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Music Duos: बॉलीवुड की इन 10 संगीतकार जोड़ियों के गाने सदाबहार, अब जिम्मेदारी सौरभ-वैभव के कांधों पर

Mon, 21 Aug 2023 08:16 AM IST
साक्षी पांडेय अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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सौरभ-वैभव,सलीम-सुलेमान, साजिद-वाजिद - फोटो : सोशल मीडिया
भारतीय सिनेमा दौर कैसा भी रहा हो, संगीत के बगैर अधूरा ही रहता है। फिल्मों की सफलता ने दशकों से संगीत का बहुत ही बड़ा योगदान रहा है। जब से बोलती फिल्मों का दौर शुरू हुआ तब से हिंदी फिल्मो से संगीत का अटूट नाता बन गया और वह नाता आज भी बना बना हुआ है। जिस दौर में नौशाद, सी रामचंद्र, अनिल बिस्वास, चित्रगुप्त जैसे धुरंधर संगीत निर्देशक फिल्मों में अकेले ही संगीत दिया करते थे, उस दौर में भी संगीतकार जोड़िया संगीत के क्षेत्र में अपना परचम लहराती रही। आइएं जनाते हैं 50 के दशक से लेकर अब तक की 10 मशहूर संगीतकार जोड़ियों के बारे में, जिन्होंने हर दशक में अपने संगीत का जादू बिखेरा है..
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सौरभ-वैभव - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
सौरभ-वैभव 
संगीतकार के तौर पर सौरभ और  वैभव की जोड़ी ने अपने करियर की शुरुआत साउथ की फिल्मों से की। हिंदी फिल्मों में इस जोड़ी को सबसे बड़ी सफलता फिल्म 'सोनू की टीटू की स्वीटी' मिली।  इस फिल्म का गीत 'स्वीटी स्लो ली स्लो ली' खूब लोकप्रिय हुआ और इस गीत के लिए उन्हें बेस्ट म्यूजिक का आईफा अवार्ड मिला था। इन दिनों सौरभ-वैभव अपनी आगामी फिल्म 'लव ऑल' के गानों को लेकर चर्चा में हैं।  इस फिल्म में सोनू निगम, पेपोन और जुबिन नौटियाल जैसे गायकों ने गीत गाए हैं। फिल्म 'लव ऑल' 25  अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी ।
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सलीम-सुलेमान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

सलीम-सुलेमान
संगीतकार सलीम-सुलेमान को सबसे पहला मौका मनोज बाजपेयी की फिल्म 'घात' मे मिला। 'घात के रंग' साउंड ट्रैक के बाद सलीम-सुलेमान को पहचान राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'भूत' से मिली। इस फिल्म के नौ गानों में से तीन गानों के संगीत की रचना सलीम-सुल्तान ने की थी। इस फिल्म के बाद सलीम - सुलेमान की जोड़ी ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 'चक दे इंडिया', 'आजा नचले', ‘फैशन', 'रब ने बना दी जोड़ी', ‘मर्दानी' और 'कुली नंबर वन' जैसी कई हिट फिल्मों के संगीत की रचना ये जोड़ी अब तक कर चुकी है।



 

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साजिद-वाजिद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

साजिद-वाजिद
संगीतकार साजिद-वाजिद की जोड़ी ने फिल्मों में संगीत निर्देशन की शुरुआत सलमान खान की फिल्म 'प्यार किया तो डरना क्या' से की। दोनों ने अपने फिल्में करियर में ज़्यादतर सलमान खान की ही फिल्मों में संगीत दिया है जिसमें 'तुमको ना भूल पाएंगे', ‘तेरे नाम', 'गर्व', 'मुझसे शादी करोगे', ‘पार्टनर', 'वॉन्टेड', ‘वीर', एक था टाईगर' और 'दबंग' जैसी कई फिल्में शामिल हैं। ‘फिल्म’ दबंग के लिए इस संगीतकार जोड़ी को फिल्मफेयर पुरस्कर से सम्मानित किया गया था । 31 मई 2020 को वाजिद अली दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई और यह जोड़ी टूट गई ।


