प्रदीप कुमार
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प्रदीप कुमार खुद बंगाली पृष्ठभूमि के अभिनेता थे। लेकिन उर्दू भाषा में उनका सानी कोई नहीं था। ऐसे में जब उनसे पूछा गया कि बंगाली होते हुए आप इतनी अच्छी उर्दू कैसे बोल लेते हैं? तो इसके जवाब में उन्होंने बताया था कि, 'लोग कहते हैं कि रास्ते हमें मंजिल पर ले जाते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि हमारे कदम के साथ हमारी लगन, हमारी हिम्मत, हमारी दीवानगी, ही मरहले तय करके हमारी मंजिल को सामने ले आती है। मेरी मातृ जबान बंगाली में उर्दू की चाशनी घोलने का मौका मुझे तब मिला। जब फिल्म इंडस्ट्री की तीन बड़ी अभिनेत्रियां नरगिस, मधुबाला और मीना कुमारी के साथ जिंदगी का एक खूबसूरत मोड़ आया। उनके परिचय के आते ही उर्दू का शौक और बढ़ा और एहले जबान साथियों ने मेरी जुबान पर उर्दू की शिरनी रख दी और नतीजा तो सभी देख ही रहे हैं।'