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जानें, आज के संगीत पर क्या थी खय्याम की राय?

Mon, 18 Nov 2019 04:11 PM IST
Avinash Pal अविनाश सिंह पाल, अमर उजाला
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मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी - फोटो : अमर उजाला
'उमराव जान', 'बाजार', 'कभी-कभी', 'नूरी' और 'त्रिशूल' सहित कई हिट फिल्मों के गीतों की धुन बनाने वाले मशहूर संगीतकार मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी ने 19 अगस्त 2019 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। खय्याम साहब भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनका संगीत और उनकी यादें हमेशा हम सभी के बीच रहेंगी। आज की इस स्पेशल रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आज के संगीत के बारे में खय्याम क्या राय रखते थे।
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खय्याम - फोटो : सोशल मीडिया
2016 में एक इंटरव्यू के दौरान खय्याम ने पुराने संगीत और आज के संगीत के बारे में अपनी राय रखते हुए कहा था कि, 'मुझे लगता है कि अब का संगीत पूरी तरह से हिंदुस्तानी नहीं है। उसमें सब मिला सा लगता है। थोड़ा पंजाबी, थोड़ा सूफी, थोड़ा अग्रेंजी से मिलकर अब के गाने बनते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि सब बुरा है, कुछ पंजाबी गाने सुनो तो काफी अच्छा लगता है।'
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khayyam - फोटो : social media
खय्याम ने आगे कहा था, 'मुझे लगता है कि आज के जो संगीतकार हैं वो फिल्म की कहानी की जरूरत पूरी कर रहे हैं। इसके साथ ही ये भी मैं जरूर कहूंगा कि आज के संगीतकार भी काफी प्रतिभाशाली हैं, लेकिन एक सर्कल है जो चलता रहेगा। मुझे लगता है कि जिन पुराने गीतों का जिक्र आज होता है तो वैसा ही फिर से दौर आ जाएगा।'

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खय्याम - फोटो : सोशल मीडिया
अपनी बात आगे रखते हुए खय्याम ने इंटरव्यू के आखिरी में कहा था, 'आज के संगीत में एक रफ्तार होती है। हालांकि ये हमारे वक्त में भी होता था। गाना चलता था और धीरे- धीरे गाना रफ्तार पकड़ता था। ऐसा नहीं है कि इस रफ्तार को हम नहीं समझते थे, हम समझते थे लेकिन उस दौर में उतनी रफ्तार की जरूरत नहीं थी। इसलिए मैं अपनी बात दोहरा रहा हूं कि अब जैसी फिल्में बनेंगी वैसा ही संगीत बनेगा। अब सुर और संगीत से ज्यादा एक बीट की जरूरत होती है, और बीट भी इलेक्ट्रॉनिक, नेचुरल नहीं।'
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खय्याम - फोटो : सोशल मीडिया
इसके अलावा एक दूसरे इंटरव्यू में खय्याम ने खुलासा किया था कि वो कैसे बचपन में छिप–छिपाकर फिल्में देखा करते थे जिसकी वजह से उनके परिवार वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया था। खय्याम अपने करियर की शुरुआत अभिनेता के तौर पर करना चाहते थे पर धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी फिल्मी संगीत में बढ़ती गई और वह संगीत के मुरीद हो गए।
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Mohammed Zahur Khayyam - फोटो : social media
गौरतलब है कि मोहम्मद जहूर खय्याम ने 'कभी-कभी, हीर-रांझा और 'उमराव जान' जैसी कई हिट फिल्मों में संगीत दिया। खय्याम साहब 50 के दशक से ही हिंदी सिनेमा में सक्रिय थे, लेकिन साल 1961 में आई फिल्म 'शोला और शबनम' में संगीत देकर उन्हें असली पहचान मिली थी। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में करीब 40 साल काम किया और 35 फिल्मों में संगीत दिया था। 

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