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Coronavirus: इन पांच फिल्मों में भी दिखा है लॉकडाउन, राधिका आप्टे तो हुई थीं 'फोबिया' का शिकार

Mon, 23 Mar 2020 04:53 PM IST
anand anand एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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bollywood film based on lockdown - फोटो : amar ujala
कोरोना वायरस ने दुनियाभर के लोगों में खौफ पैदा कर दिया है। इस खतरनाक वायरस की चपेट में 160 से ज्यादा देश आ चुके हैं। इन सभी देशों में संक्रमित लोग कोरोना के संकट से लड़ रहे हैं। भारत में भी कोरोना वायरस से संक्रिमत लोगों की संख्या 400 के पार को गई। कोरोना वायरस के संक्रमण की गंभीरता को समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को लोगों से जनता कर्फ्यू की मांग की। जिसके तहत उन्होंने लोगों को घर में रुके रहने की अपील की। पीएम मोदी के अलावा राज्य सरकारों ने भी अपने यहां कई शहर और जिलों को लॉकडाउन कर दिया है। ऐसे में बेवजह घर से निकलने पर पाबंदी है। बॉलीवुड फिल्मों में भी हम लोग लॉकडाउन जैसी स्थिति देख चुके हैं। ऐसी कई फिल्में हैं जिनमें कहानी का मुख्य किरदार अभिनेता या अभिनेत्री ऐसी जगह फंस जाते हैं जहां कोई नजर नहीं आता और कई मदद भी नहीं मिलती हैं। ऐसे में आज हम आपको बॉलीवुड की कुछ ऐसी ही फिल्मों से रुबरू करवाने जा रहे हैं।
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TRAPPED - फोटो : file photo
फिल्म- ट्रैप्ड
इस फिल्म में अभिनेता राजकुमार राव मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म की कहानी शौर्य (राजकुमार राव) की है। जो किफायती फ्लैट देखने के चक्कर में एक निर्माणधीन अपार्टमेंट में रहता है। कानूनी प्रतिबंध के चलते शौर्य के अलावा इस अपार्टमेंट में कोई और नहीं रहता है। एक दिन शौर्य अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने की जल्दीबाजी में घर से निकलने की कोशिश करता है, लेकिन वह गलती से अपने ही घर में कैद हो जाता है।

इस दौरान वह शौर्य अपने घर का लॉक तोड़ने से लेकर घर से निकलने की हर संभव कोशिश करता है, लेकिन वह निकल नहीं पाता है। इस दौरान शौर्य के मोबाइल फोन की बैटरी भी खत्म हो जाती है और उसके घर में खाने का भी कोई सामान नहीं होता है। नई जगह अपार्टमेंट होने की वजह से शौर्य की गर्लफ्रेंड को भी उसके घर का पता नहीं होता है। एक हफ्ते से घर में बंद होने के कारण शौर्य खुद को जीवित रखते के लिए कॉकरोच, चीटिंया और कबूतर खाने लगता है। दर्शकों ने फिल्म ट्रैप्ड को काफी पसंद किया था। साल 2016 में आई इस फिल्म का निर्देशन विक्रमादित्य मोटवानी ने किया है। 
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बॉलीवुड, फिल्म पीहू - फोटो : self
फिल्म- पीहू
ये फिल्म दो साल की एक बच्ची पीहू की कहानी को बयां करती है। इस फिल्म में माया विश्वकर्मा मुख्य भूमिका में हैं। इस फिल्म की कहानी हैस दो साल की एक बच्ची का जिसका जन्मदिन मनाने के बाद उसकी मां अगले दिन घर में मर जाती है। ऐसे में पीहू पूरे घर में अकेले होती हैं। छोटी बच्ची होने के कारण वह गैस, बिजली और घर में मौजूद तमाम जरूरत वाली चीजें जो थोड़ी सी लापरवाही पर हमारे लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं, के आसपास घूमती रहती है।

इन सभी चीजों के बीच पीहू अकेले घर में बंद होती है और फिल्म के अंत में पीहू के पिता उसको बचाने में कामयाब होते हैं। इस फिल्म का निर्देशन विनोद कापड़ी ने किया था। ये फिल्म साल 2018 में आई थी।

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house arrest - फोटो : social media
फिल्म- हाउस अरेस्ट
ये फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर पिछले साल रिलीज हुई थी। इस फिल्म में अली फजल मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म की कहानी एक जापानी कॉन्सेप्ट पर है, जिसका नाम हिकिकोमोरी है। इसके तहत जापान के लोग, खासतौर पर युवा अपने को कई दिनों, महीनों और सालों तक घर में बंद कर लेते हैं।

इसको ही हिकिकोमोरी हैं। फिल्म हाउस अरेस्ट में अली फजल ऐसी ही घर में रहते हैं। उन्हें छह महीने से ऊपर हो चुके होते हैं अपने घर से निकले हुए। इस दौरान अली फजल के घर में कुछ अनचाहे लोग आ जाते हैं जिनसे वह मिलना भी नहीं चाहते। इस फिल्म का निर्देशन शशांक घोष और समित बसु ने किया है।
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Game Over - फोटो : मुंबई ब्यूरो
फिल्म- गेम ओवर
यह एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म ड्रामा फिल्म है। इस फिल्म में तापसी पन्नू मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म में उनके नाम स्वप्ना होता है और वह एक गेम डिजाइनर होती हैं। गेम ओवर में दिखाया गया है कि स्वप्ना का एक बुरा पास्ट होता है, जिसकी वजह से उसको अंधरे में जाने पर डर लगने लगता है। इतना ही नहीं स्वप्ना को महसूस होता है कि उसको कोई शख्स देख रहा है। इसके चलते वह हर समय अपने घर में रहती हैं। इस फिल्म का निर्देशन अश्विन सारावनन ने किया है। ये फिल्म पिछले साल सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। 
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फोबिया - फोटो : self
फिल्म- फोबिया
ये फिल्म साल 2016 में आई थी। इस फिल्म में अभिनेत्री राधिका आप्टे मुख्य भूमिका में थीं। जैसे की नाम से पता चल रहा है कि ये फिल्म एक तरह के फोबिया पर आधारित है। फिल्म की अभिनेत्री महक देओ (राधिका आप्टे) जो काफी प्रतिभाशाली कलाकार हैं। लेकिन एक टैक्सी ड्राइवर उसके साथ कार में छेड़छाड़ कर देता। इसके बाद से वह एगोराफोबिया का शिकार हो जाती है। इस फिल्म में महक खुद को घर से बाहर नहीं निकालती है। वह खुद को एक घर में कैद रखती हैं।
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