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दरअसल पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जिया उल हक का दौर तानाशाही था। अब अगर ऐसे में श्रीदेवी न होती तो जनरल जिया-उल-हक की 10 साल पर फैली घुप्प तानाशाही को लड़के कैसे काटते। 'हिम्मतवाला', 'सदमा', 'आखिरी रास्ता', 'नगीना' और 'मिस्टर इंडिया' के अलावा तीस से ज्यादा फिल्मों के जरिए उनका जादू लोगों पर चला और आखिरकार 24 जनवरी 2018 को हम सब को छोड़ हमेशा के लिए अलविदा कह गईं।