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घर से भागकर शादी करने वाले मुकेश की ये हैं अनसुनी कहानियां, दिलीप कुमार का पसंदीदा गीत बोनस में

Thu, 27 Aug 2020 04:33 PM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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मुकेश - फोटो : file photo
'एक दिन बिक जाएगा, माटी के मोल। जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल.....' हिंदी सिनेमा के चंद बेहद आध्यात्मिक और प्रभावशाली गीतों को गाने वाले मुकेश ने हर तरह के गीत गाए। उनके गाए हुए गीतों का एक-एक बोल श्रोताओं के दिल में उतरता है। मुकेश का बचपन से सपना एक गायक बनने का ही था। इसके लिए उन्होंने शुरुआत से ही तैयारियां कीं। उनके पिता के सपने मुकेश को लेकर कुछ और थे लेकिन मुकेश का मन तो गायिकी में ही लगता था। कई तरह के मतभेदों को झेलते हुए मुकेश ने आखिरकार अपने सपने को पूरा किया और आज उन्हें उनके गाए गीतों के लिए दुनिया याद करती है। उनकी पुण्यतिथि के मौके पर आज हम आपको मुकेश की कुछ दिलचस्प और अनसुनी कहानियां सुनाते हैं।

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राज कपूर के साथ मुकेश - फोटो : twitter: @pic_bollywood
घर से भागकर मंदिर में की शादी
मुकेश ने मैट्रिक के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी थी और उन्हें गाने का बहुत शौक था। जब वह अपने स्कूल के कार्यक्रम में गाया करते थे तब उनके दोस्त रोशन हारमोनियम बजाते थे। मुकेश एक गायक बनना चाहते थे जबकि उनके पिता जोरावर चंद माथुर चाहते थे कि मुकेश एक सिविल इंजीनियर बनें। मुकेश का रुझान धीरे-धीरे गायिकी में बढ़ रहा था तो वहां से ध्यान हटाने के लिए पिता ने उनकी नौकरी पीडब्ल्यूडी में लगवा दी। यहां से गायिकी का रास्ता मुकेश को थोड़ा कठिन लगा। लेकिन, जब उन्होंने एक अखबार में नए कलाकारों की भर्ती का एक विज्ञापन देखा तो उन्होंने मुंबई जाने का इरादा कर लिया। मुकेश को मुंबई जाकर पांच साल बाद कामयाबी मिली। उसी दौरान उन्हें एक गुजराती व्यापारी की लड़की सरला से प्रेम हो गया। न तो सरला के पिता मुकेश से शादी करवाने के लिए तैयार थे और न ही मुकेश के पिता। इसलिए इन दोनों ने भागने का फैसला किया और मंदिर में अपने चचेरे भाई मोतीलाल की उपस्थिति में शादी कर ली।
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मुकेश और राज कपूर - फोटो : file photo
पहली नाकामी पर निर्माताओं ने छोड़ा साथ
मुकेश की बहन की शादी थी तो उसमें गाने बजाने का प्रोग्राम चल रहा था। जब लड़के वालों ने थोड़ी जिद की तो मुकेश ने एल के सहगल के कुछ गाने गुनगुना दिए। उस शादी में फिल्मी दुनिया के भी कुछ जाने-माने लोग आए हुए थे। जब उन्होंने मुकेश को गाते हुए सुना तो उन्होंने सोचा कि क्यों न मुकेश को अपनी फिल्म में बतौर हीरो साइन कर लिया जाए। उस समय अभिनेता अभिनय भी करते थे और गाते भी खुद ही थे। इस ऑफर के साथ वह लोग मुकेश के पिता से मिले। उनसे कहा कि आपका बच्चा बहुत हुनरमंद है तो उसे हम का काम देना चाहते हैं। पहले तो मुकेश के पिता को लगा की वह सब कहने की बातें हैं। लेकिन बाद में उन्होंने मुकेश को अपना मुकद्दर आजमाने के लिए उनके साथ भेज दिया। मुकेश ने अपनी पहली फिल्म 'निर्दोष' में गाया और अभिनय किया। वह फिल्म चली नहीं और जिन लोगों ने मुकेश को बुलाया था उन्होंने भी मुकेश का साथ छोड़ दिया। वह कंपनी भी बंद हो गई। बाद में मजबूरी में मुकेश को शेयर दलाली और मेवा बेचने वाले जैसे कोई छोटे-मोटे धंधे करने पड़े।

