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पर्दे के पीछे रहकर गानों में इन गिटारिस्ट ने भरी जान, आज जी रहे गुमनामी की जिंदगी

Sun, 22 Sep 2019 12:15 PM IST
अपूर्वा राय बीबीसी हिंदी
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guitarist - फोटो : social media
दम मारो दम मिट जाए गम.... कश लगाती ज़ीनत अमान पर फिल्माया गया ये हिप्पी गाना जब शुरू होता है तो सबसे पहले सुनाई देती है गिटार की धुन। ये धुन इसकी पहचान बन चुकी है। इस गाने को बनाने वाले आरडी बर्मन, गाना गाने वाली आशा भोसले और गाना लिखने वाले आनंद बख़्शी का नाम तो सब जानते हैं। लेकिन उस कलाकार का नाम कम ही लोग जानते हैं जिन्होंने अपने गिटार से गीत में चार चाँद लगाए। उस गिटारिस्ट का नाम है भूपिंदर सिंह जो करीब 20 साल तक बतौर गिटारिस्ट काम करते थे। ये वही भूपिंदर हैं जो बाद में बतौर गायक भी मशहूर हुए। आज गिटार से सजे कुछ मशहूर गानों और इन गानों में गिटार बजाने वाले कलाकारों की बात करते हैं जिनका जिक्र कम ही होता है।
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gorakh sharma - फोटो : social media

एक हसीना थी...

सुभाष घई की फिल्म 'कर्ज' का वो क्लाइमेक्स सीन याद कीजिए जब मॉन्टी (ऋषि कपूर) स्टेज पर गिटार बजाता है और उसे सुनकर सिमी गरेवाल को उनका अतीत याद आता है। जब शूटिंग चल रही थी तो ऋषि कपूर ने सुभाष घई से कहा कि सीन करते समय अगर वाकई कोई धुन बज रही हो तो उन्हें आसानी होगी। सुभाष घई ने कुछ मोहलत माँगी और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से गिटार पर सजी वो धुन लेकर आए - 'एक हसीना थी'। पर्दे पर भले ही वो गिटार ऋषि कपूर ने बजाई हो लेकिन असल में इसे ऋषि कपूर के लिए बजाया था गिटारिस्ट गोरख शर्मा ने जो प्यारेलाल के भाई भी थे। साल 2018 में उनका निधन हो गया।
 

 

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gorakh sharma - फोटो : social media
गोरख शर्मा ने सत्तर, अस्सी और 90 के दशक में कई बेहतरीन गानों के लिए गिटार बजाई। ऋषि कपूर के लिए ही फिल्म बॉबी में 'मैं शायर तो नहीं' एक खूबसूरत मिसाल है। 'ये कहाँ आ गए हम'... फिल्म सिलसिला के इस गाने में अमिताभ बच्चन की आवाज के बीच गिटार के जो खूबसूरत नोट सुनाई देते हैं वो भी गोरख शर्मा के ही हैं। आशिकी के गाने 'साँसों की जरूरत है जैसे' में उनकी बजाई गिटार गाने में जान भरती है तो जादू तेरी नजर में भी उनकी ही गिटार का जादू था।

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Bhupinder Singh - फोटो : social media

चुरा लिया है तुमने जो दिल को...

गायक बनने से बहुत पहले भूपिंदर फिल्म इंडस्ट्री के उम्दा गिटारिस्ट थे जो अक्सर आरडी बर्मन के साथ काम करते थे। दम मारो दम के अलावा भूपिंदर ने फिल्म यादों की बारात के मशहूर गाने 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' में भी गिटार बजाया था। शुरू के दिनों में उन्हें चेतन आनंद ने मौका दिया 1966 की फिल्म 'आख़िरी खत' में जो राजेश खन्ना की पहली फिल्म थी। उस फिल्म के एक गाने में भूपिंदर ने सिर्फ गिटार बजाई है, वो गाना गाया भी और वो गाना भूपिंदर पर फिल्माया भी गया और ऐसा इत्तेफाक कम ही होता है। गाना था 'रुत जवां जवां, रात मेहरबां। छेड़ो कोई दास्तां।'

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Ramesh Iyer - फोटो : social media

नीले नीले अंबर पे...

