कभी धक धक गर्ल कही जाने वाली माधुरी दीक्षित गुजरे दशक में फिल्मों में कम दिखीं पर उनका क्रेज बरकरार है। 35 बरस के करिअर में वह पहली बार मराठी फिल्म 'बकेट लिस्ट' कर रही हैं जिसमें गृहिणी बनी हैं। इसके बाद माधुरी बॉलीवुड फिल्म 'टोटल धमाल' और 'कलंक' में दिखेंगी। निजी जिंदगी के साथ परदे पर गृहिणी की भूमिका और फिल्मों को लेकर माधुरी दीक्षित ने रवि बुले से विशेष बात की।
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Bucket List
आपकी फिल्म में 'बकेट लिस्ट' का मतलब है वे अधूरी इच्छाएं जिन्हें पूरा करने की कामना शेष हो। स्टारडम की जिस ऊंचाई पर आप हैं क्या वहां कोई बकेट लिस्ट बाकी होती है?
हां होती है ना! जिंदगी में इच्छाएं,आकांक्षाएं कभी पूरी नहीं होतीं। यह जरूर है कि स्टारडम छूने के बाद कोई बहुत बड़ी इच्छा कि चांद पर जाना है जैसी नहीं बची। लेकिन छोटी-छोटी इच्छाएं होती हैं। हर इंसान में इच्छाएं बाकी होनी चाहिए क्योंकि इनके होने पर एक उत्सुकता बनी रहती है। इन्हें पूरा करने लिए आप संघर्ष करते हैं। जब इच्छा पूरी होती तो उससे जिंदगी में खुशी मिलती है।
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madhuri dixit
आपकी कौन सी इच्छा अभी बाकी है?
मेरी एक बहुत बड़ी इच्छा थी मराठी फिल्म करने की वो 'बकेट लिस्ट' के साथ पूरी हो गई। मुझे फिल्म प्रोड्यूसर बनना था तो मैं मराठी फिल्म बना रही हूं जिसका नाम है '15 अगस्त'। वैसे मेरी लिस्ट बढ़ती जाती है। बदलती जाती है। इससे जिंदगी में स्पार्क बना रहता है।
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anil madhuri
आपने निजी जिंदगी में भी गृहिणी के रूप में एक लंबा अर्सा गुजारा। गृहिणी की भूमिका में वे कौन सी बातें हैं जो आम तौर पर घर के अन्य लोग या पुरुष नहीं समझ पाते?
सबसे पहले तो यही कि गृहिणी की भी इच्छाएं हैं। उसका भी व्यक्तित्व है, निजता है। गृहिणी को लोग हल्के ढंग से लेने लगते हैं। उन्हें लगता है कि इसका तो कुछ नहीं है सब हमारे लिए तो करती है। इसकी कोई इच्छा नहीं। नखरे तो सिर्फ हमारे हैं वह तो बेचारी गाय है। जब वह अपनी जिद दिखाती है और कुछ करने की ठानती है तभी उसके लिए चीजें बदलती हैं। उसका सम्मान बढ़ता है।
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माधुरी दीक्षित
लंबे समय तक आप अमेरिका में रहीं और भारत लौटने के बाद फिल्मों में कम टीवी पर ज्यादा दिखीं। क्या वजह रही?
फिल्में तो मैंने की हैं 'आ जा नचले', 2007 में 'डेढ़ इश्किया' और 'गुलाब गैंग'। टीवी पर क्या होता है कि जब किसी शो पर आ जाते हैं तो उसके सीजन बनने लगते हैं इससे वहां आप निरंतर साल दर साल दिखने लगते हैं। ऐसा नहीं था कि मुझे टीवी ही करना था और फिल्में नहीं करनी थी। जैसा मुझे सुविधाजनक लगता गया मैं करती गईं।
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madhuri dixit
कमबैक शब्द को एक्टर पसंद नहीं करते?
