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कंगना रणौत किसके दम पर उद्धव ठाकरे पर हमला कर रही हैं? जानिए मामले का पूरा विश्लेषण

Fri, 11 Sep 2020 02:23 PM IST
shrilata biswas बीबीसी हिंदी
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कंगना रणौत-उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
कंगना रणौत ने मुंबई पहुंचकर बीएमसी की कार्रवाई पर अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो जारी करते हुए अपनी बात कही थी। जहां एक ओर कंगना की इस प्रतिक्रिया से महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ उनका रुख नर्म होता नहीं दिख रहा है। वहीं, कंगना ने इस वीडियो में सीधे उद्धव ठाकरे को निशाने पर लिया है जो कि एक अहम बात है।
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कंगना रणौतऔर उद्धव ठाकरे - फोटो : twitter@OfficeofUT, Instagram/kanganaranaut
कंगना ने अपने बयान ने कश्मीरी पंडितो का भी जिक्र किया था। इसके बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि ये जो कुछ हुआ है, वो महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार हुआ है।
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कंगना रणौत - फोटो : Twitter @KanganaTeam
सवाल ये उठता है कि आखिर कंगना ने जिस अंदाज में उद्धव ठाकरे को निशाने पर लिया है, उसके पीछे क्या वजह हो सकती है। शिवसेना और महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से देखने वालीं वरिष्ठ पत्रकार सुजाता आनंदन कहती हैं, "मैं 110 फीसदी मानती हूं कि कंगना को बीजेपी का भारी समर्थन हासिल है। अगर ऐसा नहीं होता तो ये संभव ही न होता कि वह उद्धव ठाकरे के बारे में इस तरह से बात कर पातीं। मैं ये भी मानती हूं कि कंगना ये सब करते हुए खुद में आश्वस्त होंगी कि उन्हें राज्य सभा का टिकट मिल जाए। क्योंकि अब उन्होंने जो किया है, उसके बाद भले ही शिवसेना सीधे उन पर हमला न करे लेकिन वह बॉलीवुड और सरकारी अमले के माध्यम से उन्हें घेरने की कोशिश करेंगी। इतिहास गवाह है कि शिवसेना के बॉलीवुड से बहुत ही गहरे संबंध रहे हैं और ये उनका तरीका है कि किसी को खत्म करना है तो उसे राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से अलग - थलग करके खत्म करो।"

