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South Cinema: खतरे में तेलुगू इंडस्ट्री! अगस्त से रोकी गई शूटिंग, प्रभावित होंगी प्रभास-महेश बाबू की फिल्में

Wed, 27 Jul 2022 09:56 AM IST
वर्तिका तोलानी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

एक्टिव तेलुगु प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने घोषणा की है कि तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री के सभी निर्माता बदले हुए रेवेन्यू मॉडल की वजह से अगस्त से शूटिंग रोक देंगे।
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प्रभास, महेश बाबू - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रोड्यूसर्स गिल्ड के सदस्यों ने मंगलवार को पत्र जारी करते हुए इस बात का एलान किया है कि एक अगस्त से शुरू होने वाली फिल्मों की शूटिंग अब नहीं होगी। सभी फिल्मों की शूटिंग तब तक शुरू नहीं होगी जब तक प्रोड्यूसर्स अपनी समस्याओं के समाधान खोज नहीं लेते हैं। बता दें कि आरआरआर, केजीएफ 2 और कुछ अन्य फिल्मों को छोड़कर पिछले कुछ हफ्तों में रिलीज हुई फिल्मों के खराब प्रदर्शन की वजह से 'एक्टिव तेलुगू प्रोड्यूसर्स गिल्ड (ATPG)' काफी चिंतित हैं। इसलिए उन्होंने तेलुगू इंडस्ट्री को पुनर्गठित करने, फिल्म बजट, ओटीटी रिलीज और थिएट्रिकल रिलीज सहित महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है। 

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जारी किए गए लेटरहेड में बदलते रेवेन्यू और कॉस्ट पर भी प्रकाश डाला गया है। नोट में कहा गया है कि इन बदलती परिस्थितियों को देखते हुए, निर्माताओं ने तब तक फिल्म की शूटिंग रोकने का फैसला किया है जब तक कोई समाधान नहीं मिल जाता। तेलुगू प्रोड्यूसर्स गिल्ड का कहना है, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने इकोसिस्टम को बेहतर बनाएं और यह सुनिश्चित करें कि हम अपनी फिल्मों को स्वस्थ वातावरण में रिलीज करें। इस संबंध में, गिल्ड के सभी निर्माता सदस्यों ने स्वेच्छा से 1 अगस्त 2022 से शूटिंग पर रोक लगाने का फैसला किया है"।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कौन से प्रोडक्शन हाउस और फिल्में इस फैसले का पालन करेंगी, लेकिन अटकलें लगाई जा रही हैं कि महेश बाबू, जूनियर एनटीआर और प्रभास जैसे अभिनेताओं की आने वाली फिल्मों की शूटिंग में इस वजह से देरी हो सकती है।
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महामारी के बाद तेलुगू फिल्म उद्योग ने कई हिट फिल्में, जैसे- आरआरआर और पुष्पा: द राइज दी हैं, लेकिन निर्माता बदलते राजस्व मॉडल से सावधान हैं। एक फिल्म निर्माता ने पीटीआई से बातचीत के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि "आरआरआर, पुष्पा जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों को छोड़कर, नाटकीय राजस्व 20 फीसदी के निचले स्तर तक जा गिरा है। यही वजह है कि हर कोई उद्योग की स्थिरता को लेकर चिंतित है। ”
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