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Uttam Singh Exclusive: अब किसी संगीतकार की अपनी ‘टोन’ नहीं है, ऐसा संगीत बस महीने डेढ़ महीने जी सकता है...

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उत्तम सिंह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
संगीतकार और प्रसिद्ध वायलिन वादक उत्तम सिंह अपने आपको काफी भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें संगीत के क्षेत्र के धुरंधरों के साथ काम करने का मौका मिला है। उत्तम सिंह का मानना है कि एक दौर में हर संगीतकार का अपना एक टोन होता था और पांच सेकेंड गाना बजने के बाद ही पता चल जाता था कि फिल्म की धुन किसने बनाई है। लेकिन,आज की तारीख में किसी भी संगीतकार का अपना टोन नहीं है। आज किसी का भी म्यूजिक सुनिए, कहीं ना सुना सुनाया लगता है। उत्तम सिंह 25 मई को अपना जन्मदिन मानते हैं, अपने जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने ने अमर उजाला से ये एक्सक्लूसिव बातचीत की।
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सपना मुखर्जी, उत्तम सिंह, इलैयाराजा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आपकी शुरुआत तमिल फिल्मों के दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा के सहायक के तौर पर हुई। एक संगीतकार के तौर पर उनके संगीत का कितना प्रभाव आप पर रहा है?

इलैयाराजा की जो शख्सियत हैं, उनके बारे में बात करना समझ लीजिए, किसी शब्दकोश के बारे में बात करना है। किसी इंस्टीट्यूशन, किसी ऐसे कॉलेज के बारे में बात करना जहां सब कुछ है। वह शब्दकोश भी हैं, इंस्टीट्यूशन भी, कॉलेज भी और स्कूल भी हैं। एक म्यूजिक डायरेक्टर को जैसा होना चाहिए वैसे वह हैं। उनका मेरा साथ करीब 40 साल का हो गया है। 1982 में उनके साथ मिक्सिंग इंजीनियर के तौर पर मैंने काम शुरू किया। उनकी कई फिल्मों में मैंने वायलिन भी बजाई। उनकी फिल्म 'पा' का संगीत बहुत चला। फिल्म भी बहुत चली।  उसमें मैंने वायलिन बजाई है। हमारा ऐसा प्यार है कि छह-सात घंटे अगर साथ में बैठे हैं, तो हम लोग बात नही करते हैं। मुझे वह जी कह कर बुलाते थे, सिर्फ इतना ही कहते थे कि जी कल 9 बजे। इतनी सी बात में सब कुछ आ गया। यह आत्मा और संगीत की भाषा है।

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उत्तम सिंह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

नौशाद और रोशन की फिल्मों में भी आपने वायलिन बजाई। दोनों के संगीत निर्देशन में ऐसी क्या खास बात नजर आती है आपको?

आप बीते दौर के किसी भी संगीतकार का नाम लेंगे, मैंने साथ में काम किया है। दोनों में फर्क यह है कि हर आदमी का अपना स्कूल था। उनकी अपनी आवाज, उसका अपना संगीत का एक तरीका, उसका अपना टोन। म्यूजिक का अपना एक टोन होता है जो उस समय हर संगीतकार अपना अलग होता था। चाहे वह शंकर जयकिशन साहब हो, ओपी नैय्यर साहब हो या फिर नौशाद साहब, मदन मोहन साहब, रोशन जी या फिर चित्रगुप्त जी हो, सी रामचंद्र जी हों, सबका अपना अपना टोन होता था। म्यूजिशियन वही होते थे। वे हर जगह म्यूजिक बजाते थे। आज के संगीत की बात करें तो आज कोई टोन है ही नहीं। आज टोन 'की- बोर्ड' का टोन है। आज की तारीख में किसी भी संगीतकार का अपना टोन नहीं है।

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उत्तम सिंह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मदन मोहन और सी रामचंद्र के साथ भी आप लंबे समय तक जुड़े रहे...
इन लोगों के साथ इतना काम किया है लेकिन कोई खास बात याद नहीं है। सुबह सी रामचंद्र, दोपहर मदन मोहन तो शाम को नौशाद साहब या कोई और है। सबके साथ काम चलता रहता था। मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं कि उस समय के जितने भी संगीतकार रहे हैं, सबके साथ काम करने का मौका मुझे मिला है। अभी भी मैं काम कर ही रहा हूं। हाल ही में मेरी हरियाणवी फिल्म 'दादा लखमी' रिलीज हुई है, इस फिल्म के गाने लोग खूब पसंद कर रहे हैं।   

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उत्तम सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

जगदीश खन्ना की साझेदारी में आपने कई फिल्मों में संगीत अरेंज किया, साझेदारी में काम करते समय विशेष ध्यान क्या रखना होता है?

