फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Movie Review: खुद को चमकाने के चक्कर में कंगना ने कर दीं ‘मणिकर्णिका’ में ये बड़ी गलतियां

Thu, 24 Jan 2019 07:44 PM IST
अरविंद अरविंद एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
Manikarnika
बॉलीवुड की 'क्वीन' कंगना रनौत की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'मणिकर्णिका' कल (25 जनवरी) को रिलीज होने जा रही है। इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर यह दूसरी देभक्ति फिल्म है। इससे पहले विक्की कौशल और यामी गौतम स्टारर फिल्म 'उरी-द सर्जिकल स्ट्राइक' रिलीज हुई थी जो बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुई। खैर, फिल्म 'मणिकर्णिका' के रिलीज होने से पहले अमर उजाला पर पढ़िए फिल्म पर ये खास रिव्यू...  

फिल्म: मणिकर्णिका – द क्वीन ऑफ झांसी
कलाकार: कंगना रनौत, अंकिता लोखंडे, जीशान अयूब आदि।
निर्देशक: कृष और कंगना रनौत
रेटिंग: **
विज्ञापन

2 of 6
manikarnika
बीते साल की शुरुआत हिंदी सिनेमा में लोककथाओं के एक लोकप्रिय किरदार 'पद्मावती' पर बनी फिल्म से हुई और इस साल की शुरुआत में रिलीज हुई है एक ऐसे किरदार की कहानी जिसे हिंदी पट्टी के लोगों ने बुंदेले हरबोलों के मुंह से खूब सुना है। ये ऐसी मर्दानी है, जो खूब लड़ी भी और खूब भिड़ी भी। सुभद्रा कुमारी चौहान की वीर रस की कविता अगर आपने पढ़ी है तो इसकी आपको वह लाइन भी याद होगी, ‘चमक उठी सन सत्तावन में वो तलवार पुरानी थी।’ कृष की शूट की हुई फिल्म को रीशूट करके कंगना ने भी खुद को चमकाने की कोशिश की है और गलती वही हुई जो आमिर खान को चमकाने के चक्कर में ठग्स ऑफ हिंदोस्तान में हुई थी।
विज्ञापन

3 of 6
manikarnika
ठग्स ऑफ हिंदोस्तान के साथ मणिकर्णिका की तुलना इसलिए भी बार-बार होती है क्योंकि दोनों पीरियड फिल्में एक ही कालखंड की हैं। फिरंगी अगर अवध का था तो मणिकर्णिका का किरदार भी उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड का है। न फिरंगी अवध का लगा और न ये झांसी की रानी बुंदेलखंड की लगती है। सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताएं कंगना ने जरूर पढ़ी होंगी, गलती उनसे बस यहां ये हो गई कि फिल्म की पटकथा उन के विजयेंद्र प्रसाद के हाथों में चली गई जिन्हें उत्तर भारतीय लोक संस्कृति का ज्यादा भान नहीं है। इसी के चलते फिल्म में काशी से लेकर झांसी तक का असल रंग कैनवास और संगीत दोनों से गायब है।

4 of 6
डेमो इमेज
फिल्म बहुत भव्य बनी है, इसमें दो राय नहीं। कंगना जब भी फ्रेम में होती हैं तो वह जगमगा उठती हैं और, ऐसे दृश्य फिल्म में गिनती के हैं जब वह फ्रेम में नहीं हैं। इसे देखकर समझ भी आता है कि ये फिल्म कंगना ने झांसी की रानी की शौर्यगाथा जन जन तक पहुंचाने के लिए कम और अपना आभामंडल हिंदी पट्टी में विस्तारित करने के लिए ही बनाई है। तनु वेड्स मनु सीरीज और क्वीन जैसी फिल्मों को हिंदी पट्टी में बेशुमार प्यार मिला भी है। वजह? वहां कंगना एक आम इंसान दिखीं। मणिकर्णिका में चेहरे पर डाले गए तमाम स्पेशल इफेक्ट्स वाली लड़की कोई और है। हां, वह दृश्य जरूर बेहतरीन बन पड़ा है जहां अंग्रेज अफसर के सामने वह नजरें झुकाने से इंकार कर देती हैं।
विज्ञापन

5 of 6
manikarnika - फोटो : twitter
फिल्म के संवाद अतिरेक भरे हैं। किरदार कोई बड़ा तब होता है जब दूसरे किरदार उसके बारे में बड़ी बातें करते हैं। अपने बारे में खुद ही बार-बार बोलना बड़बोलापन है और कंगना का किरदार पूरी फिल्म में इसका शिकार रहा है। फिल्म में दिखाए गए अंग्रेज किरदार बचकाने लगते हैं। अंकिता लोखंडे को ज्यादा मौका नहीं मिला है अपना दम दिखाने का और सुरेश ओबेरॉय हों, डैनी हों, जीशान अयूब हों या फिर जीशू सेनगुप्ता सब अपना काम निपटाते नजर आते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
मणिकर्णिका - फोटो : मणिकर्णिका
कंगना के करियर में मणिकर्णिका अहम मोड़ है और ये फिल्म पद्मावत की तरह ही उनकी अदाकारी के झंडे भी गाड़ सकती थी, बशर्ते इसका निर्देशन संजय लीला भंसाली जैसे किसी सुलझे हुए तकनीशियन ने किया होता। कंगना के प्रशंसकों के लिए फिल्म इस वीकएंड का टाइमपास भले हो, लेकिन अगर आप बाजीराव मस्तानी या ट्रॉय जैसी फिल्मों के शौकीन हैं तो मणिकर्णिका से दूर रहना ही आपके लिए बेहतर है। अमर उजाला डॉट कॉम के वीकली रिव्यू में मणिकर्णिका को मिलते हैं दो स्टार।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें