के. आसिफ
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पूरी फिल्म की शूटिंग के दौरान के. आसिफ और शाहपुरजी के बीच नोकझोक चलती रही। लेकिन शाहपुरजी को ये बात पता थी कि ये आदमी बहुत ईमानदार है। इसने इस फिल्म में डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं, लेकिन उसने अपनी जेब में एक फूटी कौड़ी भी नहीं डाली है। मुगल-ए-आजम अपने जमाने की सबसे मंहगी और सफल फिल्म थी, हालांकि रिलीज के समय ये फिल्म उतनी नहीं चली लेकिन बाद के वर्षों में इसे कल्ट फिल्म माना गया। निर्देशक के. आसिफ ताउम्र एक किराए के घर में रहे और टैक्सी पर चले। 9 मार्च 1971 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। आज के आसिफ की जयंती है। उनका जन्म आज ही के दिन इटावा में हुआ था।