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नमाशी ने नहीं मनाया अपने पिता मिथुन चक्रवर्ती का जन्मदिन, बोले, 'हर परेशान शख्स को चाहिए एक श्रोता'

Tue, 16 Jun 2020 05:59 PM IST
प्रतीक्षा राणावत मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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मिथुन चक्रवर्ती, नमाशी चक्रवर्ती - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर अभिनेता बनने मुंबई पहुंचे सुशांत सिंह राजपूत की आकस्मिक मौत ने युवा सितारों को भी काफी बेचैन कर दिया है। सुप्रसिद्ध निर्देशक राज कुमार संतोषी की अगली फिल्म से अपना करियर शुरू करने जा रहे नमाशी भी इस घटना को लेकर काफी व्यथित हैं। नमाशी ने मंगलवार को अपने पिता मिथुन चक्रवर्ती के जन्मदिन पर भी इसीलिए कोई उत्सव नहीं मनाया। नमाशी के बाबा भी हाल ही में मुंबई में गुजर गए थे।
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मिथुन चक्रवर्ती, नमाशी चक्रवर्ती - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
नमाशी चक्रवर्ती रविवार से ही काफी हिले हुए हैं। वह बताते हैं, 'सुशांत सिंह के आत्महत्या करने की खबर जब मुझे मिली तो मैं तो कांपने लगा था। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं इसे कैसे प्रोसेस करूं। मेरा पूरा सिस्टम ऊपर से नीचे तक हिल गया था। काफी देर बाद मुझे समझ आया कि आखिर हुआ क्या है।' नमाशी इसके तुरंत बाद जाकर अपने परिजनों के साथ बैठ गए और उनसे बातें करने लगे। काफी देर बाद वह सामान्य हो पाए।
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मिथुन चक्रवर्ती, नमाशी चक्रवर्ती - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
16 जून को उनके पिता मिथुन चक्रवर्ती 70 साल के हुए। उनके जन्मदिन को लेकर देर रात से ही परिवार को बधाइयां मिल रही हैं। मिथुन अपने जन्मदिन पर बैंगलुरू में हैं और अपने स्टाफ के साथ वहीं एकांतवास कर रहे हैं।

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परिवार के साथ मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
नमाशी ने अपने पिता को बधाई देने और उनका आशीर्वाद लेने के अलावा और कुछ नहीं किया। वह पूरे दिन अपने बचपन से लेकर अब तक के अपने फोटो एलबम्स देखते रहे। नमाशी ने इस मौके पर ये भी कहा कि इस समय लॉकडाउन की वजह से तमाम लोग अकेले रह रहे हैं। ऐसे में सबको अपने परिजनों, मित्रों और परिचितों के साथ नियमित बातें करना बहुज जरूरी है। इन बातों के जरिए सभी को एक दूसरे से अपने जज्बात, हालात और तजुर्बात साझा करते रहना चाहिए।
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परिवार के साथ मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
नमाशी ने एक बड़ी बात और कही। वह कहते हैं, 'हमें हर तरह के लोगों के साथ जीने की आदत डालनी जरूरी है। जरूरी नहीं कि जो लोग भी हमारे आसपास हैं, सबको हम पसंद ही करते हों। बस दूसरों को अपनी बातों से दुख न पहुंचाएं और अपने अहं को हमेशा के लिए दफना दें। सबके मन की बातें सुनना जरूरी है। सही गलत का फैसला करने से ज्यादा जरूरी है दूसरों के दिल की बातें बाहर आने देना। लोगों को मुसीबत में एक शख्स चाहिए होता है जो उनका पक्ष सुन सके और एक अच्छा श्रोता बनकर ही हम ऐसे लोगों की बहुत बहुत बड़ी मदद कर सकते हैं।'

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