मुकेश खन्ना
- फोटो : सोशल मीडिया
मुकेश खन्ना कहते हैं, ‘ये कहना कहां तक ठीक है कि स्वतंत्रता हमें भीख में मिली। उनका ये बयान चापलूसी से प्रेरित है, बहुत ही बचकाना है। पद्मा अवॉर्ड का साइड इफेक्ट है। अगर हमें 1947 में आजादी नहीं मिली थी तो क्या हम लोगों ने 60 साल गुलामी में जिये हैं? मैं तो अभी भी कहता हूं हम अब भी गुलामी में जी रहे हैं। अगर आप ये कहते हो कि आजादी 1947 में नहीं मिली तो आपने चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों का अपमान किया है। अंग्रेजों को डराने में क्रांतिकारियों की अहम भूमिका रही है। आपके पास ऐसा बोलने का अधिकार नहीं है। सुभाष चंद्र बोस से तो आरएसएस के नेता भी जाकर मिलते थे। मैं भी कहता हूं कि सिर्फ गांधी और नेहरू की वजह से आजादी नहीं मिली।’