 

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विशाल-शेखर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
विशाल-शेखर
हिंदी सिनेमा के संगीत के इतिहास में विशाल-शेखर की जोड़ी सबसे सफल संगीतकारों में से है। विशाल-शेखर ने संगीतकार के तौर पर अपने करियर की शुरुआत मंदिरा बेदी के पति राज कौशल के निर्देशन में बनी फिल्म 'प्यार में कभी कभी' से की। इस फिल्म से राजेश खन्ना की छोटी बेटी रिंकी खन्ना ने हिन्दी सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत की थी । विशाल-शेखर की जोड़ी ने लगभग 350 से अधिक फिल्मों मे संगीत दिया है, जिनमें 'ओम शांति ओम', ‘द डर्टी पिक्चर', ‘चेन्नई एक्सप्रेस', 'सुल्तान', ‘टाइगर जिंदा है' और 'पठान' जैसी हिट फिल्में शामिल हैं ।
 
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जतिन-ललित - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
जतिन-ललित
अभिनेत्री और गायिका सुलक्षणा पंडित के भाई जतिन-ललित की जोड़ी ने कई फिल्मों में हिट संगीत दिया है। जतिन-ललित के संगीत की खसियत यह थी कि उनके संगीत को सुनकर कभी आर. डी. बर्मन तो कभी लक्ष्मीकांत- प्यारेलाल के संगीत की याद आ जाती है। जतिन-ललित ने फिल्म 'यारा दिलबरा' से अपने संगीत निर्देशन के करियर की शुरुआत की।  इस फिल्म का गीत 'बिन तेरे सनम' उन दिनों खूब हिट हुआ था।  इस फिल्म के बाद जतिन - ललित की जोड़ी ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इन्होंने ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कभी हां कभी ना’, ‘राजू बन गया जेंटलमैन’, ‘चलते-चलते’, ‘हम तुम’, ‘मोहब्बतें’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘फना’, ‘कुछ कुछ होता है’ जैसी कई फिल्मों में सुपरहिट गानों की रचना की। 


 

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नदीम-श्रवण - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
नदीम-श्रवण 
संगीतकार नदीम -श्रवण की जोड़ी ने संगीतकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत साल 1977 में रिलीज भोजपुरी फिल्म 'दंगल' से की थी। इसके बाद इस जोड़ी ने करीब 20 फिल्मों में संगीत दिया। इन्हें जबर्दस्त सफलता फिल्म 'आशिकी' से मिली। इस फिल्म के बाद संगीत की दुनिया में नदीम-श्रवण की जोड़ी संगीत के आकाश पर धूमकेतू की तरह छा गई । ‘साजन’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘दीवाना’, ‘जुनून, हम हैं राही प्यार के’, ‘राजा हिंदुस्तानी’ जैसी एक के बाद एक हिट फिल्म देकर और लगातार तीन फिल्म फेयर पुरस्कार जीत कर इन्होंने अपना नाम बनाया।
 

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आनंद-मिलिंद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
आनंद-मिलिंद 
हिंदी सिनेमा में अगर 60 का दशक संगीत का स्वर्णिम युग कहा जाता है तो 80 और 90 के दशक को अब भी इसकी सुरीली धुनों के लिए लोग याद करते हैं। फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ के गानों की सफलता ने संगीतकार आनंद मिलिंद की जोड़ी को हिंदी सिनेमा के सबसे नामचीन संगीतकारों में शुमार किया। ये जोड़ी अब तक 200 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दे चुकी है। आनंद-मिलिंद  अपने जमाने के मशहूर संगीतकार चित्रगुप्त के बेटे हैं।  संगीतकार आनंद-मिलिंद की जोड़ी ने निर्देशक पंकज पराशर की फिल्म  'अब आएगा मजा' से अपने संगीत निर्देशन की शुरुआत की थी और पहली ही फिल्म में उन्होंने लता मंगेशकर के आवाज में गीत रिकॉर्ड किए थे।  

