हुमा कुरैशी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
लोगों की फालतू सलाह पर अमल नहीं किया
हुमा कुरैशी कहती है, 'कोविड के दौरान मेरे पास यह सोचने का पूरा मौका था कि कोई फिल्म या शो क्यों करते है, किस मानसिकता से करते है? जब मैने सोचा तो मुझे लगा कि स्टोरी तो बहुत ही इंटरेस्टिंग है करनी चाहिए। बहुत लोगो से सलाह दी कि तीन बच्चे हैं, तो उसको एक बच्चा कर देना चाहिए। लेकिन मैंने किसी की नहीं सुनी, मुझे लगा कि जैसी कहानी है, वैसे ही मुझे काम करना है। मुझे लगा कि अगर मैं अपने इनसिक्योरिटी की वजह से एक भी शब्द बदलती हूं, तो कहानी बिगड़ जाएगी। जब मैंने काम किया तो लोगो से बहुत तारीफ मिली, इसका पूरा क्रेडिट क्रिएटिव टीम को जाता है। मैने अपनी किसी भी पुरानी चीज को आड़े नहीं आने दी। चाहे कपड़े पहनने का स्टाइल हो, बोलने का अंदाज हो, खाना बनाना हो या फिर भैंस को चारा खिलाना, मैंने सब वैसा ही किया, जैसा स्क्रिप्ट में लिखा था।'