मनपसंद
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अशोक कुमार से लेकर किम तक के इस साल में टीना मुनीम जिस फिल्म मन पसंद में ट्रेन में दातुन बेचती नजर आईं, वह फिल्म मनपसंद ही हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म है। बासु चटर्जी को अमोल पालेकर के साथ तीन हिट फिल्में बनाने के साथ ही ये समझ आ गया था कि फिल्म में जब तक मौजूदा दौर का बड़ा सितारा न हो, फिल्म बेचने में बहुत दिक्कत आती है। जीतेंद्र, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, जया बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती, संजीव कुमार से होते हुए वह वापस अपने चितचोर यानी अमोल पालेकर के पास बातों बातों में पहुंचे तो लेकिन इतने लंबे समय तक फिल्म बनाने के बावजूद बासु चटर्जी की गिनती ऐसे फिल्मकार के रूप में होती रही जो या तो किसी मशहूर कहानी पर फिल्म बनाते हैं या फिर किसी चर्चित फिल्म की रीमेक। और, यही पहचान उनकी फिल्म मनपसंद में भी कायम रही।
जॉर्ज बर्नार्ड शॉ का 1912 का लिखा एक नाटक है पिगमैलिऑन। 1956 में आई फिल्म माई फेयर लेडी उसी पर आधारित है। बाद में मराठी के मशहूर लेखक पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे ने शॉ के नाटक पर मराठी नाटक लिखा ती फुलराणी। बासु चटर्जी ने इसी नाटक पर बनाई फिल्म मन पसंद। पुराने फिल्म समीक्षक इंदर मोहन पन्नू बताते हैं कि एक जैसी इस कहानी पर उन दिनों हिंदी में मनपसंद और हम तेरे आशिक हैं दो फिल्में बनीं। इसके अलावा एक गुजराती नाटक संतू रंगीली भी इसी कहानी पर बना। मशहूर गीतकार अमित खन्ना की बतौर प्रोड्यूसर मन पसंद पहली फिल्म है। फिल्म का उनका लिखा एक गाना उन दिनों मशहूर हुआ, मैं अकेला अपनी धुन में मगन जिंदगी का मजा लिए जा रहा था...!