गैंग वॉर को खत्म करने की कोशिश करता है तो वह मारा जाता है। नरसिम्हा का साम्राज्य इतना सख्त और चौकन्ना था कि उसकी मर्जी के बिना कोई उसके यहां आ-जा भी नहीं सकता था। अपने पति की मौत के बाद जब नंदिनी (करिश्मा कपूर) वापस कनाडा जाना चाहती है तो नरसिम्हा उसे जाने भी नहीं देता। कोई इतना क्रूर भी हो सकता है कि अपने बेटे की पत्नी को बंदी बना ले। अंत में नरसिम्हा का एक और रूप देखने को मिलता है जब वह अपने पोते की शक्ल देखकर पिघल जाता है। नाना के इस किरदार को भी बहुत सराहा गया और नकारात्मक किरदार के लिए फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित भी किया गया।  

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apaharan - फोटो : amar ujala mumbai
किरदार : तबरेज आलम
फिल्म : अपहरण (2005)


इस फिल्म में नाना पाटेकर का किरदार तबरेज आलम का है जोकि एक विधायक है। ऐसा विधायक जो अपने आप को जनता का सेवक बताता है। असल में वही असली विलेन है। जनता का शोषण करना और पुलिस को अपने जूते की नोंक पर रखना है। अक्सर फिल्मों में एक विलेन को जैसे दिखाया जाता है, ठीक वैसे ही नाना का किरदार है, लेकिन इस किरदार को नाना ने निभाया है इसलिए इस किरदार की तकदीर बदल गई। उन्होंने इस किरदार को इतना प्रबल कर दिया कि फिल्म के मुख्य कलाकार अजय देवगन भी पानी कम चाय नजर आए। इस फिल्म में नकारात्मक किरदार के लिए नाना पाटेकर को बेस्ट विलेन का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। 

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apaharan - फोटो : amar ujala mumbai
किरदार : डॉन उदय शेट्टी
फिल्म : वेलकम (2007)


इस फिल्म में नाना पाटेकर ने एक डॉन का किरदार निभाया है। हालांकि डॉन का किरदार निभाना उनके लिए कोई नया नहीं था लेकिन एक डॉन के रूप में कॉमेडी करना एक नया अनुभव अवश्य रहा होगा। एक ऐसा डॉन जो अपनी बहन संजिना (कटरीना) की शादी एक निहायती शरीफ लड़के से करना चाहता है। लेकिन, कौन ऐसा शरीफ आदमी होगा जो एक डॉन के घर में अपना रिश्ता करना चाहेगा। इसके लिये डॉन उदय शेट्टी सुधरने का नाटक करने के लिए भी तैयार हैं। इस फिल्म में नाना का ऐसा रूप पहली बार दर्शकों के सामने आया। उनके एक डॉन होकर कॉमेडी करने के अंदाज ने अच्छे अच्छे कॉमिडियन को सीखने पर मजबूर कर दिया। इस फिल्म में नाना के कई चेहरे देखने को मिले। एक प्यार में पागल आशिक, एक खूंखार डॉन और एक अपनी बहन की शादी को लेकर चिंतित भाई। सभी किरदारों को नाना ने बहुत ही परिपक्वता से निभाया। 
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Raajneeti - फोटो : social media
किरदार : ब्रिज गोपाल
फिल्म : राजनीति (2010)


यह एक सितारों की फौज से सजी पोलिटिकल थ्रिलर फिल्म है। इसमें रणबीर कपूर, कटरीना कैफ, नाना पाटेकर, अर्जुन रामपाल, मनोज वाजपेयी ने मुख्य भूमिका निभाई है। जब इस फिल्म की रिलीज को लेकर घमासान चल रहा था और इल्जाम लग रहे थे कि यह फिल्म कांग्रेस पार्टी की नीतियों को मद्देनजर रखकर बनाई गई है और उसकी छवि को खराब करेगी, तब इस फिल्म के निर्देशक प्रकाश झा ने कहा था कि यह फिल्म किसी पोलिटिकल पार्टी से नहीं बल्कि महाकाव्य महाभारत से प्रेरित है। तो इस कथन को ध्यान में रखते हुए हम आपको बताते हैं कि इस फिल्म में नाना का किरदार महाभारत के कृष्ण का है। वह फिल्म में एक दूसरे की प्रतिद्वंद्वी दोनों पार्टियों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश करते हैं। नाना का ब्रिज गोपाल का किरदार बहुत ही शांत और दिमाग से मात देने वाला है। अपनी बाकी की फिल्मों के इतर नाना की प्रवृत्ति इस फिल्म में अलग है। इस फिल्म में सह कलाकार के रूप में कमाल की अदाकारी के लिए नाना को फिल्मफेयर अवार्ड और जी सिने अवार्ड के लिए नामित किया गया। 
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