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मुकेश - फोटो : twitter: @pic_bollywood
सुरों को पहचान दिलाने की जद्दोजहद
मुकेश को पहली बार अपने चचेरे भाई मोतीलाल के लिए गाने का मौका फिल्म 'पहली नजर' में मिला। वर्ष 1943 में आई इस फिल्म में मुकेश ने एक गीत गाया। उन्होंने गीत तो गा दिया लेकिन बाद में इस गीत को रिलीज करने के लिए फिल्म के निर्देशक मजहर खान आनाकानी करने लगे। वह कहने लगे कि वह इस गीत को रिलीज नहीं कर सकते। इस बात से मुकेश को थोड़ी हैरानी हुई फिर उन्होंने कहा कि उन्होंने यह गीत एक शानदार अभिनेता के लिए गाया है। इस में दिक्कत क्या है? इस पर मजहर खान ने कहा कि मोतीलाल अक्सर चुलबुले किरदार करते हैं इसलिए उन पर यह दुख भरा गाना जंच नहीं रहा। जब फिल्म के बाकी कलाकारों ने मजहर खान को समझाया तो वह गीत को एक शर्त पर रिलीज करने के लिए तैयार हुए। उन्होंने कहा कि अगर यह गीत सिनेमाघरों में लोगों को पसंद नहीं आया तो एक हफ्ते बाद फिल्म से इस गीत को निकाल देंगे। लेकिन, मुकेश का गाया गाना लोगों को बहुत पसंद आया और वहां से मुकेश की गाड़ी चल पड़ी।
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लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी के साथ मुकेश - फोटो : twitter: @pic_bollywood
लता मंगेशकर को दिलाया मौका
सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर मुकेश को अपना भाई मानती थीं। सिर्फ मानती ही नहीं थीं, बल्कि वह हर साल उन्हें राखी भी बांधा करती थीं। लता आज भी जब अपने संघर्ष के दिनों को याद करती हैं तब उन्हें सबसे पहले याद आते हैं मुकेश। मुकेश ही वह शख्स थे जिन्होंने लता को अपना करियर बनाने में मदद की थी। वह दौर कुछ ऐसा था जब लता को लोग उनकी पतली आवाज की वजह से पसंद नहीं करते थे। और बहुत सी जगहों से उन्हें नकारा जा चुका था। जब मुकेश ने लता की आवाज पहली बार सुनी तो उन्होंने लता को नौशाद से मिलवाया। मुकेश के कहने पर नौशाद ने फिल्म 'अंदाज' के छह गाने शमशाद बेगम की जगह लता मंगेशकर को गाने को दिए। वहां से लता को भी पहचान मिलना शुरू हो गई।

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मुकेश और राज कपूर - फोटो : twitter: @FilmHistoryPic
कॉन्ट्रैक्ट से पैदा हुई मुश्किलें
मुकेश के गीतों में ऐसी शक्ति थी कि वह फिल्में हिट कराने तक की ताकत रखते थे। वर्ष 1951 में आई फिल्म 'मल्हार' का निर्माण खुद मुकेश नहीं किया था। इस फिल्म में गीतों को उन्होंने अपनी आवाज दी और उनका साथ दिया लता मंगेशकर ने। फिल्म में कलाकार कोई बड़े नहीं थे लेकिन यह फिल्म फिर भी हिट साबित हुई। दरअसल, इस फिल्म के गीत बहुत लोकप्रिय हुए जिनके दम पर यह फिल्म चल गई। लेकिन, यहां से मुकेश को अभिनेता बनने की भी चाहत फिर से जागने लगी थी। उन्होंने वर्ष 1953 में आई फिल्म 'माशूका' को बतौर अभिनेता साइन कर लिया। वह इस फिल्म के गीतों पर ही मोहित हुए थे। हालांकि, उस जल्दबाजी में वह फिल्म के निर्माता का कॉन्ट्रैक्ट पढ़ना भूल गए। दरअसल, कॉन्ट्रैक्ट में लिखा था कि इस फिल्म का हिस्सा रहते हुए अगले तीन साल तक मुकेश न तो कोई गीत गा सकेंगे और न ही किसी फिल्म में काम कर सकेंगे। इस फिल्म को बनने में भी तीन साल लगे लेकिन मुकेश ने यह कॉन्ट्रैक्ट तोड़ दिया था।
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मुकेश - फोटो : twitter: @FilmHistoryPic
'बॉबी' के गीतों के लिए ढूंढा गायक
हिंदी फिल्मों के शोमैन कहे जाने वाले राज कपूर ने जब अपनी फिल्म 'आग' से शुरुआत की तो उस फिल्म में कुछ गीत मुकेश ने भी गाए। यहीं से राज कपूर और मुकेश में गहरी मित्रता हो गई थी। राज कपूर खुद कहा करते थे कि शरीर वह हैं तो उनकी आवाज मुकेश हैं। जब राज कपूर अपने बेटे ऋषि कपूर के लिए फिल्म 'बॉबी' बना रहे थे तो राज कपूर चाहते थे कि इस फिल्म के गाने मुकेश गाएं। लेकिन, मुकेश ने उस फिल्म में गीत गाने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि चिंटू की उम्र अभी बहुत कम है। उसके लिए एक नई आवाज की जरूरत है। मुकेश ने बताया कि वह एक गायक को जानते हैं जो इस फिल्म के गीत भली-भांति गा सकता है। मुकेश ने राज कपूर को शैलेंद्र सिंह का नाम सुझाया। फिल्म के गीत शैलेंद्र सिंह ने गाए और हिट भी हुए। इसके लिए राज कपूर ने मुकेश की पारखी नजर की भी खूब तारीफ की।

