फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ 14 जनवरी 2000 को रिलीज हुई थी। एक बार फिर से यह सिनेमाघरों में दर्शकों को देखने को मिलेगी। ऋतिक रोशन को इसी डेब्यू फिल्म ने स्टार बना दिया था।
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फिल्म 'कहो ना प्यार है' का पोस्टर-अमर उजाला की समीक्षा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
14 जनवरी 2000 को रिलीज हुई फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ की समीक्षा रविवार 16 जनवरी 2000 के ‘अमर उजाला’ अखबार के सभी संस्करणों में छप गई और वाकई ‘आ पहुंचा एक नया स्टार’। सिनेमा वितरण क्षेत्रों में सबसे अहम दिल्ली-यूपी टेरिटरी का मक्का समझे जाने वाले भगीरथ पैलेस से इतने फोन मुझे पहले किसी फिल्म समीक्षा के लिए नहीं आए जितने सोमवार 17 जनवरी को दिन भर आए। ‘कहो ना प्यार है’ की कहानी कोई बहुत अनोखी नहीं है, लेकिन फिल्म का हीरो अनोखा था। कहते हैं ना कि इंसान को जीवन में प्यार कई बार होता है, लेकिन एक समय में वह एक से होता है। कहानी की नायिका सोनिया की कहानी भी यही थी। राज और रोहित दोनों से उसे प्यार होता है, लेकिन अलग अलग वजहों से, अलग अलग मौकों पर। फिल्म इतनी लोकप्रिय है कि अगर आप ये बाइस्कोप पढ़ रहे हैं तो ये फिल्म तो आपने अब तक देख ही रखी होगी। और, नहीं देखी है तो फिर इस शुक्रवार से ये फिल्म फिर से देश भर में रिलीज हो रही है।
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फिल्म 'कहो ना प्यार है' के एक सीन में ऋतिक-अमीषा पटेल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बना दिया पुरस्कारों का विश्वरिकॉर्ड
फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई का अपनी रिलीज के साल में तो रिकॉर्ड बनाया ही, इसने एक रिकॉर्ड सबसे ज्यादा पुरस्कार बटोरने का भी बनाया। अकेले फिल्मफेयर पुरस्कारों में इस फिल्म ने नौ पुरस्कार समेट लिए थे। ऋतिक रोशन अब तक के इकलौते ऐसे अभिनेता हैं, जिन्होंने फिल्मफेयर का बेस्ट एक्टर और बेस्ट डेब्यू मेल दोनों पुरस्कार एक ही साल मिले। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इसकी एंट्री हुई एक ऐसी फिल्म के लिए जिसने साल 2002 तक कुल मिलाकर 92 पुरस्कार जीत लिए थे। बाद में हालांकि ये गिनती और भी बढ़ती रही। हिंदी सिनेमा की ये अब तक की सर्वाधिक पुरस्कार जीतने वाली फिल्म है। राकेश रोशन हिंदी फिल्मों में 1970 से काम करते रहे, लेकिन उनको अपने करियर का पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला तो फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ के लिए।
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फिल्म 'कहो ना प्यार है' के गाने में ऋतिक रोशन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पहले गाना, या पहले डायलॉग
फिल्म को बनने में करीब दो साल का वक्त लगा। ये उन दिनों की बात है जब मशहूर हीरोइन बबीता अपनी दूसरी बिटिया करीना को लेकर फिल्म निर्माता निर्देशकों के यहां चक्कर लगाया करती थीं। सबसे उनकी जान पहचान थी। सब खूब खातिरदारी करते हुए मिलते भी थे। लेकिन, हिंदी सिनेमा में पहला मौका ही सबसे मुश्किल काम होता है। राकेश रोशन ने अपना करियर मोहन कुमार के सहायक निर्देशक के तौर पर शुरू किया था। राजेंद्र कुमार की फिल्म ‘अनजाना’ में बबीता हीरोइन थीं और राकेश रोशन उस फिल्म के सेट पर एक सहायक निर्देशक। राकेश रोशन फिल्म की शूटिंग की शुरुआत एक गाने से करना चाहते थे और बबीता अड़ी थी कि नहीं, पहला सीन संवाद वाला होना चाहिए। बस मामला यहीं से बिगड़ना शुरू हुआ, ये बात फिल्म के पहले शेड्यूल के पहले दिन की शूटिंग शुरू होने से चार दिन पहले की है।
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फिल्म 'कहो ना प्यार है' के एक सीन में ऋतिक-अमीषा पटेल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
चार दिन पहले करीना की छुट्टी
फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ की शूटिंग शुरू होने से चार दिन पहले बबीता के साथ राकेश रोशन की जो बात हुई, उसके बाद राकेश रोशन ने करीना कपूर को फिल्म से निकाल दिया। बबीता ने हालांकि सबको यही बताया कि फिल्म करीना ने इसलिए छोड़ी क्योंकि उन्हें अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक के साथ बन रही फिल्म ‘रेफ्यूजी’ बेहतर लगी। ख़ैर, करीना को फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ से निकाल तो दिया गया लेकिन आगे क्या? फिल्म का सेट लग चुका था। बजट की एक मोटी रकम उस पर खर्च हो चुकी थी। प्रोडक्शन वालों ने पूछा भी कि क्या सेट गिरा दें? संयोग से उसी शाम राकेश रोशन को एक शादी समारोह में पुराने मित्र अमित पटेल मिल गए। उनके साथ उनकी बेटी अमीषा भी थीं वो राकेश रोशन को अच्छी लगी। उन्होंने पूछा कि क्या वह फिल्मों में काम करना चाहेंगी? बस, हिंदी सिनेमा को एक और हीरोइन ऐसे मिल गई।
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फिल्म 'कहो ना प्यार है' के एक सीन में ऋतिक
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मोहनीश और ऋतिक की सीधे सेट पर मुलाकात
फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ में राकेश रोशन ने सहयोगी भूमिकाओं के लिए हिंदी सिनेमा के चुनिंदा कलाकार लिए थे। ‘सरजी’ के रोल में अनुपम खेर ने अपने करियर के चंद बेहतरीन किरदारों में से एक किरदार किया है, उनकी आभा का राकेश रोशन ने शुरू में एक सकारात्मक किरदार के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन जब इसी किरदार का रोल रिवर्सल होता है तो लोग चौंक जाते हैं। दलीप ताहिल ने भी फिल्म को अच्छा सहारा दिया। लेकिन फिल्म की खोज कहे जा सकते हैं दो और कलाकार, एक तो व्रजेश हीरजी जिन्होंने तब तक टेलीविजन में काफी नाम कमा लिया था और दूसरी तनाज ईरानी। ताज्जुब की बात देखिए फिल्म में एक खास किरदार करने वाले मोहनीश बहल इस फिल्म की शूटिंग से पहले ऋतिक रोशन से कभी मिले तक नहीं थे।
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फिल्म 'कहो ना प्यार है' का पोस्टर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लकी अली का शानदार डेब्यू
फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ की कामयाबी में इसके संगीत का भी बड़ा हाथ रहा। राजेश रोशन ने फिल्म का संगीत बनाया भी बिल्कुल जमाने के चलने के हिसाब से था। राकेश रोशन ने इस फिल्म में अपने पुराने दोस्त महमूद के बेटे लकी अली को बतौर प्लेबैक सिंगर पेश किया। लकी अली के अलबम तब तक हिट हो चुके थे और युवाओं की एक बड़ी तादाद उनकी प्रशंसक भी थी। फिल्म में लकी अली ने सिर्फ दो ही गाने गाए। एक तो विजय अकेला का लिखा बेहद सूफियाना गाना, ‘इक पल का जीना, फिर तो है जाना, तोहफा क्या लेके जाएं, दिल ये बताना...!’ और, दूसरा इब्राहिम अश्क का लिखा ‘ना तुम जानो ना हम..’। दोनों गाने उस साल के ही नहीं बल्कि आने वाले कई बरसों के सुपरहिट गानों में शुमार होते रहे। फिल्म में बाबुल सुप्रियो, उदिय नारायण और कुमार शानू ने भी ऋतिक रोशन के लिए आवाजें दी। फिल्म के तीन गाने निर्देशक सावन कुमार टाक ने भी लिखे हैं। राकेश रोशन के करीबी दोस्तों जीतेंद्र और ऋषि कपूर ने फिल्म का म्यूजिक अंधेरी के द क्लब में रिलीज किया था। फिल्म की कहानी का क्रेडिट भी जीतेंद्र को ही दिया गया है, लेकिन उनके असली नाम रवि कपूर का उल्लेख करते हुए।
फिल्म 'कहो ना प्यार है' के एक सीन में ऋतिक-अमीषा पटेल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
न्यूजीलैंड पर्यटन का बदल गया नक्शा
फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ की शूटिंग राकेश रोशन पहले फिजी में करने वाले थे, वहां बात नहीं तो वह न्यूजीलैंड चले गए। फिल्म हिट हुई तो भारत से न्यूजीलैंड जाने वालों की बाढ़ सी आ गई। वहां के वीजा के लिए इतने ज्यादा आवेदन आए कि न्यूजीलैंड सरकार के लोग भारत और वहां दोनों जगह परेशान हो गए। फिल्म के पानी के जहाज वाले दृश्यों की शूटिंग स्टार फ्लायर नामक क्रूज पर हुई और कई दिनों तक लगातार समुद्र में रहने के चलते यूनिट के तमाम लोगों की तबीयत भी इस दौरान खराब हुई।
(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित ये आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)