मिलिंद सोमन और मधु सप्रे
मिलिंद के इस फोटोशूट से नाराज होकर कई सामाजिक गुटों ने तो विरोध प्रदर्शन करना और रैलियां निकालना शुरू कर दिया था। 14 साल तक कानूनी कार्रवाई चलती रही और आखिर में 2009 को कोर्ट ने विज्ञापन के हक में फैसला सुनाया। इस विज्ञापन ने भारतीय संस्कारों, सभ्यताओं, मूल्यों और शिक्षाओं को लेकर लोगों में कई सवाल कड़े किए थे।