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Supriya Pathak Interview: राम दरबार से बुलावे का बेसब्री से इंतजार, सुनाया राजेश खन्ना से मिले तोहफे का किस्सा

Sun, 12 Nov 2023 09:48 AM IST
प्रियंका नेगी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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सुप्रिया पाठक - फोटो : अमर उजाला
छोटे पर्दे का शो 'खिचड़ी' काफी लोकप्रिय शो रहा हैं। इसी शो से प्रेरित होकर शो के मेकर्स ने साल 2010 में फिल्म 'खिचड़ी' का निर्माण किया था, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। अब 13 साल के बाद 'खिचड़ी 2-मिशन पंथुकिस्तान' 17 नवंबर को रिलीज हो रही है। खिचड़ी ब्रांड का  लोकप्रिय किरदार हंसा एक बार फिर दर्शकों को बड़े पर्दे पर हंसाने आ रहे है।  हंसा की भूमिका भूमिका निभाने वाली सुप्रिया पाठक ने हाल ही में अमर उजाला से खास बातचीत की। 
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सुप्रिया पाठक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

खिचड़ी से लेकर फिल्म खिचड़ी 2 तक आपकी बड़ी लंबी यात्रा रही है. इस यात्रा से जुड़ी कुछ यादें शेयर करना चाहेंगी ? 
खिचड़ी से जुडी से बहुत सारी यादे हैं।  मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगी कि जीवन में जितनी भी चीजे ही सकती हैं, वह सब कुछ खिचड़ी में है, बहुत कुछ बदला। लेकिन एक चीज जो इतने अर्से से बरकरार रही है वह यह कि खिचड़ी का जो ह्यूमर है वह नहीं बदला। हम जिस दौर से गुजरे हैं और अभी भी जो हमें आस पास दौर दिख रहा है। उसमें फिल्म 'खिचड़ी 2' एक खुशी की फूलझड़ी की तरह है जो आपको दो घण्टे तनाव से मुक्त कर देगी। वह फिल्म 17 नवंबर को रिलीज हो रही है। यह दीवाली की खुशियों का एक्सटेंशन हैं। 

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सुप्रिया पाठक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आपके लिए दिवाली की खुशियों के क्या मायने है
मेरे लिए दिवाली की खुशियों के मायने हैं, अंदर का दिया जलाना। आप के अंदर जो संतुष्टि है उसे बरकरार रखना जरूरी है। मैं हर साल दिवाली में एकांत में बैठकर खुद को समझती हूं कि जिंदगी कितनी खूबसूरत है। अगर आप उसे सकारात्मक दृष्टि से देखें, तो जिंदगी जीने का अपना एक अलग ही मजा और अनुभव है।  जिंदगी में अच्छी और बुरी दोनों तरह की सिचुएशन आती है, हर सिचुएशन में जितना हो सके अपने आपको दिमागी तौर पर संयम से जीएं। वह सबसे बेहतर चीज है। यहीं एक ऐसी चीज है जो आपको आगे ले जाएगी।

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सुप्रिया पाठक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

घर पर परिवार के साथ किस तरह से  दिवाली का त्यौहार मनाती हैं आप?
हम बचपन में जिस तरह से दिवाली मनाते थे, वैसी दिवाली जब शादी के बाद पंकज (कपूर) के घर आई, उसके बाद से नहीं मनाते है। हमारे सास ससुर राधास्वामी को मानने वाले थे। हम सब मिलकर अच्छा खाना खाते थे, दीये जलाते थे लेकिन लक्ष्मी पूजा नहीं होती नहीं होती थी। राधास्वामी की परम्परा के अनुसार दिवाली के दिन सतनाम का स्मरण करते थे। सास ससुर के जाने के बाद मैंने और पंकज ने उसी परम्परा का अनुसरण किया। जैसा हमारे सास ससुर करते आ रहे थे।

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सुप्रिया पाठक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

