महेश भट्ट ने दी प्रतिक्रिया
फिल्म निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट का कहना है कि यह फैसला अपेक्षित था, लेकिन अब इसके असर को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा, "यह तो होना ही था, लेकिन सवाल यह है कि इसका असर कितना गहरा होगा? क्या यह स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी लागू होगा? अमेरिका में तेलुगु फिल्मों की काफी मांग है। इस टैरिफ से हर कोई प्रभावित होगा। पहले जहां डिस्ट्रीब्यूटर्स 100 रुपये खर्च करते थे, अब उन्हें 200 रुपये देने पड़ेंगे। जाहिर है, इससे फिल्मों का प्रवाह कम होगा।"
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विक्रम भट्ट ने टैरिफ पर उठाए सवाल
वहीं, फिल्म निर्माता और निर्देशक विक्रम भट्ट का मानना है कि भारतीय सिनेमा पर इस टैरिफ का असर सीमित होगा। उन्होंने कहा, "हमारी अधिकांश फिल्में अमेरिका और ब्रिटेन जैसे बाजारों में नहीं जातीं। केवल बड़ी बजट की फिल्में ही वहां पहुंचती हैं। मध्यम और छोटे बजट की फिल्मों का विदेशी बाजार पहले से ही सीमित है। अब इस टैरिफ के बाद शायद केवल मेगा-बजट फिल्में ही वहां प्रदर्शित हो पाएंगी, क्योंकि वहां प्रदर्शन की लागत बहुत ज्यादा है। वैसे भी हमारी फिल्में अमेरिका में शूट नहीं होतीं तो हमारी फिल्मों पर टैरिफ लगाने का क्या मतलब?"
विवेक अग्निहोत्री ने की आलोचना
इस मुद्दे पर फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने भी अपनी राय रखी है। उन्होंने सोमवार (5 मई ) को उन्होंने एक्स पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह भारत की फिल्म इंडस्ट्री के लिए बेहद खतरनाक है। विवेक ने कहा, "ट्रंप द्वारा फिल्मों पर 100% टैरिफ लगाना एक विनाशकारी कदम है। अगर यह बेतुकापन जारी रहा तो भारत का संघर्षरत फिल्म उद्योग पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगा और इसे बचाने वाला कोई नहीं होगा। विवेके ने आगे कहा, भारतीय फिल्म लीडर्स को जागना और एकजुट होना चाहिए और पैपराजी और आत्म-प्रशंसा के पीछे भागने के बजाय इस खतरे से लड़ना चाहिए।