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मीना कुमारी की बायोपिक पर कितना दमदार है ताजदार का दावा, यहां समझिए क्या कहता है कानून

Mon, 24 Aug 2020 03:50 PM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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मीना कुमारी, ताजदार अमरोही - फोटो : सोशल मीडिया
दिवंगत अभिनेत्री मीना कुमारी की बायोपिक बनने की खबर सुनकर उनके चाहने वाले तो खुश हुए हैं लेकिन मीना कुमारी के सौतेले बेटे ताजदार अमरोही इस खबर से बहुत खफा हैं। उन्होंने तो नाराजगी जाहिर करते हुए इस वेब सीरीज की निर्माता प्रभलीन कौर और किताब 'महजबीन ऐज मीना कुमारी' के लेखक अश्वनी भटनागर को कोर्ट में घसीटने तक की धमकी दे डाली है। लेकिन, अदालत ताजदार के पक्ष में कितनी सकारात्मक हो सकती है? इसका अंदाजा तो इसी तरह के कुछ पुराने मामलों की सुनवाई और उनके फैसलों से लगाया जा सकता है। 
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मीना कुमारी - फोटो : social media
मीना कुमारी के पति कमाल अमरोही की दूसरी पत्नी से हुए बेटे ताजदार अमरोही का कहना है कि निर्माताओं ने उनकी सौतेली मां के जीवन पर आधारित कोई प्रोजेक्ट बनाने से पहले उनकी इजाजत नहीं ली है। उनका मानना है कि इस प्रोजेक्ट में जरूर उनके पिता की छवि को नकारात्मक दिखाया जाएगा। उन्होंने साफ तौर पर बोल दिया है कि उनके पिता ने कभी भी अपनी पत्नी को मारा-पीटा और सताया नहीं था और न ही उनके पिता कभी शराब का सेवन करते थे। उन्हें अंदाजा है कि उनके पिता की यही छवि फिल्म और वेब सीरीज में दिखाई जानी है।
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मीना कुमारी, कमल अमरोही - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, यह पहला मौका नहीं है जब किसी जानी मानी हस्ती को लेकर कोई सिनेमाई प्रोजेक्ट बनाने की घोषणा हुई हो और उस पर उनके परिजनों ने आपत्ति उठाई हो। पिछले साल तमिलनाडु की पूर्व दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता के जीवन पर आधारित दो प्रोजेक्ट्स की बात सामने जिसमें एक वेब सीरीज 'क्वीन' रही। इसमें जयललिता का किरदार अभिनेत्री राम्या कृष्णन ने निभाया है। वहीं, दूसरी एक फिल्म 'थलाइवी' है जिसमें अभिनेत्री कंगना रनौत मुख्य भूमिका में नजर आने वाली हैं। इन दोनों ही प्रोजेक्ट्स को लेकर जयललिता की भतीजी दीपा जयकुमार ने आपत्ति जताई थी।

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ताजदार अमरोही - फोटो : सोशल मीडिया
दीपा का भी कुछ ऐसा ही कहना था जैसा ताजदार कह रहे हैं। प्रोजेक्ट की घोषणा करने से पहले उनकी अनुमति नहीं ली गई। लेकिन इस पर मद्रास हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि किसी भी पब्लिक फिगर की कहानी पर्दे पर दिखाने के लिए उनके घरवालों से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। बशर्ते, उस कहानी में अपनी तरफ से कोई ऐसी चीज न जोड़ी गई हो जो मीडिया या किसी और जरिए से सार्वजनिक रूप से लोगों के सामने न आई हो। कहानी में कोई चीज ऐसी भी नहीं होनी चाहिए जो उस हस्ती के परिजनों को ठेस पहुंचाए।
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मीना कुमारी - फोटो : सोशल मीडिया
लेकिन, ऐसे ही एक दूसरे केस में कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी जिंदा व्यक्ति की बायोपिक बनाई जाती है तो ध्यान रहे कि उसमें उस व्यक्ति की सहमति जरूर शामिल हो। अगर कोई मौजूद हस्ती नहीं चाहती कि उस पर कोई बायोपिक बने तो यह कर गैरकानूनी है। अब मीना कुमारी तो मौजूद नहीं हैं तो ताजदार की अपील पर कोर्ट कितनी गंभीरता दिखाएगा? यह इसी से मालूम होता है।

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