बचपन में दिवाली से जुड़ी कुछ खास यादें, अपने पिता  बलदेव पाठक के साथ दिवाली कैसे मनाती थी आप? 
जब मैं छोटी थी तब मेरे पिता जी कपड़े डिजाइन करते थे। उनकी एक दुकान थी। उस समय अकाउंट के लिए जो लाल किताब होती थी जिसे चौपड़ी कहते थे। पुराने साल की बंद होती थी और नए साल की शुरू होती थी। दुकान में एक पूजा होती थी। पंडित जी आते थे और सारी किताबों के ऊपर पहले कुमकुम से स्वास्तिक बनाते थे। और, फिर उसकी पूजा होती थी। दीवाली को लेकर यह मेरी सबसे मजबूत याददाश्त है।

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खिचड़ी 2 में सुप्रिया पाठक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आपके पिताजी ने राजेश खन्ना के लिए ड्रेस मेकर के तौर पर काफी लंबे समय तक काम किया, गुरु कुर्ता भी उन्हीं का बनाया हुआ था राजेश खन्ना की दिवाली पार्टी में तो आप जाती रही होंगी?
राजेश खन्ना जी की बहुत बड़ी दिवाली पार्टी होती थी। उनकी दिवाली बहुत लम्बी चलती थी। हर दिवाली के दिन राजेश खन्ना जी के घर पर जाते थे। कभी दिवाली के दिन सुबह नहीं तो शाम को जरूर जाते थे।  अगर दिवाली के दिन नहीं जा पाते थे तो दिवाली के दूसरे दिन जाते थे। राजेश खन्ना जी हम दोनों बहनों को बहुत प्यार करते थे और हमेशा कुछ ना कुछ गिफ्ट देते ही थे। एक तरह से उनके साथ हमारा पारिवारिक रिश्ता हो गया था।

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सुप्रिया पाठक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

राजेश खन्ना का दिया कोई ऐसा गिफ्ट जो आपके लिए बहुत खास मायने रखा हो?
मैं कुत्तों से बहुत डरती थी। एक दिन हमारे पिता जी आए और एक बॉक्स में मेरे लिए एक छोटा सा कुत्ता लेकर आ गए। वह बहुत ही क्यूट था। पहले तो मैं बहुत डरी, पिता जी ने बताया कि यह कुत्ता राजेश खन्ना जी के घर पर पैदा हुआ था। राजेश जी ने मेरे और रत्ना जी के लिए गिफ्ट दि. कि सुप्रिया इनसे डरती है तो अब ये ही इसे पाले। जब उस कुत्ते को पालना शुरू किया तो कुत्तों से मेरा डर खत्म हो गया।

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सुप्रिया पाठक और पंकज कपूर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कभी बॉलीवुड की दिवाली पार्टी में जाना हुआ है
बॉलीवुड की दिवाली पार्टी में मैं नहीं जाती, क्योंकि मै ताश के पत्ते नहीं खेलती, इसलिए मुझे बॉलीवुड की दिवाली पार्टी में जाना पसंद नहीं है। कभी कभार गई होगी, लेकिन ताश के पत्तों का खेल मैं नहीं समझ पाती, इसलिए बॉलीवुड की दिवाली की पार्टी में नहीं जाती हूं। दिवाली के दिन मैं घर ही रहती हूं और सोचती हूं कि अगली दिवाली तक कैसे घर परिवार में खुशियां बनी रहे। कभी कभार आसपास के दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने चली जाती हूं। 

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सुप्रिया पाठक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अयोध्या में कभी दिवाली के समय जाना हुआ है
मैं अयोध्या वैसे भी कभी नहीं जा पाई हूं। लेकिन मैं वहां जरूर जाना चाहूंगी। मेरा बहुत मन करता है, देखते हैं प्रभु श्रीराम के दरबार से कब बुलावा आता है। वहां प्रभु श्रीराम के मंदिर का निर्माण बहुत ही भव्य तरीके से हो रहा है, उसे देखने की बहुत इच्छा है।  

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