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मुकेश - फोटो : bbc
दूसरे कलाकारों की भी करते थे कद्र
एक बार मुकेश विदेश दौरे पर थे। उस समय देश के जाने-माने संगीत निर्देशकों की जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी को एक गीत रिकॉर्ड करना था। उन्होंने सोचा कि मुकेश तो इतनी जल्दी नहीं आ सकते हैं इसलिए फिलहाल किसी और से ही उस गीत को रिकॉर्ड करवाया जाए। तब उन्होंने उस गीत को मनहर उधास से रिकॉर्ड करवाया। जब मुकेश विदेश दौरे से लौटे तो कल्याणजी-आनंदजी ने उन्हें उस गाने को फिर से रिकॉर्ड करने के लिए स्टूडियो में बुलाया। जब मनहर उधास का गाया हुआ गाना मुकेश ने सुना तो उन्होंने उस गीत को दोबारा गाने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि यह गीत मनहर ने बहुत ही शानदार गाया है। इसे दोबारा गाने का कोई मतलब नहीं है। यह गाना 'आपसे हमको बिछड़े' था जिसे फिल्म 'विश्वास' के लिए रिकॉर्ड किया गया।


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मुकेश - फोटो : file photo
शास्त्रीय गायन में भी खुद को किया साबित
एक कामयाब गायक होने के बावजूद मुकेश के बारे में लोगों की एक राय बन गई थी कि वह शास्त्रीय गीत नहीं गा सकते। लेकिन, जब उन्होंने 'चंदन सा बदन, चंचल चितवन' गाया तो शास्त्रीय गीतों पर उनकी बुराई करने वाले सभी लोगों का उन्होंने मुंह बंद कर दिया। जब इस गाने की रिकॉर्डिंग करने के लिए मुकेश स्टूडियो आए तो वह मर्सिडीज से आए थे। यह देख कर वहां पहले से मौजूद एक शास्त्रीय गायक ने कल्याणजी- आनंदजी से पूछा कि हम जैसे शास्त्रीय गायक बसों में धक्के खाते हुए आते हैं जबकि मुकेश जैसे पार्श्व गीतकार मर्सिडीज से कैसे चलते हैं? जब मुकेश ने वह शास्त्रीय गीत रिकॉर्ड कर लिया, उसके बाद आनंदजी ने उस शास्त्रीय गीतकार को बताया कि जब बिना ट्रेनिंग के मुकेश इतना अच्छा शास्त्रीय गीत गा सकते हैं तो वह मर्सिडीज में ही चलेंगे।


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मुकेश - फोटो : file photo
चेहरे का भ्रम तोड़ा
50 के दशक में यह माना जाने लगा था कि मुकेश की आवाज सिर्फ राज कपूर पर ही फिट बैठती है। लेकिन, मुकेश खुद इस बंदिश को तोड़ना चाहते थे। हालांकि, उन्हें मौका नहीं मिल पा रहा था। यह मौका उन्हें दिलीप कुमार की फिल्म 'मधुमती' में मिला। फिल्म के निर्देशक बिमल रॉय ने मुकेश की आवाज को दिलीप कुमार पर आजमाया। इस फिल्म के गीत गाकर मुकेश ने यह साबित कर दिया कि उनकी आवाज न तो किसी चेहरे की मोहताज है और न ही किसी एक प्रकार के गीतों की। फिल्म 'मधुमती' के गीतों को सलिल चौधरी ने लिखा था और इन गीतों को आवाज दी मुकेश ने। दिलीप कुमार आज भी मुकेश की आवाज में गाए हुए अपनी फिल्म के इन गीतों को अपने सबसे पसंदीदा गीतों में से एक मानते हैं।


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