खय्याम
- फोटो : सोशल मीडिया
बीबीसी के एक लेख के मुताबिक, खय्याम ने याद करते हुए बताया था, '1949 में मेरी उनके साथ पहली गजल रिकॉर्ड हुई जिसे वली साहब ने लिखा था- 'अकेले में वह घबराते तो होंगे, मिटाके वह मुझको पछताते तो होंगे।' रफी साहब की आवाज के क्या कहने! जिस तरह मैंने चाहा उन्होंने उसे गाया।' 'बैजू-बावरा' में गाने के बाद रफी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।