आजकल इसे बड़े हल्के ढंग से इस्तेमाल किया जाता है। एक साल के ब्रेक के बाद भी कोई एक्टर आए तो कहते हैं कि कमबैक हो रहा है।
अपने कमबैक को कैसे देखती हैं 'आ जा नचले' के बाद फिर लंबा ब्रेक आया था
तब मेरे बच्चे हुए। एक के बाद एक दो बच्चे। वह मेरा होम प्रोडक्शन था। मैं चाहती थी कि सिर्फ उन पर पूरा ध्यान दूं।
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madhuri dixit
इधर आपने दो-तीन फिल्में साइन की हैं तो क्या बच्चों के प्रति कुछ निश्चिंत हैं वे बड़े हो चुके हैं?
दोनों बेटे हैं और लड़के बहुत जल्दी आजाद होना चाहते हैं। वे जल्दी-जल्दी अपनी जिंदगियों में व्यस्त होना चाहते हैं। लेकिन फिर भी उन्हें मार्गदर्शन की जरूरत होती है। पेरेंट्स को उनके साथ होना चाहिए। इसलिए मैं और मेरे पति संतुलन बना कर चलते हैं कि जब मैं ज्यादा व्यस्त हो जाती हूं तो वह काम करना थोड़ा कम कर देते हैं। जब वो ज्यादा बिजी होते हैं तो मैं थोड़ा ज्यादा घर और बच्चों को देखती हूं। बच्चों को सपोर्ट तो चाहिए।
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Birthday Special: Madhuri Dixit is fan of fans
- फोटो : facebook
आपको फिल्म इंडस्ट्री में 35 साल हो रहे हैं। यहां काम का ढंग और मीडिया काफी बदला है। फिल्म पत्रकारिता में क्या बदलाव देखती हैं?
फिल्म पत्रकारिता में कोई बड़ा बदलाव नहीं है। अफवाहें आनी हैं आती रहती हैं। जिन्हें अच्छा लिखना हैं अच्छा लिखते हैं। जिन्हें बुरा लिखना है बुरा लिखते हैं। एक बात जरूर है कि अब फिल्म मैग्जीन पहले ही तरह पॉपुलर नहीं हैं।
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madhuri dixit
सिनेमा के लोग अपने जीवन पर किताबें लिखने लगे हैं। आप लिखेंगी?
अभी इसमें समय है। इससे पहले मुझे बहुत कुछ करना है।
क्या माधुरी दीक्षित के जीवन पर फिल्म बन सकती है?
फिलहाल इसमें मुझे कोई इंट्रेस्ट नहीं है। बायोपिक के लिए पहले बायोग्राफी लिखनी पड़ेगी। बायोग्राफी नहीं होगी तो बायोपिक कैसे बनेगी।
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माधुरी दीक्षित और संजय दत्त
बायोपिक फिल्में लगातार बन रही हैं। इन्हें कैसे देखती हैं?
मैंने सिर्फ एक ही बायोपिक देखी 'भाग मिल्खा भाग'। ओलंपिक में नंगे पैर दौड़ने वाले एथलीट मिल्खा सिंह की यह कहानी मुझे अच्छी लगी थी। इसमें कई बातें प्रेरणा लेने जैसी थीं।
फिल्मी लोगों की कहानियों में प्रेरणा कम गॉसिप ज्यादा होते है। संजय दत्त की बायोपिक बनी। खबर थी आपने डारेक्टर को फोन किया था?
देखिए न्यूज बहुत हैं। बहुत कहानियां बनती हैं। अगर हर कहानी पर हम विश्वास करने लग जाएं तो जीना मुश्किल हो जाएगा।
मराठी से पहले माधुरी ने किसी गैर बॉलीवुड फिल्म में काम नहीं किया। उन्होंने निर्देशक गांधी कृष्ण की एक तमिल फिल्म की शूटिंग 1997 में शुरू की थी जो विवादों और आर्थिक कारणों से 80 फीसदी शूट होन के बाद बंद हो गई। माधुरी को कभी हॉलीवुड से फिल्म का प्रस्ताव नहीं मिला लेकिन प्रियंका चोपड़ा अब उनकी जिंदगी पर आधारित एक शो अमेरिकी टीवी एबीसी के लिए बनाने की तैयारी कर रही हैं। यह शादी के बाद माधुरी के अमेरिका में गुजरे दिनों पर होगा।