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लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
भारतीय सिनेमा में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी को संगीत की दुनिया में सबसे सफल संगीतकारों में से एक माना जाता है और उन्होंने 1963 से 1998 तक लगभग 750 हिंदी फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया, जिसमें राज कपूर, मनोज कुमार, देव आनंद , शक्ति सामंत, मनमोहन देसाई, यश चोपड़ा , के. बालचंदर, बोनी कपूर, जे. ओम प्रकाश, राज खोसला, एल.वी. प्रसाद, सुभाष घई, महेश भट्ट, के विश्वनाथ जैसे कई दिग्गज निर्माता निर्देशक की फिल्में  शामिल हैं। संगीत निर्देशक के रूप में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने बाबूभाई मिस्त्री की फिल्म ‘पारसमणि’ से अपने संगीत निर्देशन की शुरुआत की। संगीत निर्देशकों के रूप में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने केवल ए-ग्रेड गायकों से ही गीत गवाए हैं। लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी  और आशा भोंसले ने अपने करियर में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के लिए सबसे अधिक गाने गाए हैं। अपने शानदार संगीत के लिए साल 1978  से लेकर 1981 तक  लगातार चार साल तक  फिल्मफेयर अवार्ड जीते।
 

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कल्याण जी-आनंद जी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
कल्याण जी-आनंद जी 
संगीतकार कल्याणजी -आनंदजी ने जब हिंदी सिनेमा में संगीतकार के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की तो उस समय एसडी बर्मन, हेमंत कुमार , मदन मोहन, नौशाद, शंकर-जयकिशन और ओपी नैय्यर जैसे बड़े संगीत निर्देशक हिंदी फिल्म संगीत जगत पर राज कर रहे थे।  यह फिल्म संगीत का स्वर्णिम दौर था।  ऐसे दौर में संगीतकार के तौर पर फिल्मों में अपनी एक अलग पहचान बना पाना आसान नहीं था। कल्याण जी आनंद जी को सबसे पहला मौका  भारत भूषण और  निरूपा रॉय फिल्म 'सम्राट चंद्रगुप्त' में संगीतकार के तौर पर मिला। साल 1959 में रिलीज यह फिल्म हिट रही, और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कल्याणजी आनंदजी की जोड़ी ने भी एक के बाद एक कई फिल्मों में हिट संगीत दिए। छलिया, सरस्वतीचंद्र, उपकार, जंजीर, हेराफेरी, सुहाग, लावारिस, मुकद्दर का सिकंदर, डॉन अपराध, कुर्बानी जैसी हिट फिल्में देकर धूम मचा दी। कल्याणजी के पुत्र विजू शाह ने त्रिदेव, मोहरा जैसी कुछ फिल्मों में संगीत दिया।



 
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शंकर-जयकिशन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
शंकर-जयकिशन 
हिंदी फिल्म उद्योग में शंकर -जयकिशन की ऐसी सफल जोड़ी रही, जिन्होंने 1949 से 1971 तक एक साथ कई हिट फिल्मों में संगीत दिया। संगीतकार के तौर पर शंकर -जयकिशन ने अपने संगीत निर्देशन की शुरुआत राज कपूर की फिल्म 'बरसात' से की। अपनी पहली ही फिल्म से संगीतकार शंकर -जयकिशन की जोड़ी हिट हो गई।  बरसात, आवारा, आग में शंकर जयकिशन के संगीत ने संगीतप्रेमियों  दिलों पर जादू कर दिया। खय्याम, एस. डी. बर्मन, रौशन, मदन मोहन, ओ. पी. नैयर जैसे दिग्गज संगीतकारों के रहते शंकर -जयकिशन के संगीत का जादू ऐसा चला कि साल 1971 से 1973 के बीच लगातार नौ फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले।  साल 1971 में जयकिशन की मृत्यु के बाद  शंकर 1987 में अपनी मृत्यु तक अकेले संगीत निर्देशक के रूप में 'शंकर-जयकिशन' के नाम से काम करते रहे। 

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