1983 में आई फिल्म कलाकार का एक सीन- रात के अंधेरे में एक आर्टिस्ट अपनी ही धुन सें सवार गिटार लिए गाना गाता है- 'नीले नीले अंबर पे'। वहाँ पास में रहने वाली एक लड़की( श्रीदेवी) उसी शिद्दत से चोरी चोरी वो गाना सुनती है। इस गाने में बजाए गए गिटार के नोट्स को कई गिटार बजाने वाले बेंचमार्क मानते हैं। पर्दे पर तो ये गिटार कुनाल गोस्वामी (मनोज कुमार के बेटे) ने बजाई थी लेकिन असल में इसे बजाया था रमेश अय्यर ने जो फिल्मों में दिग्गज गिटार आर्टिस्ट थे। ये गाना वैसे पहले तमिल में संगीतकार इलयाराजा ने बनाया था जिसमें पर्दे के पीछे चंद्रशेखर नाम के कलाकार ने गिटार बजाया था। फिल्म 'सागर' में ऋषि कपूर अपनी चाहत बयां करने के लिए जब 'चेहरा है या चाँद खिला है' गाते हैं तो दरअसल अकूस्टिक गिटार पर ऋषि कपूर के नहीं रमेश अय्यर के हाथ जादू चला रहे होते हैं।

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ramesh iyer guitar - फोटो : social media

रमेश अय्यर पर भरोसा

1980 में आई फिल्म 'शान' जब शुरू होती है तो इसके टाइटल ट्रैक में गाना आता है 'जो भी किया शान से'। इसमें बेहतरीन गिटार बजाने वाले भी हैं रमेश अय्यर जिनका सितंबर 2019 में ही निधन हुआ है। फिल्म रॉकी के गाने 'क्या यही प्यार है' का आगाज भी खूबसूरत गिटार से होता है जिसके लिए आरडी बर्मन ने रमेश अय्यर पर ही भरोसा किया। जिंदगी को गले लगाने का फलसफा समझाने वाली फिल्म 'सदमा' का गाना भी रमेश अय्यर की इलेक्ट्रिक गिटार से ही निकला है। इसी तरह सैम्युल नसरीरुद्दीन दौला नाम के एक गिटार आर्टिस्ट थे जो लुधियाना में रहते और जब बॉम्बे आते तो फिल्मों में गिटार बजाते। मशहूर गाना 'बार बार देखो' में उनका कमाल सुना जा सकता है। ये उनकी गिटार का भी असर था कि 'ये चाँद सा रोशन चेहरा' की मस्ती और ख़ुमार सुनने वाले के सर पर आज भी छा जाता है।

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ग़ुमनाम कलाकार - फोटो : social media

गुमनाम कलाकार

टोनी वाज, सुनील कौशिक, चरनजीत सिंह, भानु शर्मा ये सब बेहतरीन गिटार आर्टिस्ट थे। प्यार में दिल पे मेरे मार दे गोली, दिलबर मेरे कब तक मुझे ऐसे ही तड़पाओगे, जाने जां ढूँढती फिर रही हूँ...इन सब गानों में टोनी वाज़ का कमाल था इस फेहरिस्त में एक और गीत है- ये मेरा दिल प्यार का दीवाना जिसमें गिटार का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है। माचिस का संगीत देने के बाद भी जब विशाल भारद्वाज को गानों में एक खालीपन सा लग रहा था तो उन्होंने टोनी वाज़ की ही मदद ली थी। आरडी बर्मन के एक और पंसदीदा कलाकार थे दिलीप नायक। उनका कमाल देखने के लिए आपको तीसरी मंज़िल के गाने 'आजा आजा मैं हूँ प्यार तेरा' का सिर्फ पहला एक मिनट 12 सेकेंड सुनना होगा।

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पर्दे के पीछे - फोटो : social media

पर्दे के पीछे

आज के कलाकारों की बात करें तो चिंटू सिंह ने कई गानों में गिटार बजाया है। 'अल्लाह के बंदे हस दे' गाने में कैलाश खेर गिटार बजाते हुए अपनी बुलंद आवाज़ में गाना गाते हैं पर असल में ये गिटार बजाई चिंटू सिंह ने। फिल्म ओमकारा और ओम शांति शांति में भी उन्होंने गिटार बजाई। ये सारे कलाकार अलग अलग विधा में माहिर थे- जैसे स्पेनिश गिटार, हवाईयन गिटार, इलेक्ट्रिक गिटार। फिल्में हिट होती हैं, गाने हिट होते हैं, गाना गाने वाले हिट होते हैं और हिट होते हैं इनका म्यूजिक देने वाले। लेकिन जो कलाकार पर्दे के पीछे रहकर इन गानों में जान भरते हैं वो अक्सर ग़ुमनाम ही रह जाते हैं।
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