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भूपेन हजारिका को मरणोपरांत 'भारत रत्न', लाखों दिलों पर ऐसे करते थे राज

Fri, 09 Aug 2019 03:07 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Bhupen Hazarika - फोटो : Social Media
देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' सम्मान समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन शख्सियतों को भारत रत्न से सम्मानित किया। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ ये सम्मान मरणोपरांत नाना जी देशमुख और भूपेन हजारिका को दिया गया। 
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वाजपेयी और भूपेन हजारिका
'ओ गंगा तुम बहती हो क्यों', 'दिल हूम हूम करे' जैसे बेहतरीन गानों को अपनी आवाज देने वाले संगीतकार भूपेन हजारिका बहुमुखी प्रतिभा के गीतकार, संगीतकार और गायक थे। इसके अलावा वह कवि, फिल्म निर्माता, लेखक, असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी थे।
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भूपेन हजारिका
भूपेन हजारिका देश के ऐसे महान कलाकार थे जो अपने गाने खुद लिखते, संगीतबद्ध करते और गाते थे। भूपेन हजारिका के गीतों ने लाखों दिलों को छुआ। अपनी मूल भाषा असमिया के अलावा उन्होंने हिंदी, बंगला समेत कई भारतीय भाषाओं में गाने गाए।

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भूपेन हजारिका
हजारिका का जन्म असम के तिनसुकिया जिले के सदिया इलाके में हुआ था। 10 बच्चों में सबसे बड़े, हजारिका को अपनी मां की वजह से संगीत से लगाव हुआ। उन्होंने मात्र 10 साल की उम्र में अपने लिखे गाने को गाया था। साथ ही उन्होंने असमिया सिनेमा की दूसरी फिल्म 'इंद्रमालती' के लिए 1931 में काम किया। उस समय उनकी उम्र मात्र 12 साल थी। हजारिका ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री ली।
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भूपेन हजारिका
हजारिका को 1975 में सर्वोत्कृष्ट क्षेत्रीय फिल्म के लिये 'राष्ट्रीय पुरस्कार', 1992 में 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें 2009 में 'असोम रत्न', 'संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड', 2011 में 'पद्म भूषण' जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 
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भूपेन हजारिका - फोटो : सोशल मीडिया
वह हमेशा संगीतकार, गायक, एक्टर और फिल्म निर्देशक के रूप में सक्रिय रहे। समाज के तमाम गंभीर मुद्दों को उन्होंने फिल्मों और संगीत के माध्यम से पेश किया। उनकी इसी कला ने उन्हें एक महान गीतकार की फेहरिस्त में लाकर खड़ा कर दिया। 2011 में उनका निधन हो गया।
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