मोहम्मद रफी
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रफी को रेडियो चैनल के ऑडीशन के लिए बुलाया गया, जिसे उन्होंने बेहद सरलता से पार कर लिया। जीवनलाल ने ही रफी को गायिकी की ट्रेनिंग दी, और वह रेडियो के गानों के लिए अपनी आवाज देने लगे। वर्ष 1937 में रफी की किस्मत तब पलटी जब मशहूर गायक कुंदनलाल सहगल ने बिजली न होने के कारण मंच पर गाने से इनकार कर दिया। कार्यक्रम के आयोजकों ने उस दौरान 13 वर्षीय रफी को गाने का अवसर प्रदान किया। रफी की आवाज सुनकर दर्शकों में बैठे केएल सहगल ने तभी भांप लिया था कि यह लड़का बड़ा होकर दिग्गज कलाकार बनेगा। के.एल सहगल की बात सच भी साबित हुई। अभिनेता-निर्माता नजीर मोहम्मद ने 100 रुपये का टिकट भेजकर रफी को बॉम्बे बुलाया। रफी बॉम्बे पहुंचे, और पहली बार हिंदी फिल्म पहले आप के लिए ‘हिंदुस्तान के हम हैं, हिंदुस्तान हमारा’ गाना रिकॉर्ड किया। फिर क्या था, समय बीतता चला गया और रफी देशभर और दुनियाभर में मशहूर होते चले गए।