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मन्ना डे नहीं था गायक का असली नाम, आज भी दिल को छू जाते हैं पद्मश्री सम्मानित सिंगर के ये गीत

Fri, 01 May 2020 03:15 PM IST
Avinash Pal एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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manna dey - फोटो : file photo
सिनेमा संगीत के बिना अधूरा है और भारतीय सिनेमा में संगीत को मन्ना डे के बिना पूरा नहीं माना जा सकता है। मन्ना डे को भारतीय संगीत की जानी मानी आवाजों में से एक माना जाता था। पचास और साठ के दशक में अगर हिंदी फिल्मों में राग पर आधारित कोई गाना होता, तो उसके लिए संगीतकारों की पहली पसंद मन्ना डे ही होते थे। जन्मदिन के खास मौके पर हम आपको बताते हैं मन्ना डे के बारे में कुछ अहम बातें।
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manna dey
मन्ना डे का जन्म एक मई 1919 को उत्तरी कोलकाता के एक रुढ़िवादी संयुक्त बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम पूर्ण चंद्र डे और मां का नाम महामाया डे था। वैसे ये बात भी काफी कम लोग जानते होंगे कि मन्ना डे का असली नाम प्रबोध चंद्र डे है। उनके मामा संगीताचार्य कृष्ण चंद्र डे ने मन्ना डे के मन में संगीत के प्रति दिलचस्पी पैदा की।
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बतौर पार्श्व गायक मन्ना ने अपने करियर की शुरुआत 1943 में आई फिल्म 'तमन्ना' से की थी।  इसमें संगीत कृष्ण चंद्र डे ने दिया था। सुरैया के साथ गाया गया मन्ना डे का गीत जबरदस्त हिट रहा था। इसके बाद मन्ना डे को 1950 में आई फिल्म 'मशाल' में पहली बार एकल गीत 'ऊपर गगन विशाल' गाने का मौका मिला। इस गाने का म्यूजिक सचिन देव वर्मन ने दिया था।

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मन्ना डे ने हिन्दी के अलावा बंगाली, मराठी, गुजराती, मलयालम, कन्नड और असमिया भाषा में भी गीत गाए थे। याद दिला दें कि साल 1952 में उन्होंने ने 'अमर भूपाली' नाम से मराठी और बांग्ला में आई फिल्म में गाना गाया और खुद को एक बंगाली गायक के रूप में स्थापित किया। मन्ना डे ने सभी संगीतकारों के लिए कभी शास्त्रीय, कभी रूमानी, कभी हल्के फुल्के, कभी भजन तो कभी पाश्चात्य धुनों वाले गाने भी गाए, ऐसे में उन्हें हरफनमौला गायक भी कहा जाता था।
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एक तरफ जहां मन्ना डे ने 'पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई', 'लागा चुनरी में दाग़' और 'आयो कहां से घनश्याम' जैसे गानों से दिल में दस्तक दी तो वहीं  'दिल का हाल सुने दिल वाला', 'ना मांगू सोना चांदी' और 'एक चतुर नार' जैसे गीतों पर झूमने को भी मजबूर किया। मन्ना डे ने लोकगीत से लेकर पॉप तक हर तरह के गीत गाए और देश विदेश में संगीत के चाहने वालों को अपना मुरीद बनाया। इसके साथ ही क्या आप जानते हैं कि हरिवंश राय बच्चन की मशहूर कृति 'मधुशाला' को भी मन्ना ने आवाज दी थी।
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मन्ना डे ने वैसे तो कई गानों को अपनी आवाज दी लेकिन कुछ गाने उनके कभी भी भुलाए नहीं जा सकते। ऐसे में एक नजर उनके दस बेहतरीन गानों पर-
जिंदगी कैसी है पहेली (आनंद)
एक चतुर नार करके श्रृंगार (पड़ोसन)
लागा चुनरी में दाग (दिल ही तो है)
कसमें वादे प्यार वफा (उपकार)
तू प्यार का सागर है (सीमा)
तुझे सूरज कहूं या चंदा (एक फूल दो माली)
यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी (जंजीर)
ये रात भीगी भीगी (चोरी चोरी)
ऐ मेरी जोहरा जबीं (वक्त)
प्यार हुआ इक़रार हुआ है (श्री 420)
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मन्ना डे
मन्ना डे को संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें 1971 में पद्मश्री और 2005 में पद्म भूषण से नवाजा गया था। वहीं साल 2007 में उन्हें प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के अवॉर्ड प्रदान किया गया। गौरतलब है कि 24 अक्तूबर 2013 को मन्ना डे ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। 
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