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बर्थडे स्पेशल: 300 फिल्मों में कादर खान के ये 10 यादगार किरदार, कहलाए अदाकारी के सुपरस्टार

Tue, 22 Oct 2019 12:35 PM IST
भावना शर्मा अमर उजाला ब्यूरो
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कादर खान - फोटो : ट्विटर
हिंदी सिनेमा के सुपरहिट लेखकों में से के के शुक्ला, प्रयागराज और कादर खान की तिकड़ी हिंदी सिनेमा में सुपरहिट फिल्मों की सौ फीसदी गारंटी रही है। पिछले साल के आखिरी दिन कादर खान का टोरंटो, कनाडा में निधन हो गया। अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले कादर खान को हमेशा उनके सदाबहार किरदारों के लिए याद किया जाएगा। कादर खान के जन्मदिन पर आइए आपको बताते हैं उनके 10 बेहतरीन किरदारों के बारे में... 

 
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kader khan govinda
किरदार- के. के. सिंघानिया
फिल्म - दूल्हे राजा(1998)


वर्ष 1998 में आई फ़िल्म दूल्हे राजा हर पीढ़ी के लिए एक मनोरंजक फ़िल्म है। फ़िल्म में फाइव स्टार होटल के मालिक के. के. सिंघानिया को भला कौन भुला सकता है। बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से कादर खान ने इस फ़िल्म में सबका दिल जीता। फ़िल्म के लीड एक्टर गोविंदा के साथ उनकी नोंक झोंक ने दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर किया। साथ ही फ़िल्म में एक पिता होने का किरदार भी उन्होंने शानदार तरीके से निभाया। कॉमेडी से भरपूर इस फ़िल्म में गोविंदा और रवीना टंडन मुख्य भूमिका में थे।
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kader khan
किरदार - कादर भाई/वेटर
फिल्म - बड़े मियां, छोटे मियां (1998)


वर्ष 1998 में ही रिलीज हुई फ़िल्म बड़े मियां छोटे मियां एक कॉमेडी एक्शन फिल्म है। फ़िल्म दो चोर और दो सिपाहियों पर आधारित है। जिनका किरदार उस समय के सबसे बेहतरीन कलाकार अमिताभ बच्चन और गोविंदा ने निभाया है। लेकिन, शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने यह फ़िल्म देखी हो और रेस्टोरेंट में फिल्माया गया वो सीन याद न हो जिसमें कादर खान एक वेटर और उसी रेस्टोरेंट के मालिक के रूप में नज़र आते हैं। वो कुछ मिनटों का डबल रोल लोगों की फिल्मी यादों का एक अभिन्न हिस्सा है।

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kader khan - फोटो : social media
किरदार – धनीराम
फिल्म- दरिया दिल (1988)


वर्ष 1988 में आई फ़िल्म दरिया दिल में अपनी बेहतरीन अदाकारी से कादर खान ने सबका दिल जीत लिया था। अपने बेटों को अच्छाई का पढ़ाने वाले धनीराम, जी कर भी मरने का सस्पेंस पैदा करते हैं। वो चाहते हैं कि उनके तीनों बेटे उनके सबसे छोटे बेटे, यानि फ़िल्म के लीड एक्टर गोविंदा के जैसे मेहनती, नेक और ईमानदार हों। लेकिन, उनके दोनों बड़े बेटे उनकी बातों को हवा में उड़ाते रहते हैं, और अपने बाप से परेशान होकर उनका कत्ल कर देते हैं। बाद में पता चलता है कि धनीराम मरे नहीं, और अपने बेटों की करतूतों को जगजाहिर करते हैं।
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kader khan - फोटो : social media
किरदार - मास्टर चबन
फिल्म – नसीब (1997)


गोविंदा के साथ ही 1997 में आई फ़िल्म नसीब में कादर खान गोविंदा के बुरे वक्त के दोस्त की तरह सामने आए। इस फ़िल्म में कादर खान का रोल एक दर्जी का है। फ़िल्म में कादर खान के डायलॉग दिल की गहराई में उतर जाते हैं। "ज़िंदगी तो खुदा की रहमत है, जो न समझे उसकी ज़िंदगी पर लानत है।" कुछ इसी तरह के डायलॉग ने इस फ़िल्म को यादगार बना दिया।
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kader khan and govinda - फोटो : social media
किरदार - कमिश्नर जगमोहन
फिल्म - छोटे सरकार (1996)


