नौशाद
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नौशाद ने लिया जबरदस्त टेस्ट
जब सुल्तानपुरी गीत लिखने को राजी नहीं हुए तो जिगर मुरादाबादी ने उन्हें समझाया और उनका मन बदला। मुरादाबादी ने कहा कि तुम फिल्मी गाने लिखो। जैसे गाने तुम लिखना चाहते हो। इससे कुछ पैसे मिलेंगे और तुम अपने परिवार की देखरेख अच्छी तरह कर पाओगे। साथ-साथ शायरी भी चलती रहेंगी। सुल्तानपुरी को यह बात जम गई। और वह राजी हो गए। इसके बाद फिल्म प्रोड्यूसर ए आर करदार मजरूह सुल्तानपुरी को संगीतकार नौशाद के पास ले गए। वहां नौशाद ने सुल्तानपुरी का जबरदस्त टेस्ट लिया। उन्होंने एक धुन सामने रखी और उस पर लिखने को कहा। मजरूह सुल्तानपुरी भी कम नहीं पड़े। उन्होंने लिखा, 'जब उसने गेसू बिखराए, बादल आया झूमकर....'। यह लाइन नौशाद साहब को पसंद आ गई। उन्होंने तुरंत सुल्तानपुरी को फिल्म 'शाहजहां' के लिए साइन कर लिया। यह बात है वर्ष 1946 की। फिल्म का गाना काफी हिट हुआ। इसके बाद सुल्तानपुरी का फिल्मी गीत लिखने का सिलसिला चल पड़ा और एक ऐसे गीतकार बने जिन्होंने इतिहास रच दिया। 'ओ मेरे दिल के चैन...', 'यूं तो हमने लाख हंसी देखे हैं, तुम सा नहीं देखा...', 'देखो जी सनम हम आ गए..,' 'मोहब्बत से तेरी खफा हो गए हैं...', 'चला जाता हूं किसी की धुन में तड़पते दिल के तराने लिए...','सिर पे टोपी लाल...', 'करके आंखों में...',;छोड़ दो आंचल जमाना क्या कहेगा...'! उनके लिखे फिल्मी गानों की फेहरिस्त बहुत लंबी है।