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कंगना रणौत - फोटो : PTI
हालांकि, कंगना रणौत किसी भी पॉलिटिकल पार्टी से संबंध होने या राजनीति में जाने की योजनाओं का खंडन कर चुकी हैं। कंगना ने बीबीसी की एक खबर पर टिप्पणी करते हुए एक दिन पहले भी अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था कि "कंगना रणौत न तो एक मोहरा हैं और न ही एक खिलाड़ी। और वो व्यक्ति आज तक पैदा नहीं हुआ है जो कि उन्हें मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर सके।"
कंगना के घर को तोड़े जाने की जहां बीजेपी आलोचना कर ही रही है वहीं इस कदम की आलोचना कांग्रेस नेताओं की ओर से भी होने लगी है।
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कंगना रणौत - फोटो : PTI
कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने ट्वीट करके लिखा है, "कंगना का ऑफिस अवैध था या उसे डिमॉलिश करने का तरीका? क्योंकि हाई कोर्ट ने कार्रवाई को गलत माना और तत्काल रोक लगा दी। पूरा एक्शन प्रतिशोध से ओत-प्रोत था। लेकिन बदले की राजनीति की उम्र बहुत छोटी होती है। कहीं एक ऑफिस के चक्कर में शिवसेना का डिमॉलिशन न शुरू हो जाए!"
इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने कंगना रणौत के घर/दफ्तर तोड़े जाने के बाद बीएमसी की कार्रवाई पर स्टे दे दिया है। सोशल मीडिया पर इसे कंगना की जीत के रूप में देखा गया।
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कंगना रणौत - फोटो : ANI
इससे पहले बुधवार की सुबह कंगना की ओर से घर तोड़े जाने की तस्वीर ट्वीट की गई। कंगना ने अपने ट्वीट में लिखा था, “मणिकर्णिका फिल्म्स में पहली फिल्म अयोध्या की घोषणा हुई, यह मेरे लिए एक इमारत नहीं राम मंदिर ही है, आज वहां बाबर आया है, आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा राम मंदिर फिर टूटेगा मगर याद रख बाबर यह मंदिर फिर बनेगा यह मंदिर फिर बनेगा, जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम…”
कंगना ने ट्वीट करके बताया था कि उनके घर में किसी तरह का अवैध निर्माण नहीं किया गया है।
उन्होंने ट्वीट में लिखा, “मेरे घर में किसी तरह का अवैध निर्माण नहीं हुआ है। इसके साथ ही सरकार ने कोविड के दौरान 30 सितंबर तक किसी भी तरह की ध्वस्त करने वाली कार्रवाइयों पर रोक लगा रखी थी। 'बुलीवुड' अब देखिए कि फासीवाद कुछ ऐसा दिखता है।”
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कंगना रणौत - फोटो : PTI
इसके बाद कंगना रणौत के वकील रिजवान सिद्दीकी ने बीएमसी की कार्रवाई के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कई लोग बीएमसी के इस कदम को बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश का भी उल्लंघन मान रहे हैं जिसके तहत 30 सितंबर तक सभी तरह की डिमोलिशन ड्राइव पर प्रतिबंध लगाया गया था। वहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट में जीत के बाद और उससे पहले से भी सोशल मीडिया पर कंगना को समर्थन मिलता दिख रहा है।

रेसलर बबिता फोगाट ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है, “गीदड़ की जब मौत आती है तो फिर वह शहर की तरफ भागता है यही हाल शिवसेना का है कंगना बहन डरने वाली नहीं है। जब पूरा देश उनके साथ है तो ऑफिस फिर बन जाएगा लेकिन शिवसेना की औकात का पता चल गया। बहन डरना नहीं है पूरा देश आपके साथ खड़ा है।”
कंगना ने अपने ट्वीट्स के साथ जिस हैशटैग का इस्तेमाल किया है, वह इस समय शीर्ष स्थान पर है।
 

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कंगना रणौत - फोटो : PTI
क्या बीएमसी ने लिया बदला?
इस पूरे मामले में बीएमसी के ऊपर ये आरोप लग रहा है कि उसने ये कार्रवाई बदले की भावना से प्रेरित होकर की है। बीएमसी पर आरोप लगाने वालों का तर्क है कि इससे पहले शाहरूख खान से लेकर कपिल शर्मा जैसी हस्तियों के खिलाफ भी बीएमसी ने कार्रवाई की है लेकिन 24 घंटे जैसा फरमान जारी करके अगले दिन तोड़फोड़ का काम नहीं किया गया जो कि कंगना के मामले में किया गया है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हेमंत देसाई इसे पूरी तरह से बदले की भावना से प्रेरित कार्रवाई मानते हैं। वे कहते हैं, “ये तो पूरी तरह सही है कि कंगना रणौत के खिलाफ बीएमसी ने जो कार्रवाई की है, उसमें बदले की भावना नजर आती है। क्योंकि मुंबई में तमाम ऐसी इमारते हैं जहां अवैध निर्माण किया गया है। वहां इस तरह की कार्रवाई नहीं होती है।”

