पिता व भाई के साथ मान्या सिंह।
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कुशीनगर में पैदा हुईं मान्या ने अपने एक पोस्ट में कहा है कि वह कठिन परिस्थितियों में पली-बढ़ीं, बिना भोजन के रातें बिता चुकी हैं और केवल कुछ रुपए बचाने के लिए मीलों पैदल चली हैं। वह उन किताबों और कपड़ों के लिए तरस गईं जिसे वह खरीदना चाहती थीं। उनका भाग्य शायद कभी उनके पक्ष में नहीं था।