नब्बे के दशक के सबसे बेहतरीन कलाकारों में से एक गोविंदा की छोटे सरकार फ़िल्म भी एक सराहनीय फ़िल्म है। इस फ़िल्म को बेहतर बनाने में एक बड़ा योगदान कादर खान का भी है। पुलिस कमिश्नर जगमोहन के रोल में दर्शकों ने उन्हें बहुत पसंद किया। फ़िल्म में पुलिस की चालाकी, बहादुरी और होशियारी का बेहतरीन नमूना कादर खान ने अपने बेहतरीन अभिनय से पेश किया है।
 
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Kader Khan
किरदार - हंसमुख राय
फिल्म – आंखें (1993)


1993 में आई फ़िल्म "आंखें" के तारे बुन्नू और मुन्नू को कौन नहीं जानता। इन दो शरारती बच्चों के पिता हसमुख राय, यानि कादर खान अपने बेटों की नासमझ हरकतों से बहुत परेशान हैं। वह अपने बेटों को सुधारने की हर संभव कोशिश करना चाहते हैं। एक पिता की अपनी औलादों के लिए चिंता, कादर खान के अभिनय से साफ झलकती है। समय समय पर बच्चों को अच्छी नसीहत देना भी एक अच्छे पिता की तरह वह कभी नहीं भूलते। इस फ़िल्म में भी कादर खान का डबल रोल है।

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kader khan
किरदार - अकलिंदर "टोपीचंद" भंगारी 
फिल्म - अंखियों से गोली मारे (2002)


भंगारी दादा का नाम तो याद होगा ही। मुंबई चोर बाजार में बहुत बड़ी भंगार की दुकान के मालिक भंगारी दादा यानी कि कादर खान। ये अपनी बेटी की शादी एक गैंगस्टर से करना चाहते हैं, लेकिन इनकी बेटी एक रईस यानि कि फ़िल्म लीड एक्टर गोविंदा से प्यार करती है। ये फ़िल्म कादर खान की दमदार एक्टिंग के लिए एक यादगार फ़िल्म है। भंगारी दादा का वो साधारण चरित्र भी कादर खान के होने से बहुत ही असाधारण लगता है।

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kader khan - फोटो : twitter
किरदार – पीताम्बर
फिल्म - हम हैं कमाल के (1993)


वर्ष 1993 में रिलीज हुई फ़िल्म दो अंधे और बहरे चरित्रों पर आधारित है। अंधे का किरदार अनुपम खेर ने और बहरे का किरदार कादर खान ने निभाया है। यह एक कॉमेडी एक्शन फिल्म है। यही फ़िल्म सच में विकलांगों को दिव्यांग दर्शाती है और एक और एक ग्यारह के मुहावरे को भी परिभाषित करती है। फ़िल्म में नीलाम्बर और पीताम्बर अंधे और बहरे होने के बावजूद जैसे अपने दुश्मनों को धूल चटाते हैं और जैसे अपनी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाते हैं, वह काबिलेतारीफ है।

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kader khan and Govinda
किरदार - किशन सिंह
फिल्म - राजा बाबू (1994)


जमीदारों के ठाट और शाही ज़िंदगी में पले बढ़े हुए राजा बाबू यानि गोविंदा। आप सोच रहे होंगे कि फिर से गोविंदा! अभी क्या बताएं? गोविंदा और कादर खान की कॉमिक जोड़ी थी ही इतनी मशहूर और लोगों की पसंदीदा कि लोग इनकी फिल्मों को हाथों-हाथ लेते थे। इस फ़िल्म में भी कादर खान ने गोविंदा के बाप का ही किरदार निभाया है। उनकी पत्नी और गोविंदा की मां अरुणा ईरानी अपने बच्चे की हर हरकत पर पर्दा डालती है। वहीं, दूसरी ओर कादर खान यानि किशन सिंह अपने बेटे के निकम्मेपन से परेशान हैं। इस फ़िल्म में भी कादर खान ने बाप के रोल के साथ इंसाफ किया है। अपने बेटे को सही रास्ता दिखाने के लिए वह कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते।
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kader khan
किरदार - मि. खुराना
फिल्म - साजन चले ससुराल (1996)


यह फ़िल्म अपने समय की सबसे बेहतरीन कॉमेडी ड्रामा फिल्मों में से एक है। गोविंदा, करिश्मा कपूर और तब्बू जैसे बड़े कलाकारों से सजी यह फ़िल्म मनोरंजन का सबूत देने वाली फिल्म है। इस फ़िल्म में कादर खान के किरदार का नाम मि. खुराना है, जोकि तब्बू के पिता हैं। फ़िल्म में मि. खुराना को टाइम ज्यादा नहीं दिया गया है, लेकिन जितना भी है वो यादगार है।
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