अभिलाषा एफएनयू
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सिनेमा के बारे में बताने वाला कोई नहीं
‘एफएनयू मतलब फर्स्ट नेम अननोन!’ अभिलाषा बताती हैं। अपनी पसंद बदलने के बारे में वह कहती हैं, ‘मैंने अनसुनी कहानियों के जरिये समाज में बदलाव लाने के लिए पत्रकारिता का पेशा चुना था फिर मुझे लगा कि सिनेमा के जरिये इन कहानियों को और प्रभावी तरीके से कहा जा सकता है।’ अपने बचपन में ले जाते हुए अभिलाषा अपने बारे में थोड़ा और खुलासा करती हैं, ‘मैं शुरू से कुछ न कुछ बनाती रहती थी। कहानियां कहने के तरीकों में मुझे हर तरह की कलाएं पसंद रहीं फिर चाहे वह नृत्य हो, गाना हो, कहानियां सुनाना हो यहां तक कि चित्रकारी भी। किशोरावस्था तक तो फिल्मों में जाने का मुझे ख्याल तक नहीं आता था। डॉक्टरों और इंजीनियरों के परिवार से होने के चलते सिनेमा के बारे में मुझे कोई कुछ खास बताने वाला भी नहीं था लेकिन मेरे डैडी की वह सीख मुझे हमेशा याद रहती है कि जहां चाह, वहां राह!’