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वो 5 बातें जिन्हें 'मुल्क' में बनाया गया है मुद्दा, ये फिल्म हर मुसलमान को जरूर देखनी चाहिए

Tue, 24 Jul 2018 02:26 PM IST
पूर्णिमा आचार्य, अमर उजाला
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बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक अनुभव सिन्हा की फिल्म मुल्क 3 अगस्त 2018 को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में एक्टर ऋषि कपूर के साथ तापसी पन्नू, प्रतीक बब्बर, नीना गुप्ता, रजत कपूर, आशुतोष राणा जैसे कई बड़े कलाकार मौजूद हैं। हाल ही में दिल्ली में फिल्म क प्रमोशन करने पहुंची इसकी स्टारकास्ट ने फिल्म की कहानी से लेकर कई बड़े सामाजिक मुद्दों पर बात की। सिर्फ इतना ही नहीं फिल्म की बात करने से पहले ही फिल्म के निर्देशक अनुभव सिन्हा ने पीडीएफ फाइल मीडियो कर्मियों को दिखाई जिसमें उन विषयों के बारे में साफ तौर पर लिखा गया था जिसे लेकर इस फिल्म की कहानी है। ये वही विषय हैं जिन पर आज भी लोग विश्वास करते हैं। ये एक हिंदूस्तानी समाज है जिसे इसी सामज के लोगों ने मुसलमान और हिन्दू में अलग अलग बांट दिया है। ऐसा करने से एक परिवार को कितनी परेशानियां हो सकती हैं इस फिल्म की कहानी में सिर्फ वही दिखाया गया है। आइए आपको बताते हैं ऐसी 5 बातें जो मुल्क में बनी मुद्दा...
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आतंकवाद को मुसलमान से जोड़ना
फिल्म मुल्क में आतंकवाद को दिखाया गया है जिसमें लोगों की धारणा मुसलमान समुदाय को आतंकवाद से जोड़ना है। क्या ये ही है कि हर मुसलमान आतंकवाद के साथ जुड़ा होता है लेकिन आधी जनता यही सोचती है कि अगर कोई शख्स मुसलमान है तो वह जरूर आतंकवाद के साथ जुड़ा होगा। या फिर ये भी हो सकता है कि उस मुस्लिम परिवार का कोई न कोई सदस्य आतंकी गतिविधियों के साथ जुड़ा हो। फिल्म मुल्क में इसी बात पर प्रकाश डाला गया है। 
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ड्रेस के आधार पर लोगों के लिए अपनी धारणा बनाना
फिल्म मुल्क के ट्रेलर को देखकर साफ पता चलता है कि किसी भी मसुलमान शख्स के बारे में उसके कपड़ों के आधार पर निर्णय लिया जाता है। आपको बता दें कि एक सर्वे के अनुसार भारत के करीब 45 प्रतिशत गैर मुस्लिम समुदाय के लोग बस में अपने पास बैठे घनी दाढ़ी और टोपी पहने वाले मुसलमान व्यक्ति से घबराते है। अगर उनके पास कोई मुस्लिम महिला बुर्का पहनकर बैठ जाती है तो वह असहज महसूस करते हैं। आखिर ऐसा क्यों है...क्या कपड़ों के आधार पर किसी के लिए अपनी धारणा बनाना सही है। मुल्क में यही बात कोर्ट रूम में उठाई जाएगी।

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भारतीय मुस्लिमों को पाकिस्तानी समझना
क्या हर मुस्लिम पाकिस्तानी होता है। सर्वे के अनुसार करीब 37 प्रतिशत भारतीयों को किसी भी मुस्लिम शख्स को देखकर सबसे पहले दिमाग में पाकिस्तान का नाम आता है। उनके भारतीय दोस्त उन्हें पाकिस्तान का नाम लेकर चिढ़ाते हैं। मुसलमानों को पाकिस्तान में रहना चाहिए इस तरह की बातें बनाकर भी मजाक किया जाता है। फिल्म मुल्क में भी इन्हीं बोतों को जज के सामने रखा जाएगा कि क्या भारतीय मुसलमानों के साथ ऐसा किया जाना सही है। क्या उन्हें देश के लिए प्यार दिखाने के लिए अलग से कुछ करने की जरूरत महसूस होनी चाहिए या वो भी आम भारतीयों की तरह अपनी जिंदगी जी सकते हैं।
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भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव
आपक बता दें कि 45 प्रतिशत मुसलमान लोगों को उनके धर्म क चलते नौकरी नहीं दी जाती। कई दफ्तरों में मुसलमानों को जॉब देने पर सख्त मनाही है। सिर्फ इतना ही नहीं 38 प्रतिशत मुसलमानों को घर किराए पर नहीं दिया जाता और न ही कोई प्रॉपर्टी उन्हें बेची जाती है। यहां तक की 43 प्रतिशत गैर मुसलमानों का ये सोचना है कि अगर उनके पड़ोस में कोई मुसलमान रहता है तो वह असहज महसूस करते हैं। फिल्म मुल्क में इस बात को मुद्दा बनाया गया है जिका समाधान ढूंढा जाएगा।
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मुसलमानों को देखकर नेगेटिव विचार आना
सर्वे के मुताबिक 61 प्रतिशत गैर मुसलमानों का सोचना है कि मुस्लिम लोगों की वजह से ही देश का विकास नहीं हो पा रहा। वो लोग दूसरी परंपराओं से काफी पिछड़े हुए हैं। उनका सोचना दूसरे लोगों से अलग हैं। उनके विचार भी अलग हैं जिसके चलते कई मतभेद पैदा होते हैं। कई लोगों का तो ये भी मानना है कि भारत की संस्कृति मुसलमानों की संस्कृति से अलग है। 
हालांकि हम ये सब नहीं कहते। ये सारी बातें फिल्म मुल्क के प्रेस कॉन्फ्रेंस को शुरू करने से पहले एक पीडीएफ फाइल के जरिए बताई गई थीं। फिल्म के डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने ये सर्वे जारी करते हुए कहा था कि ये वही मुद्दे हैं जिनको फिल्म में सबके सामने रखा जाएगा....
 
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