जब आप किसी के साथ काम कर रहे होते हैं, तो सबसे पहले जो बात होती है वह यह कि एक दूसरे को समझना। फिर, एक दूसरे के प्रति सफाई रखना। सफाई रखने का मतलब यह हुआ कि हाथ साफ, आंख साफ और जुबान साफ। अगर ये तीनों चीजें आपके साथ हैं, तो आप का ग्रुप कभी टूट ही नहीं सकता है। जब आप यह कहेंगे कि यह काम तो मैने किया है, तुमने क्या किया है? बस वहीं दरार पड़नी शुरू हो जाती है।

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आशा भोसले, उत्तम सिंह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
उत्तम-जगदीश की जोड़ी ने मनोज कुमार की फिल्मों 'पेंटर बाबू' आदि में संगीत दिया। मनोज कुमार के काम करने की यादें कैसी हैं?
मनोज कुमार जी एक फिल्म 'शिरडी के सांई बाबा' आई थी। वह फिल्म बहुत बड़ी हिट हुई थी। इस फिल्म के बाद लोगों को पता चला कि शिरडी भी एक जगह हैं। इस फिल्म के बाद शिरडी की मान्यता और खिल गई। उस फिल्म में दो गाने 'साईं नाथ तेरे हजारों हाथ' और 'साईं बाबा बोल' का संगीत जगदीश खन्ना ने तैयार किया थे और मैने इन गानों की अरेंजमेंट की थी। आज भी वे हिट गाने हैं। यहीं से मनोज कुमार जी के साथ काम करने का सिलसिला शुरू हुआ। मनोज जी तो संगीत के बहुत बड़े जानकार हैं। उनको पता होता है कि फिल्म में किस तरह का संगीत लेना है।
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यश चोपड़ा, उत्तम सिंह, लता मंगेशकर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, फिर यश चोपड़ा की फिल्म दिल तो पागल है’…
25 साल हो गए और आज भी उस फिल्म का संगीत चल रहा है। ऊपर वाले की कृपा है। संगीत को जो जगह मिलनी चाहिए, वह ऊपर वाला देता है। वह मुझे भी मिली। इसके लिए मैं ऊपर वाले का हमेशा आभार प्रकट करता हूं। जनता ने मेरे हर संगीत को बहुत प्यार और इज्जत दी है, यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। एक बात मैं यहां कहना चाहूंगा कि जब मेरा संगीत आया, अपना रंग लेकर आया। उसमें कोई यह नहीं कह सकता कि कहीं से कॉपी की हुई है। फिल्म के गाने तो अच्छे थे ही, फिल्म को यश चोपड़ा जी ने बहुत अच्छे तरीके से पेश भी किया। वैसे ही 'गदर- एक प्रेम कथा' को अनिल शर्मा ने पेश किया। महेश भट्ट साहब की फिल्म 'दुश्मन' का गीत  'चिट्ठी न कोई संदेश' आज तक चल रहा हैं। और, उम्मीद है कि ये गाने आगे भी चलते ही रहेंगे।

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उत्तम सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

फिल्म 'गदर- एक प्रेम कथा' और 'पिंजर' एक ही कालखंड की फिल्में थी, ऐसे विषय पर संगीत बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना होता है ?

इन दोनों फिल्मों का विषय और कालखंड एक ही है, लेकिन दोनों फिल्मों का संगीत बहुत अलग है। दोनों फिल्मों के गीत हिट हुए। पंजाब में आज भी दोनों फिल्मों का संगीत बहुत अच्छा चल रहा है। ध्यान रखना पड़ता हैं कि फिल्म का संगीत जो आपके अंदर से निकल रहा है वह आपका अपना निकले। आप किसी से प्रभावित होकर जब म्यूजिक बनाते हैं, तो एक से डेढ़ महीने तक ही वह अच्छा लगता है।

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उत्तम सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

आपने शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान, सनी देओल, गोविंदा जैसे सितारों की फिल्मों के लिए संगीत दिया है। संगीत बनाते वक्त इन सितारों की इमेज का भी ध्यान रखना पड़ता होगा?

इमेज का ख्याल तो रखना चाहिए ही क्योंकि स्क्रीन पर उस स्टार पर वह गाना कैसा लगेगा, इसका ध्यान रखना बहुत जरूरी है। हालांकि, कई बार ऐसा भी होता है कि गाना बहुत अच्छा लगता है, इसलिए हम भूल जाते हैं कि स्क्रीन पर कौन परफॉर्म कर रहा है। कई बार तो वह चीज अच्छी भी लगती है और कई बार अच्छी नहीं भी लगती है। यह एक तरह का प्रयोग है। यह सब निर्माता निर्देशक पर निर्भर करता है कि वह फिल्म को प्रस्तुत कैसे करता हैं।
 

ये पूरा इंटरव्यू आप अमर उजाला आवाज सेक्शन में सुन भी सकते हैं, ये रहा पॉडकास्ट का लिंक

https://www.amarujala.com/podcast/specials/exclusive-interview/uttam-singh-birthday-special-a-special-conversation-with-composer-uttam-singh-who-composed-music-for-gadar-2023-05-24

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