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राज बब्बर ने पहली पत्नी नादिरा को बिना तलाक दिए की थी दूसरी शादी, स्मिता पाटिल के निधन के बाद फिर आए करीब

Wed, 20 Jan 2021 10:03 AM IST
स्वाति सिंह एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Raj Babbar
राज बब्बर ने बॉलीवुड के साथ राजनीति के क्षेत्र में भी खूब नाम कमाया। 80 के दशक में राज बब्बर लड़कियों के दिलों पर राज करते थे। 38 साल के करियर में अपनी फिल्मों से उन्होंने लोगों का खूब मनोरंजन किया। वहीं, राज बब्बर फिल्मों के अलावा अपने निजी रिश्तों के लिए भी काफी चर्चा में रहे। जब राज बब्बर स्ट्रगल कर रहे थे तभी उन्हें नादिरा बब्बर से प्यार हो गया था जिसके बाद दोनों ने 1975 में शादी कर ली थी।
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नादिर बब्बर - फोटो : amar ujala
राज बब्बर और नादिरा एक साथ नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के छात्र थे। नादिरा राज बब्बर की सीनियर थीं। नाटक लिखने और निर्देशित करने का काम करती थीं। राज बब्बर नए-नए आए थे। जब उन्हें नादिरा की एक नाटक में काम करने का मौका मिला तो यहीं से इन दोनों के बीच प्यार का बीज पनप गया। आगे चलकर यह प्रेम कहानी शादी में तब्दील हो गई। वर्ष 1975 में नादिरा जहीर का नाम नादिरा बब्बर हो गया।
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नादिरा बब्बर - फोटो : फाइल
शादी के बाद राज और नादिरा दिल्ली में ही रहते थे। जब इनके यहां एक बेटी जूही बब्बर ने जन्म लिया तो राज की जिम्मेदारी बढ़ गई। अब उन्हें ऐसे काम की तलाश थी जो उन्हें पैसा भी दे सके। उन्होंने अपने अभिनय करियर को आगे बढ़ाने का फैसला लिया और मुंबई चले आए। आने से पहले उन्होंने नादिरा को अपना स्कूटर बेचकर छह हजार रुपये थमाए। जिससे कि वह अपना खर्चा चला सकें। मुंबई आने के बाद अभिनय में राज का करियर चल पड़ा और उन्होंने अपने परिवार को भी मुंबई बुला लिया। यहीं आकर आर्य बब्बर का जन्म हुआ।

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Raj Babbar and Smita Patil - फोटो : file photo
राज और स्मिता की पहली मुलाकात
राज बब्बर की स्मिता पाटिल से पहली मुलाकात वर्ष 1982 में आई फिल्म 'भीगी पलकें' के सेट पर हुई। इस फिल्म में ये दोनों ही कलाकार मुख्य भूमिकाओं में रहे। पहली मुलाकात बहुत खास नहीं थी। एक इंटरव्यू में खुद राज बब्बर ने बताया है कि उस समय इस फिल्म की शूटिंग उड़ीसा के राउरकेला में चल रही थी। फिल्म की शूटिंग के दौरान ही उनकी पहली मुलाकात स्मिता से हुई। इस मुलाकात के दौरान ही इन दोनों में पहले कुछ हंसी मजाक हुआ और फिर बाद में थोड़ी सी तकरार हो गई। हालांकि, राज बब्बर को स्मिता की जुबान से निकले हुए शब्द काफी पसंद आए। वह उसी वक्त स्मिता पर फिदा हो गए थे।
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Raj Babbar
उधर, राज की इस प्रेम कहानी ने नादिरा को तोड़ कर रख दिया। वह दो बच्चों की मां थीं और नादिरा को बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि राज ऐसा भी कर सकते हैं। वर्ष 2013 में दिए एक इंटरव्यू के दौरान नादिरा ने कहा था कि जब उन्होंने राज बब्बर के मुंह से उनकी दूसरी प्रेम कहानी की बात सुनी तो वह हैरान रह गईं। हालांकि उन्होंने अपने आप को संभाला क्योंकि उनके दो बच्चे भी थे। अगर मां की ही जिंदगी बिखर जाती तो फिर बच्चों का क्या होता है? इसके बाद नादिरा अपने बच्चों में और अपनी रंगमंच की दुनिया में बेहद व्यस्त हो गई। हालांकि उन्होंने राज को अपने से कभी अलग नहीं किया।
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Raj Babbar
राज और नादिरा अलग हो गए तो राज ने स्मिता से शादी करने की ठान ली। हालांकि यह इतना आसान भी नहीं था। राज अपनी तरफ से भले ही शादी के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुके थे लेकिन स्मिता के परिजन इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। राज पहले से शादीशुदा थे और दो बच्चों के पिता भी थे। इसलिए स्मिता के घरवालों का कहना था कि वह अपनी बेटी का हाथ किसी भी शादीशुदा मर्द के हाथ में नहीं दे सकते। लेकिन, स्मिता भी राज बब्बर से उतना ही प्यार करती थीं इसलिए उन्होंने घरवालों की एक न सुनी और राज बब्बर से शादी करने का फैसला कर लिया। वैसे भी स्मिता अपने किरदारों को खुद ही चुनती थीं तो उन्होंने अपनी जिंदगी का फैसला भी खुद ही लिया।

 
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Smita And Raj babbar
दुखद रहा प्रेम कहानी का अंत
शादी के बाद स्मिता गर्भवती हुईं और 13 दिसंबर 1986 को उन्होंने अपने एक बेटे को जन्म दिया। उसका नाम प्रतीक रखा गया। प्रसव के दौरान स्मिता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जन्म के वक्त हुईं कई जटिलताओं की वजह से स्मिता काफी बीमार रहने लगी थीं और किसी से ठीक से बात भी नहीं कर पाती थीं। उस समय स्मिता मात्र 31 साल की थीं और यह उनका मां बनने का पहला मौका था। इससे पहले कि स्मिता ज्यादा कुछ समझ पातीं, अपने बच्चे के जन्म के 15 दिन बाद ही उन्होंने इस दुनिया से विदा ले ली।
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Raj Babbar
स्मिता के जाने का राज बब्बर को गहरा सदमा लगा। वह टूट चुके थे और उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करें? ऐसे में फिर से उन्हें नादिरा का ही साथ मिला। नादिरा ने न सिर्फ राज बब्बर को संभाला, बल्कि उनके बेटे प्रतीक को भी अपना बेटा समझा। हालांकि राज बब्बर की पहली पत्नी पर स्मिता के परिवारीजनों को भरोसा नहीं था इसलिए उन्होंने प्रतीक को अपने पास ही रखा। प्रतीक ने अपने नाना और नानी के साथ ही अपना बचपन बिताया।
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