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Mohammed Rafi Death Anniversary: इस गीत को गाते हुए भर आई थीं रफी साहब की आंखें, बेटी से जुड़ी थी वजह

Sun, 31 Jul 2022 06:00 AM IST
मेघा चौधरी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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मोहम्मद रफी - फोटो : सोशल मीडिया
'शहंशाह-ए-तरन्नुम' के नाम से मशहूर रफी साहब भारतीय सिनेमा के सदाबहार गायकों में से एक हैं। 24 दिसंबर 1924 को जन्मे मोहम्मद रफी ने अपने गांव के एक फकीर की नकल करते-करते गाना गाना सीखा था और लगभग हर मिजाज के गीतों को गाया है। 31 जुलाई 1980 को उनका निधन हो गया, लेकिन आज भी अपने गानों के जरिए वह अपने चाहने वालों के बीच मौजूद हैं। आज रफी साहब की पुण्यतिथि के मौके पर हम आपको उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातें बताने जा रहे हैं। 
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मोहम्मद रफी - फोटो : सोशल मीडिया
13 साल की उम्र में गाया पहला गाना
मोहम्मद रफी ने 13 साल की उम्र में अपनी पहली परफॉर्मेंस दी थी और अपने करियर में लगभग 26 हजार गाने गाए थे। मोहम्मद रफी को पहली बार के एल सहगल ने लाहौर में एक कॉन्सर्ट के दौरान गाना गाने की अनुमति दी थी। 1948 में उन्होंने राजेंद्र कृष्णन द्वारा लिखित गीत 'सुन सुनो आए दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी' गया था। इस गाने को लोगों ने इतना पसंद किया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने घर पर ही गाना गाने के लिए बुला लिया था।
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मोहम्मद रफी
'बाबुल की दुआएं लेती जा' गाते हुए लगे थे रोने 
रफी साहब ने कई तरह के गानों को अपनी आवाज दी थी। उन्होंने कई ऐसे गाने भी गाए, जिनमें दर्द महसूस होता था। ऐसा ही एक सुपरहिट गाना था फिल्म 'नीलकमल' का 'बाबुल की दुआएं लेती जा'। ये ऐसा गाना है, जिसे गाते हुए खुद रफी साहब ही रो दिए थे। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि एक दिन पहली ही उनकी बेटी की सगाई हुई थी और दो दिन बाद शादी थी। वह गाने को गाते हुए अपनी बेटी को याद कर बार-बार भावुक हो रहे थे। यह गाना लोगों को भी बहुत पसंद आया था। वहीं, इस गाने के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला था।
 
 
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मोहम्मद रफी - फोटो : सोशल मीडिया
किशोर कुमार की भी बने आवाज
मोहम्मद रफी ने किशोर कुमार को भी अपनी आवाज दी थी। यूं तो किशोर कुमार खुद भी बहुत बढ़िया गायक थे, लेकिन फिल्मी पर्दे पर रफी साहब को ही उनकी आवाज के लिए सही माना गया था। रफी साहब ने उनके लिए 11 गाने गाए थे। वहीं, सबसे ज्यादा गाने उन्होंने संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए गाए थे। बताया जाता है कि उन्होंने उनकी फिल्मों के लिए करीब 369 गानों को आवाज दी, जिसमें 186 सोलो थे। इसके अलावा रफी साहब ने 'लैला मजनू' और 'जुगनू' फिल्म में एक्टिंग भी की थी। वहीं, जब रफी साहब का निधन हुआ तो बारिश होने के बाद भी उनकी अंतिम विदाई में करीब 10 हजार लोग शामिल हुए थे।
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