शिव सेना की राजनीति को बेहद करीब से समझने वालीं वरिष्ठ पत्रकार सुजाता आनंदन भी इसे एक बदले की कार्रवाई मानती हैं। सुजाता आनंदन मानती हैं कि ये पहली बार नहीं हो रहा है जब बीएमसी ने अपनी बुराई करने वालों के खिलाफ इस हथकंडे का इस्तेमाल किया हो। वे कहती हैं, “ये पहला मामला नहीं है कि बीएमसी ऐसा कुछ कर रही हो। इससे पहले जब आरजे मलिष्का ने मुंबई के गड्ढों वाली सड़क को लेकर एक गाना बनाया था तब भी बीएमसी ने इसी तरह की प्रतिक्रिया दी थी।”

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कंगना रणौत - फोटो : Twitter @KanganaTeam
पर्दे के पीछे कौन?
लेकिन वह ये भी मानती हैं कि ये शिव सेना की स्वाभाविक प्रतिक्रिया नहीं है। वे कहती हैं, “मैं जितना शिवसेना को समझती हूं, उसके मुताबिक बीएमसी ने जो कुछ किया है, वो शिवसेना की स्वाभाविक प्रतिक्रिया नहीं है। शिवसेना की स्वाभाविक प्रतिक्रिया ये होती कि वह कुछ अराजक तत्वों को भेजकर कंगना के दफ्तर पर तोड़फोड़ करवा देती लेकिन बीएमसी ने जिस ढंग से कंगना के खिलाफ कार्रवाई की है, वो बताता है कि शरद पवार की इसमें बड़ी भूमिका है क्योंकि पवार को अपने दुश्मनों से कानूनी परिधि में रहते हुए निपटने के लिए जाना जाता है।”

“अब तक शिवसेना की ओर से किसी तरह की अराजकता नहीं फैलाई गई है तो वो इसलिए है क्योंकि शरद पवार ने इसकी इजाजत नहीं दी है। और उद्धव ठाकरे भले ही इस सरकार के मुख्यमंत्री हों लेकिन इसके असली नेता शरद पवार ही हैं। संजय राउत एक मौके पर ये कह भी चुके हैं कि इस सरकार के हेडमास्टर पवार ही हैं। ऐसे में ये जो कुछ हो रहा है, उस पर पवार की छाप नजर आती है।”

महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार हेमंत देसाई मानते हैं कि कंगना भी एक तरह से उकसाने का काम कर रही हैं।
वह कहते हैं, “कंगना ने जिस तरह से बाबर आदि शब्दों का इस्तेमाल किया है, वो साफ बताता है कि कंगना ने भी राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया है। वह भी उकसाने वाली भाषा में बात कर रही हैं। और ऐसा लग रहा है कि अभी शिवसेना कंगना के खिलाफ कुछ और आक्रामक कदम भी उठा सकती है। लेकिन एक बात तय है कि ये मामला आगे ही बढ़ेगा।”
 
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कंगना रणौत - फोटो : ANI
कोल्ड वॉर में फंसी कंगना?
विशेषज्ञ मानते हैं कि महाराष्ट्र में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना गठबंधन की सरकार बनने के बाद से बीजेपी और शिवसेना के बीच एक तरह का कोल्ड वॉर जारी है। इस कथित कोल्ड वॉर में बीएमसी ने कंगना रणौत का घर/दफ्तर तोड़ दिया है। इस घटना के बाद ये जंग तीखी बयानबाजी से ऊपर उठकर आक्रामक कार्रवाइयों तक पहुंच गई है।

ऐसे में सवाल उठता है कि अब इस मामले में आगे क्या होगा। सुजाता आनंदन मानती हैं कि अगर कंगना ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ अपने व्यवहार में नरमी नहीं दिखाई तो ये सब यूं ही जारी रहेगा।वे कहती हैं, “इस बात में दो राय नहीं है कि ये जंग ऐसे ही जारी रहेगी। बीजेपी अगले पांच सालों तक ठाकरे परिवार को अपने निशाने पर रखेगी। लेकिन सवाल अगर ये है कि ये हाई डेसिबल बयानबाजी कब तक जारी रहेगी तो इसका जवाब दो शब्दों में दिया जा सकता है। और ये दो शब्द हैं – बिहार चुनाव।”
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