बैडमिंटन खेलने के लिए तो फिर भी एक रैकेट, शटल कॉक और नेट चाहिए लेकिन, खो खो जैसा देसी खेल खेलने के लिए तो सिर्फ हौसला, हिम्मत और जोश ही चाहिए। गांव, गली, कूचे और शहरी बस्तियों के बच्चों को खेलकूद में शामिल करने के लिए बीते पांच साल से चल रहे खो खो फेडरेशन ऑफ इंडिया के अभियान को नई रोशनी देने के लिए राष्ट्रीय महिला टीम की कप्तान नसरीन की बायोपिक बनने जा रही है। इस बायोपिक का प्रदर्शन सिनेमाघरों के अलावा देश के तमाम सरकारी स्कूलों में भी करने की योजना बनाई जा रही है। इस पूरी योजना का खुलासा 24 दिसंबर से कटक, ओडिशा में होने जा ‘अल्टीमेट खो खो’ मुकाबलों के उद्घाटन पर होने जा रहा है।