Chhapaak
- फोटो : Twitter
क्या आपको कभी ऐसा लगा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार किसी ऐसी फिल्म को मिला जो उसके लायक नहीं थी?
किसी को कोई फिल्म अच्छी लगी तो उसकी मंशा होती है कि उसको सराहा जाए, उसे सम्मान मिले। लेकिन पुरस्कार किसी और फिल्म को मिल जाता है। इसमें आप कोई समीकरण नहीं बना सकते। राष्ट्रीय पुरस्कार कोई वजन करने का जरिया नहीं है। वह एक सम्मान है। जिसको मिला वह बहुत अच्छा हुआ और जिसको नहीं मिला वह अगले साल फिर से कोशिश करे।
आपके करियर में एक अखबार की क्या भूमिका रही है?
मैं हमेशा से अखबार पढ़ती आई हूं और अभी भी वैसे ही पढ़ती हूं जैसे पहले पढ़ती थी। मुझे दिन की खबरें पन्ने से पढ़ना ज्यादा पसंद है। मैं अभी इतनी डिजिटल नहीं हुई हूं कि मोबाइल पर खबरें पढूं। जिनको खबरों से जुड़े रहना है, वह आज भी अखबार पढ़ते हैं।