मुंशीजी संगीत को बकवास मानते थे। एक दिन रात में देर से घर लौटने पर जब मुंशीजी ने गुस्से में नौशाद की हारमोनियम बाहर गली में फेंक दिया और घर या संगीत में चुनने को कहा तो वह गली में फेंकी गई हारमोनियम उठाकर लखनऊ से मुंबई के लिए चल दिए। पत्रकार राकेश मंजुल बताते हैं, ‘नौशाद तो खाली जेब थे। एक दोस्त से 25 रुपये उधार लिए और मुंबई का टिकट कटाया।