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अनिल कपूर की इस फिल्म को देखकर आयुष्मान खुराना ने एक्टर बनने का किया था फैसला, फिर यूं मिली सफलता

Sun, 27 Sep 2020 11:54 AM IST
anand anand बीबीसी हिंदी
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आयुष्मान खुराना - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना ने इस साल टाइम मैगजीन की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में अपनी जगह बना ली है। इस सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम है। अपने एक्टिंग करियर के शुरुआती दौर से ही वो उन फिल्मों से जुड़े हैं, जो समाज की खोखली धारणाओं को तोड़ती नजर आती हैं। विक्की डोनर, दम लगाके हइशा, बधाई हो, शुभ मंगल सावधान, आर्टिकल 15, अंधाधुन, ड्रीम गर्ल, बाला, गुलाबो सीताबो - ऐसी तमाम फिल्में हैं, जो समाज को आईना दिखाने का काम करती हैं। इन्ही फिल्मों की कामयाबी ने आज आयुष्मान खुराना को एक बड़ा कलाकार बना दिया है, लेकिन उनकी कामयाबी का सफर इतना आसान नहीं था।
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आयुष्मान खुराना - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अभिनय के अलावा आयुष्मान की गायकी भी लोगों को बेहद पसंद है। चंडीगढ़ के रहने वाले आयुष्मान को अभिनेता बनने की प्रेरणा उनकी दादी से मिली। उनकी दादी घर पर ही अभिनेता राज कपूर और दिलीप कुमार की मिमिक्री करती थीं। आयुष्मान जब 6 साल के थे, तब वो माता-पिता के साथ पहली बार थिएटर गए, वहां उन्होंने अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित की फिल्म 'तेजाब' देखी थी। तभी उन्होंने अभिनेता बनने का निश्चय कर लिया था। इसके बाद आयुष्मान ने अपने अभिनय कौशल को बढ़ाने के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी में थिएटर किया और नुक्कड़ नाटकों में भी हिस्सा भी लिया।
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आयुष्मान खुराना - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आयुष्मान ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा था, "मुझे मंच पर आकर बात करने का भय रहता था। मुझे मंच से बहुत डर लगता था। मेरे पिता जी को लगता था कि मुझमें गाने और नाचने का टैलेंट है। इसलिए वो मुझे हर जन्मदिन की पार्टी पर गाने और नाचने के लिए कहते थे, जिससे मेरे अंदर विश्वास आए और मंच का जो डर है, वो निकल जाए। उन्होंने मुझसे कई अभ्यास कराए, जिसके चलते मंच पर जाने का जो डर था, वो हट गया।"

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आयुष्मान खुराना - फोटो : instagram
एक्टिंग के शुरुआती दौर में आयुष्मान को कई ऑडिशन्स में रिजेक्ट कर दिया गया था, जिसकी वजह थी उनकी मोटी भौंहें और उनका पंजाबी लहजा। शुरुआत में जब कुछ बात नहीं बनी, तो उन्होंने आरजे के तौर पर काम करना शुरू किया। वर्ष 2004 में मशहूर शो एमटीवी रोडीज से उन्हें लाइमलाइट में आने का मौका मिला। वो इस शो के दूसरे सीजन के विजेता बने। इसके बाद उन्होंने वीडियो जॉकी और टीवी होस्ट बन कई कार्यक्रमों में काम किया। फिर साल 2012 किस्मत ने करवट बदली। सुजीत सरकार के निर्देशन में आई उनकी पहली फिल्म विक्की डोनर सुपरहिट रही।
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आयुष्मान खुराना - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
इसके बाद 2013 में आई फिल्में नौटंकी साला ,बेवकूफियां और 2014 में आई 'हवाईजादा' बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाईं। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा था, "मैं जब नया-नया आया था, तो मैं लोगों की बातों को ज्यादा सुनता था जो मुझसे ज्यादा अनुभवी थे। मुझे लगता था कि इनको ज्यादा पता है, लेकिन पता किसी को नहीं होता है। क्योंकि एक मंझा हुआ निर्देशक भी असफल फिल्म बना सकता है और एक नया निर्देशक भी सफल फिल्म बना सकता है। इस इंडस्ट्री में कोई नियम नहीं है। इस बात को मैंने समझा और तब से खुद की यानी अपने अंदर की आवाज सुननी शुरू की और तभी से मेरी फिल्में भी चलनी शुरू हुई।"
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आयुष्मान खुराना - फोटो : amar ujala
आयुष्मान खुराना के अच्छे मित्र और निर्देशक राज शांडिल्य कहते हैं, "एक अभिनेता का समझदार होना बहुत जरूरी है और वो एक समझदार अभिनेता हैं। उन्हें म्यूजिक से लेकर, गायिकी, स्क्रिप्ट, कंटेंट- हर चीज की समझ है। इतनी सारी खूबियां जिनमें होती है, वही व्यक्ति आयुष्मान खुराना जैसा बनता है। आज टाइम पत्रिका ने 100 प्रभावशाली सूची में उनका नाम शामिल किया है, मुझे लगता है कि वो लेट हो गए हैं। ये तीन साल पहले ही हो जाना चाहिए था। आरजे, वीजे, टीवी, फिल्में - उन्होंने हमेशा अपने आपको टॉप पर ही रखा है। बहुत मेहनत की है।"
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आयुष्मान खुराना - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
"मैंने अपनी जिंदगी में उनसे ज्यादा प्रतिभाशाली अभिनेता नहीं देखा। अभिनेता का मतलब ये नहीं कि आप मेकअप कर लें, ऑटोग्राफ दें, आपके फैंस हैं, आपको लोग फॉलो करते हैं। अभिनेता की जिम्मेदारी ये भी होती है कि वो मनोरंजन के साथ -साथ लोगों को एक संदेश भी दे। वो ये जिम्मेदारी समझते हैं। वो एक साधारण परिवार से आते हैं, उनका कोई गॉड फादर नहीं था। फिल्मों के माध्यम से एक आम आदमी को क्या समझाना है यह उन्हें पता है। यही आम बात उनको खास बनाती है।"
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आयुष्मान खुराना - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए राज शांडिल्य कहते हैं, "आज फिल्मों में आम आदमी का किरदार वही कर सकता है, जिसने आम आदमी की जिंदगी जी हो और मध्यम वर्गीय परिवार से आता है। इसलिए आयुष्मान अपने किरदार में ढल जाते हैं। जिस तरह से अमोल पालेकर छोटी-छोटी फिल्में किया करते थे और लोगों को संदेश भी दिया करते थे। ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों में जो देखा जाता था, परिवार की कहानी, अहम बातें और संदेश, अब वो नजर फिर से नजर आ रहा है। हम कह सकते हैं कि आज के अमोल पालेकर हैं आयुष्मान खुराना।"

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